
किसानों के खेत अक्सर मई से जून के महीने में खाली हो जाते हैं. खरीफ और रबी की फसलों को काटने के बाद यह सबसे मुफीद वक्त होता है कि आप अपनी जमीन की सेहत का जायजा लें. दरअसल, साल भर फसलें मिट्टी से जरूरी पोषण तत्व उपयोग करती हैं, जिससे खेत की मिट्टी में कुछ तत्वों की कमी हो जाती है. अगर चाहते हैं कि आने वाले साल में पैदावार शानदार मिले, तो मिट्टी का टेस्ट कराना बेहद जरूरी है.
बिना जानकारी के अंधाधुंध केमिकल खाद या उर्वरकों का इस्तेमाल करना न सिर्फ आपकी जेब पर बोझ यानी लागत बढ़ाता है, बल्कि जमीन की उर्वरा शक्ति को भी हमेशा के लिए बर्बाद कर देता है. इसकी जगह अगर किसान 'आईएनएम' (एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन) तकनीक अपनाएं और मिट्टी की जरूरत के हिसाब से खाद डालें, तो फसल लहलहा उठेगी और मिट्टी की तासीर भी बनी रहेगी.
विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे इंसान की बीमारी का पता खून की जांच से चलता है, वैसे ही खेत की कमजोरी मिट्टी की जांच से पता चलता है मिट्टी में किस चीज की ज्यादती है और किस चीज की कमी. यह सिर्फ लैब में ही मालूम हो सकता है. जब आपको असलियत मालूम होगी, तभी आप सही मात्रा में खाद डालकर अपनी जमीन की सेहत सुधार पाएंगे और मुनाफे वाली खेती कर सकेंगे.
आजकल सरकारी लैब के अलावा कई प्राइवेट और सहकारी संस्थाएं भी यह सुविधा दे रही हैं. मिट्टी जांच से पीएच लेवल, नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश के साथ-साथ जिंक और आयरन जैसे सूक्ष्म तत्वों की सही मात्रा का पता चलता है. जब आपको असलियत मालूम होगी, तभी आप सही मात्रा में खाद डालकर अपनी जमीन की सेहत सुधार पाएंगे और मुनाफे वाली खेती कर सकेंगे. मिट्टी की जांच का सारा दारोमदार इस बात पर है कि आपने सैंपल कैसे लिया है.
विशेषज्ञों के मुताबिक, मई-जून के महीने में एक एकड़ खेत में कम से कम 10 से 15 अलग-अलग जगहों से मिट्टी उठानी चाहिए. इसके लिए पूरे खेत में 'जिग-जैग तरीके से पॉइंट बनाएं ताकि कोई भी कोना छूट न जाए. ध्यान रहे कि अगर खेत में फसल खड़ी हो या हाल ही में खाद डाली गई हो, तो नमूना हरगिज न लें.
साथ ही, पेड़ की छाया वाली जगह से भी मिट्टी न उठाएं. नमूना लेने के लिए जमीन की ऊपरी परत को हल्का सा साफ करें और खुरपी की मदद से 'V' आकार का करीब 6 इंच गहरा गड्ढा खोदें. उस गड्ढे की एक तरफ से ऊपर से नीचे तक 2-3 सेंटीमीटर मोटी मिट्टी की परत काटकर उसे साफ बर्तन या कपड़े में जमा कर लें.
जब आप 10-15 जगहों से मिट्टी इकट्ठा कर लेते हैं, तो काफी ज्यादा मात्रा हो जाती है. इसे लैब भेजने के लिए तैयार करने का एक खास तरीका है सारी मिट्टी को आपस में खूब अच्छी तरह मिक्स कर लें और उसे एक ढेर बनाकर चार हिस्सों में बांट दें. आमने-सामने के दो हिस्से हटा दें और बाकी बचे दो हिस्सों को फिर से मिलाएं. यह प्रक्रिया तब तक दोहराएं जब तक आपके पास सिर्फ आधा किलो मिट्टी न बच जाए. यही आधा किलो मिट्टी पूरे खेत की नुमाइंदगी करेगी. इस मिट्टी को एक साफ थैली में डालें और उस पर अपना नाम, पता, मोबाइल नंबर और खेत का खसरा नंबर जरूर लिखें ताकि रिपोर्ट मिलने में कोई दुश्वारियां न हों.
सरकार की 'मृदा स्वास्थ्य कार्ड में आपकी जमीन का पूरा कच्चा-चिट्ठा होता है. इसमें मिट्टी की गुणवत्ता, नमी सोखने की सलाह और जरूरी दिशा-निर्देश दर्ज होते हैं, जिससे किसान अपनी जमीन के मिजाज के हिसाब से सही फसल चुन सकते हैं. विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि हर 3 से 4 साल के फासले पर मिट्टी की जांच दोबारा जरूर करानी चाहिए. इससे आप बेवजह के खर्चों से बचेंगे और आपकी जमीन आने वाले भविष्य के लिए भी उपजाऊ बनी रहेगी. याद रखें, स्वस्थ मिट्टी ही खुशहाल किसान और भरपूर पैदावार की बुनियाद है.
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