चीन को चावल निर्यात के लिए बदले नियम, APEDA ने जारी की नई मानक प्रक्रिया

चीन को चावल निर्यात के लिए बदले नियम, APEDA ने जारी की नई मानक प्रक्रिया

चीन द्वारा GMO (जेनेटिकली मोडिफाइड ऑर्गेनाइज्म) को लेकर भारतीय नॉन-बासमती चावल की खेप पर आपत्ति जताने के बाद, APEDA ने निर्यात नियमों को और सख्त कर दिया है. अब चीन भेजे जाने वाले चावल की खेप को नई मानक प्रक्रिया (SOP) के तहत जांच और प्रमाणन से गुजरना होगा.

चावल की बंपर खरीदचावल की बंपर खरीद
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Jun 13, 2026,
  • Updated Jun 13, 2026, 12:40 PM IST

चीन द्वारा GMO (जेनेटिकली मोडिफाइड ऑर्गेनाइज्म) को लेकर भारतीय नॉन-बासमती चावल की खेप को रिजेक्ट किए जाने के बाद, कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) ने चावल निर्यात के लिए नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी की है. यह नई प्रक्रिया 9 जून से लागू कर दी गई है. भारतीय टूटे हुए चावल की चीन जैसे पड़ोसी बाजारों में मजबूत मांग को देखते हुए APEDA ने निर्यात व्यवस्था को और सख्त किया है. साथ ही, अफ्रीका के कुछ हिस्सों में घटते निर्यात के कारण चावल क्षेत्र को होने वाले संभावित नुकसान से बचाने के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं.

APEDA की जनरल मैनेजर विनीता सुधांशु ने 8 जून को जारी नोटिस में कहा कि चीन को चावल निर्यात करते समय वहां की सैनिटरी और फाइटोसैनिटरी (SPS) जरूरतों का पालन सुनिश्चित करना जरूरी है. इसके लिए निर्यातकों और संबंधित पक्षों के मार्गदर्शन के लिए नई प्रक्रिया तैयार की गई है. उन्होंने बताया कि यह SOP 9 जून से APEDA को मिलने वाले सभी RCAC (Registration-cum-Allocation Certificate) आवेदनों पर लागू होगी और चीन भेजी जाने वाली चावल की सभी खेपों के लिए अनिवार्य होगी. APEDA ने सभी चावल निर्यातकों से नई गाइडलाइंस का सख्ती से पालन करने और तय मानकों के अनुसार ही निर्यात प्रक्रिया पूरी करने की अपील की है, ताकि भारतीय चावल की क्वालिटी और वैश्विक बाजार में भरोसा कायम रखा जा सके.

अफ्रीका में मांग घटने के बाद चीन पर बढ़ी नजर

राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष बी.वी. कृष्णा राव ने APEDA की नई SOP का स्वागत किया है. उन्होंने कहा कि चीन भारतीय चावल के लिए एक बड़ा बाजार है, क्योंकि अफ्रीका के कई देशों में GMO को लेकर चिंताओं के कारण भारतीय चावल की मांग पहले जैसी नहीं रही है. राव के मुताबिक, जिन निर्यात सौदों पर पहले ही सहमति हो चुकी है और जिन चावल की खेपों पर काम चल रहा है, उन्हें नई व्यवस्था लागू होने तक जारी रखने की अनुमति मिलनी चाहिए. उन्होंने सुझाव दिया कि निर्यातकों को तैयारी के लिए समय देने के लिए SOP को 1 अगस्त से लागू किया जाए.

वहीं, कुछ अफ्रीकी देशों जैसे सेनेगल, बुर्किना फासो, बेनिन और सूडान ने चावल आयात को कम करने के लिए नए प्रतिबंध लगाए हैं, जिससे भारतीय नॉन-बासमती चावल के निर्यात पर असर पड़ा है. APEDA के चेयरमैन अभिषेक देव ने निर्यातकों से कहा है कि वे अफ्रीकी बाजारों के अलावा फिलीपींस, इंडोनेशिया और चीन जैसे संभावनाओं वाले बाजारों पर भी ध्यान दें. उन्होंने कहा कि किसानों को ऐसी चावल की किस्में उगाने के लिए प्रोत्साहित करना होगा, जिनकी इन देशों में ज्यादा मांग है.  

चीन के सख्त रुख, GMO टेस्टिंग के लिए नई व्यवस्था

कुछ निर्यातकों ने जब चीन द्वारा चावल की खेप रिजेक्ट किए जाने का मुद्दा उठाया, तो APEDA के चेयरमैन अभिषेक देव ने बताया कि इस मामले को लेकर चीन के जनरल एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ कस्टम्स (GACC) के साथ बातचीत हुई थी. भारत ने चीन को स्पष्ट किया कि वह चावल उत्पादन में नॉन-GMO देश है. इसके लिए भारत ने ICAR और GEAC की रिपोर्ट भी साझा की, जिसमें बताया गया कि देश में न तो GMO चावल के बीज उपलब्ध हैं और न ही GM चावल की व्यावसायिक खेती को मंजूरी दी गई है.

हालांकि, चीन अपने फैसले पर कायम रहा. इसके बाद भारत ने चावल निर्यात के लिए नई SOP जारी की, ताकि GMO जांच की प्रक्रिया सभी निर्यातकों के लिए एक जैसी हो. नई व्यवस्था के तहत चीन को चावल भेजने के लिए केवल उन्हीं राइस मिलों और प्रोसेसिंग यूनिट्स को अनुमति होगी, जो DPPQS के तहत रजिस्टर्ड हैं. साथ ही, निर्यातकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे GACC से मंजूर सुविधाओं से ही चावल की खरीद करें.

APEDA ने यह भी अनिवार्य किया है कि चीन भेजे जाने वाले चावल के लिए DPPQS से जारी फाइटो-सैनिटरी सर्टिफिकेट लेना होगा. इसके अलावा, निर्यात से पहले चावल की खेप की GMO जांच APEDA से मान्यता प्राप्त लैब में करानी होगी. जांच में सफल होने के बाद ही चावल की खेप चीन भेजी जा सकेगी.

चावल निर्यात में तेजी, GMO जांच के बाद ही मिलेगी मंजूरी

चीन को चावल निर्यात करने वाले एक्सपोर्टर्स को अब GMO जांच के लिए तय प्रक्रिया का पालन करना होगा. इसके तहत निर्यातकों को मान्यता प्राप्त लैब में सैंपल जांच के लिए आवेदन करना होगा. सैंपल लेने के बाद संबंधित चावल की खेप को किसी दूसरी जगह ले जाने की अनुमति नहीं होगी. जांच में चावल का सैंपल सही पाए जाने के बाद ही एक्सपोर्टर APEDA को जांच प्रमाण पत्र जमा कर सकेंगे और इसके बाद रजिस्ट्रेशन-कम-एलोकेशन सर्टिफिकेट (RCAC) के लिए आवेदन कर पाएंगे.

भारत से चीन को नॉन-बासमती चावल का निर्यात तेजी से बढ़ रहा है. वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने चीन को करीब 103.90 मिलियन डॉलर (922 करोड़ रुपये) मूल्य का 3.15 लाख टन नॉन-बासमती चावल निर्यात किया. वहीं, 2024-25 में यह निर्यात करीब 79.43 मिलियन डॉलर (677 करोड़ रुपये) का था, जिसमें 1.80 लाख टन चावल भेजा गया था. पहले चीन की कुछ व्यापारिक पाबंदियों के कारण भारत से चावल निर्यात काफी कम था. 2019-20 में चीन को केवल 567 टन चावल निर्यात हुआ था, लेकिन प्रतिबंधों में ढील के बाद 2020-21 में यह बढ़कर 3.31 लाख टन तक पहुंच गया. 

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