केंद्र का दावा: इथेनॉल ब्लेंडिंग से सस्ता रहा पेट्रोल, किसानों को भी फायदा

केंद्र का दावा: इथेनॉल ब्लेंडिंग से सस्ता रहा पेट्रोल, किसानों को भी फायदा

केंद्र सरकार ने कहा है कि इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम से देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हुई है, कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटी है और किसानों की आय बढ़ी है. सरकार ने स्पष्ट किया कि खाद्य सुरक्षा से समझौता किए बिना केवल अतिरिक्त खाद्यान्न का उपयोग इथेनॉल उत्पादन में किया जाता है.

The government also claimed that petrol prices could have touched ₹125 per litre during the recent West Asia crisis if ethanol blending had not reduced India's dependence on imported crude oilThe government also claimed that petrol prices could have touched ₹125 per litre during the recent West Asia crisis if ethanol blending had not reduced India's dependence on imported crude oil
क‍िसान तक
  • New Delhi,
  • Jul 31, 2026,
  • Updated Jul 31, 2026, 7:40 PM IST

केंद्र सरकार ने शुक्रवार को इथेनॉल ब्लेंडिंग पेट्रोल (ईबीपी) कार्यक्रम का बचाव करते हुए कहा कि इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हुई है, विदेशी कच्चे तेल पर निर्भरता कम हुई है और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिली है. सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि इथेनॉल उत्पादन के कारण गरीबों के लिए निर्धारित अनाज की आपूर्ति पर कोई असर नहीं पड़ा है.

सरकार ने उन आरोपों को खारिज किया जिनमें कहा गया था कि जन वितरण प्रणाली (पीडीएस) के लिए खरीदे गए अनाज को इथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल किया जा रहा है. केंद्र के अनुसार, सबसे पहले राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए), पीडीएस, कल्याणकारी योजनाओं और बफर स्टॉक की जरूरतों को पूरा किया जाता है. इसके बाद बचा हुआ अतिरिक्त अनाज ही इथेनॉल उत्पादन के लिए मंजूर किया जाता है.

टूटे अनाज से बनता है इथेनॉल

सरकार ने बताया कि इथेनॉल उत्पादन में मुख्य रूप से टूटे अनाज, टूटे हुए चावल और कुछ खराब अनाजों का उपयोग किया जाता है, जो गोदामों में खराब हो सकते हैं. साथ ही प्रधानमंत्री जी-वान योजना के तहत कृषि अवशेषों से दूसरी पीढ़ी (2जी) के इथेनॉल उत्पादन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है.

एफसीआई के चावल के उपयोग को लेकर सरकार ने कहा कि यह इथेनॉल उत्पादन के लिए मंजूर कई कच्चे माल में से केवल एक है और इसकी कीमत भी सरकार द्वारा तय नीति के अनुसार निर्धारित की जाती है.

सरकार के मुताबिक, मक्का से बने इथेनॉल का खरीद मूल्य सबसे अधिक 71.86 रुपये प्रति लीटर है. इसके बाद गन्ने के रस और सिरप से बने इथेनॉल का मूल्य 65.61 रुपये प्रति लीटर, टूटे अनाज से बने इथेनॉल का 64 रुपये प्रति लीटर, बी-हेवी शीरे से 60.73 रुपये प्रति लीटर, एफसीआई चावल से 60.32 रुपये प्रति लीटर और सी-हेवी शीरे से 57.97 रुपये प्रति लीटर निर्धारित है.

FCI चावल की हिस्सेदारी बहुत कम

केंद्र सरकार ने बताया कि इथेनॉल सप्लाई ईयर 2023-24 में कुल उत्पादन में एफसीआई चावल की हिस्सेदारी केवल 0.02 प्रतिशत थी. वर्ष 2025-26 में अतिरिक्त स्टॉक उपलब्ध होने के बाद यह बढ़कर 24.64 प्रतिशत हुई, जबकि मक्का की हिस्सेदारी 42.6 प्रतिशत से घटकर 35.96 प्रतिशत रह गई. सरकार ने इसे सही नीति का उदाहरण बताया.

सरकार ने दावा किया कि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के दौरान इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम ने उपभोक्ताओं को राहत दी. सरकार के अनुसार, जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत लगभग 135 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी, तब इथेनॉल ब्लेंडिंग नहीं होने की स्थिति में दिल्ली में पेट्रोल की कीमत करीब 125 रुपये प्रति लीटर हो सकती थी. लेकिन 20 प्रतिशत इथेनॉल ब्लेंडिंग के कारण उपभोक्ताओं को पेट्रोल 94.77 रुपये प्रति लीटर की दर से उपलब्ध हुआ.

1.97 लाख करोड़ रुपये की विदेशी करेंसी बची

सरकार के अनुसार, इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम से अब तक 1.97 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी करेंसी की बचत, 316 लाख मीट्रिक टन से अधिक कच्चे तेल के आयात का विकल्प, 950 लाख मीट्रिक टन से अधिक कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी और 1.66 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किसानों और डिस्टिलरी फैक्ट्रियों को किया गया है.

केंद्र ने कहा कि भारत अपनी तेल जरूरतों का करीब 88 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है. ऐसे में इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम देश की लंबे दिनों की ऊर्जा सुरक्षा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो तेल आयात पर निर्भरता घटाने, स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने और किसानों को आर्थिक लाभ पहुंचाने में मदद कर रहा है.

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