
सितंबर में खाने की चीजों की महंगाई (खाद्य मुद्रास्फीति) बढ़कर 9.2 परसेंट हो गई, जो जुलाई में 5.4 परसेंट थी और यह 13 महीने का निचला स्तर था. निश्चित रूप से, आलू और प्याज की खुदरा कीमतों में अप्रैल-सितंबर में साल-दर-साल सबसे अधिक वृद्धि हुई है. हालांकि, इसी अवधि के दौरान टमाटर की कीमतों में 18 परसेंट की कमी आई है. अनाज और दालें भी महंगी हो गई हैं.
इस साल सितंबर तक तुर दाल की कीमतों में 23.4 फीसद की वृद्धि देखी गई जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह बढ़ोतरी 23.7 फीसद थी. इसके विपरीत, मूंगफली, सरसों और ताड़ यानी पाम ऑयल जैसे खाद्य तेलों की खुदरा कीमतों में पिछले वित्त साल की इसी अवधि की तुलना में इस वित्त वर्ष की पहली छमाही के दौरान कमी आई है.
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मीडिया में आए डेटा पर गौर करें तो इस साल बेहतर मॉनसून और खरीफ-रबी की अच्छी पैदावार अनुमानों के बावजूद अनाजों, तेल और सब्जियों के भाव में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है. सरकारी आंकड़ों से पता चलता है कि खाने की चीजों की बढ़ती कीमतों के कारण सितंबर में भारत की खुदरा महंगाई दर नौ महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई. अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित वार्षिक खुदरा महंगाई सितंबर में बढ़कर 5.49 परसेंट हो गई, जो अगस्त में 3.65 परसेंट से अधिक थी. सांख्यिकी मंत्रालय के अनुसार, अगस्त में 5.6 परसेंट की वृद्धि की तुलना में खाद्य महंगाई सालाना 9.24 परसेंट बढ़ी. यह जून 2024 (9.36 परसेंट) और दिसंबर 2023 (9.53 परसेंट) के बाद सबसे अधिक है.
एक हालिया सर्वे से पता चला है कि हर दो में से एक घर खाने के तेल की ऊंची कीमतों से जूझ रहा है, जिससे परिवार अपनी खपत कम कर रहे हैं और सस्ते तेल ब्रांडों की ओर रुख कर रहे हैं. महंगाई का दबाव त्योहारी सीजन के साथ और भी परेशान करने वा है, जिससे परिवार का बजट बिगड़ जाता है. त्योहारी सीजन के ठीक बाद शादियों का सीजन शुरू हो जाता है, जिससे खाने के तेल और अनाजों की ऊंची कीमतों के कारण परिवार के बजट पर दबाव पड़ेगा.
हालांकि, सरकार महंगाई को कम करने की कोशिश कर रही है. इसने भारत ब्रांड के तहत कई प्रोडक्ट लॉन्च किए हैं - जैसे भारत आटा, चावल और दाल - जो आम लोगों को सस्ती दरों पर सीधे बेचे जा रहे हैं. इसके अलावा, यह कीमतों को कम करने के लिए देश भर में 100 से अधिक केंद्रों पर प्याज और टमाटर जैसी सस्ती सब्जियां उपलब्ध करा रही है. सरकारी रिपोर्ट से पता चलता है कि इस कदम से महंगाई को मामूली काबू में करने में कामयाबी मिली है लेकिन बहुत कुछ नहीं बदला है. चिंता वाली बात इसलिए है क्योंकि त्योहारों का सीजन शुरू है और इसके ठीक बाद शादी-ब्याह का सीजन शुरू होगा. खासकर उत्तर भारत में खाने-पीनी की चीजों की महंगाई सरकार के लिए बड़ा संकट बन सकती है.
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