
मुंबई के न्हावा शेवा बंदरगाह पर भारतीय कस्टम अधिकारियों ने एक बड़े आयात घोटाले का खुलासा किया है. कोमोरोस के झंडे वाले जहाज WIV Reyfa को रोके जाने के बाद करीब 309 कंटेनरों में भरे सूखे मेवों की खेप जांच के दायरे में है, जिनमें खास तौर पर अखरोट शामिल हैं. इन कंटेनरों को अफगानिस्तान का बताकर शून्य आयात शुल्क का लाभ लेने की कोशिश की गई थी, जबकि जांच में इनका अफगान मूल नहीं पाया गया है.
कस्टम विभाग की सेंट्रल इंटेलिजेंस यूनिट के मुताबिक, इस कार्रवाई की शुरुआत डारेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस से मिली पुख्ता सूचना के बाद हुई. शुरुआती जांच में सामने आया है कि ड्यूटी चोरी करीब 50 करोड़ रुपये तक की हो सकती है और इस मामले में एक व्यक्ति की गिरफ्तारी भी हो चुकी है.
बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, जांच एजेंसियों ने कहा कि सभी कंटेनर ईरान के बंदर अब्बास पोर्ट पर लोड किए गए थे, लेकिन दस्तावेजों में कुछ खेपों का पोर्ट ऑफ लोडिंग यूएई के जेबेल अली के रूप में दिखाया गया. इस फर्जीवाड़े का मकसद दक्षिण एशिया मुक्त व्यापार समझौता (SAFTA- South Asia Free Trade Agreement) के तहत अफगान मूल के सामान पर मिलने वाली जीरो ड्यूटी का फायदा उठाना था.
डीआरआई की पड़ताल में कंटेनरों को तीन श्रेणियों में बांटा गया. पहली श्रेणी में 141 कंटेनर ऐसे मिले जो बंदर अब्बास से लोड हुए, लेकिन कागजों में जेबेल अली दर्शाया गया. दूसरी श्रेणी में 66 कंटेनर थे, जिनमें लोडिंग और दस्तावेज दोनों में बंदर अब्बास का ही जिक्र था. तीसरी श्रेणी में 106 कंटेनर ऐसे पाए गए, जिनके खिलाफ कोई बिल ऑफ एंट्री ही दाखिल नहीं किया गया था.
कस्टम अधिकारियों ने कहा कि अफगानिस्तान के लैंडलॉक्ड देश होने का फायदा उठाकर आयातकों ने ट्रांजिट दस्तावेजों की पूरी चेन गढ़ी. इसमें फर्जी बिल ऑफ लैडिंग (माल के लदान का बिल), अधूरी और बिना हस्ताक्षर वाली शिपिंग कॉपी और ‘शिप्ड ऑन बोर्ड’ तारीख के बिना दस्तावेज शामिल थे. इन कागजों को ई-संचित सिस्टम पर अपलोड कर यह दिखाने की कोशिश की गई कि माल अफगानिस्तान से ईरान होते हुए यूएई पहुंचा और फिर भारत आया.
सीआईयू ने सभी फील्ड अधिकारियों को सतर्क करते हुए निर्देश दिए हैं कि अफगान मूल बताकर SAFTA लाभ मांगने वाले मामलों में ट्रांजिट दस्तावेजों की गहन जांच की जाए. उधर, एक आयातक ने इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया है, जबकि कस्टम विभाग खेप की कीमत के बराबर बैंक गारंटी की मांग कर रहा है.