Kisan Karwan: रायबरेली के जमुरावां पहुंचा किसान कारवां, किसानों ने जाना आमदनी डबल करने का तरीका

Kisan Karwan: रायबरेली के जमुरावां पहुंचा किसान कारवां, किसानों ने जाना आमदनी डबल करने का तरीका

रायबरेली के जमुरावां गांव में ‘किसान तक’ का किसान कारवां पहुंचा, जहां किसानों को आधुनिक खेती, पशुपालन और नई तकनीकों से आमदनी बढ़ाने के तरीके बताए गए. विशेषज्ञों की सलाह और योजनाओं की जानकारी ने किसानों की उम्मीदें बढ़ा दीं.

Kisan Karwan RaibarielyKisan Karwan Raibariely
अंक‍ित कुमार स‍िंह
  • रायबरेली,
  • Feb 17, 2026,
  • Updated Feb 17, 2026, 5:51 PM IST

सई नदी, लोन नदी और गंगा नदी के किनारे बसा रायबरेली जिले में ‘किसान तक’ का किसान कारवां मंगलवार को विकास खंड महराजगंज के जमुरावां गांव पहुंचा. उत्तर  प्रदेश के 75 जिलों में चल रही इस विशेष कवरेज के तहत यह कारवां का 26वां पड़ाव रहा. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लेकर आधुनिक खेती से जुड़ी जानकारियां हासिल की. इस अवसर पर कृषि विभाग के अधिकारियों, पशुपालन विभाग के अधिकारियों तथा कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों, स्वयं सहायता समूह सहित प्रगतिशील किसानों ने सक्रिय भागीदारी निभाई. जहां विशेषज्ञों ने किसानों को उन्नत बीजों के चयन, फसल संरक्षण, मृदा परीक्षण, जैविक एवं प्राकृतिक खेती के तरीकों के साथ-साथ सरकारी योजनाओं की जानकारी दी.

किसानों को मिली खेती-पशुपालन से जुड़ी जानकारी

धान, गेहूं जैसी परंपरागत फसलों की खेती सहित सब्जियों की खेती के लिए मशहूर जिले में जब किसान तक किसान कारवां पहुंचा तो पूरे गांव के किसानों के चेहरों पर एक अलग ही खुशी का माहौल देखने को मिला. वहीं, कार्यक्रम के दौरान किसानों ने अपनी समस्याएं अधिकारियों के सामने रखीं. उनके सवालों का जवाब विभाग के अधिकारियों द्वारा विभिन्न चरणों के माध्यम से जानकारी देकर दिया गया. साथ ही हार्वेस्ट पल्स द्वारा अपने कृषि उत्पादों से जुड़ी जानकारी दी गई. इस दौरान अतिथियों सहित प्रगतिशील किसानों को सम्मानित भी किया गया. वहीं, लकी ड्रॉ के जरिए कुल 12 किसानों को नकद राशि भी वितरित की गई.

इस तरह से बढ़ेगी फसल की पैदावार और कमाई

पहले चरण में कृषि विज्ञान केंद्र रायबरेली द्वितीय के डॉ. सुधांशु वर्मा, एग्रोनॉमिस्ट द्वारा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन को लेकर किसानों को जानकारी देते हुए कहा कि आज मिट्टी की उर्वराशक्ति खत्म हो रही है. इसे सही करने के लिए किसानों को गोबर खाद से लेकर जैविक खाद का उपयोग करना जरूरी है. उन्होंने कहा कि एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि किसानों की आमदनी बढ़ेगी. साथ ही उत्पादन में भी वृद्धि आएगी. करीब 10 से 15 फीसदी तक कमाई बढ़ जाती है. उन्होंने जायद सीजन में दलहन की खेती के साथ खरीफ सीजन में मक्का की खेती करने का सुझाव दिया.

गौशाला से भी किसान ले सकते हैं पशु

दूसरे चरण में रायबरेली के सीवीओ डॉ. के. द्विवेदी ने मुख्यमंत्री सहभागिता योजना के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि इस योजना के तहत किसान गौशाला से गाय लेकर पशुपालन कर सकते हैं. इसके साथ ही उन्होंने बकरी पालन, अंडा उत्पादन के लिए मुर्गी पालन, भैंस पालन, खरगोश और भेड़ पालन को लेकर किसानों को जानकारी दी. उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा इन क्षेत्रों के लिए अनुदान का प्रावधान किया गया है.

आज पशुपालन से किसान केवल आर्थिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक स्तर पर भी अपना बदलाव कर सकते हैं. आगे उन्होंने साइलेज बनाने को लेकर भी किसानों को जागरूक किया और बताया कि इसे किसान किस तरह तैयार कर सकते हैं. यह दो साल तक खराब नहीं होती है. अगर दूध उत्पादन में बढ़ोतरी करनी है तो पशुओं को साइलेज जरूर खिलाएं. उन्होंने डुम्बा भेड़ के पालन को लेकर कहा कि इस नस्ल के पालन से किसान कम लागत में अधिक कमाई कर सकते हैं. इसका बच्चा 25 हजार रुपये तक बिकता है.

बायोफोर्टीफाइड वैरायटी उगाने का दिया सुझाव

तीसरे चरण में हार्वेस्ट पल्स कंपनी की अधिकारी जेन फ्लोरिना ने अपनी कंपनी के बारे में बताते हुए कहा कि उनकी कंपनी किसानों के लिए काम कर रही है. बायोफोर्टीफाइड वैरायटी को लेकर उन्होंने कहा कि अगर इस तरह की वैरायटी का चयन किसान करते हैं तो उसकी खेती करने के लिए कोई अलग तकनीक का प्रयोग नहीं करना होता है.

इस  वैरायटी के चयन से उत्पादन के साथ कई पोषक तत्व भी आसानी से मिलते हैं. अगर किसान को स्वस्थ रहना है तो उन्हें बायोफोर्टीफाइड वैरायटी का चयन करना होगा. यह जो वैरायटी तैयार की गई है, इसमें जिंक, आयरन, कैल्शियम के साथ अन्य पोषक तत्व मिलते हैं.

मशरूम और फलों की खेती से बढ़ेगी आमदनी

चौथे चरण में धर्मेंद्र कुमार, भारतीय उद्यान निरीक्षक ने मशरूम उत्पादन के साथ फलों की खेती को लेकर जानकारी देते हुए कहा कि किसान इसकी खेती करके अच्छी कमाई कर सकते हैं.इसके लिए सरकार द्वारा अनुदान का प्रावधान किया गया है. आगे उन्होंने कहा कि स्ट्रॉबेरी और ड्रैगन फ्रूट जैसी विदेशी फसलों की खेती करने के लिए भी अनुदान दिया जा रहा है. सोलर ड्रायर को लेकर बताया कि सोलर ड्रायर प्लांट लगाने पर सरकार 40 फीसदी तक अनुदान देती है.

यह प्लांट लगाकर किसान फल, सब्जी और फूलों को सुखाकर उनका उपयोग पाउडर सहित अन्य उत्पादों में कर सकते हैं.  पॉलीहाउस के उपयोग के बारे में बताया कि कैसे समय से पहले सब्जियों का उत्पादन किया जा सकता है.  प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग योजना को लेकर भी जानकारी दी.  इसमें 18 साल से अधिक उम्र के लोग इसका फायदा लेकर अपना खुद का उद्योग स्थापित कर सकते हैं.

मिट्टी जांच से खेती में होगी कमाई

पांचवें चरण में कृषि विज्ञान केंद्र रायबरेली के वैज्ञानिक (कृषि प्रसार) द्वितीय डॉ. अभिलाष सिंह मौर्य ने मिट्टी जांच की उपयोगिता को लेकर बताया कि अगर किसान मिट्टी की जांच करते हैं तो उन्हें खेती में काफी फायदा होगा. मिट्टी जांच के लिए सरकार की ओर से मृदा प्रयोगशाला स्थापित की गई है. हर जिले में मिट्टी जांच केंद्र स्थापित हैं, जहां किसान अपनी मिट्टी की जांच करवा सकते हैं. वहीं मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड दिया जाता है, जिसमें मिट्टी से जुड़ी सभी जानकारी होती है. 

कृषि से लाभ पाने के लिए पंजीकरण जरूरी

छठवें चरण में कृषि विभाग के सलाहकार दिनेश पाल ने फार्मर आईडी के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि अब उन्हीं किसानों को प्रधानमंत्री सम्मान निधि की राशि मिलेगी, जिनका फार्मर आईडी बना हुआ है. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि कृषि विभाग से जुड़ी किसी भी योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को पंजीकरण कराना होगा.

सातवें चरण में मैजिशियन सलमान ने अपनी कला के जरिए खेती से जुड़ी जानकारी दी. साथ ही उन्होंने किसानों को गोबर खाद और पशुपालन करने का सुझाव दिया. अंत में आठवें चरण में लकी ड्रॉ कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें 10 विजेताओं को 500 रुपये और दूसरा पुरस्कार 2000 रुपये राजरानी को मिला. वहीं, प्रथम पुरस्कार किसान राधेश्याम को 3000 रुपये दिए गए.

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