खरीफ सम्मेलन 2026 में जुटी 'टीम एग्रीकल्चर', खेती को लेकर कृषि मंत्री शिवराज ने बताया प्लान

खरीफ सम्मेलन 2026 में जुटी 'टीम एग्रीकल्चर', खेती को लेकर कृषि मंत्री शिवराज ने बताया प्लान

खरीफ सीजन 2026 की तैयारियों को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा कृषि मंथन शुरू किया है. नई दिल्ली में आयोजित खरीफ सम्मेलन में राज्यों, वैज्ञानिकों और कृषि विशेषज्ञों के साथ मिलकर नई रणनीति तैयार की जा रही है. केंद्रीय कृषि मंत्री शि‍वराज सिंह चौहान ने खेती को लेकर प्‍लान भी बताया कि किन फसलों पर ज्‍यादा फोकस रहेगा.

Kharif Sammelan 2026Kharif Sammelan 2026
क‍िसान तक
  • Noida,
  • May 28, 2026,
  • Updated May 28, 2026, 2:06 PM IST

केंद्र सरकार ने खरीफ सीजन 2026 की तैयारियों को लेकर अपनी रणनीति तेज कर दी है. नई दिल्ली स्थित पूसा परिसर में आयोजित खरीफ सम्मेलन-2026 से पहले केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पत्रकार वार्ता को संबोधित किया. उन्होंने कहा कि देश की खाद्य सुरक्षा मजबूत करना, किसानों की आय बढ़ाना और लोगों तक पोषणयुक्त आहार पहुंचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है. उन्होंने बताया कि 28 और 29 मई को नई दिल्ली के पूसा स्थित नॉस्क कॉम्प्लेक्स में राष्ट्रीय खरीफ अभियान-2026 के तहत दो दिवसीय कृषि सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है. इसमें देशभर के कृषि मंत्री, वैज्ञानिक, वरिष्ठ अधिकारी, आईसीएआर और राज्यों के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं.

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि खरीफ सम्मेलन में पूरी ‘टीम एग्रीकल्चर’ एक साथ जुटी है. इसमें केंद्र और राज्य सरकारों के साथ वैज्ञानिक, एफपीओ प्रतिनिधि और खेती-किसानी से जुड़े विशेषज्ञ भी शामिल हैं. उन्होंने कहा कि कृषि राज्यों का विषय है और बेहतर परिणाम तभी मिलेंगे जब केंद्र और राज्य मिलकर काम करेंगे. सम्मेलन में खरीफ और रबी फसलों की तैयारी, बीजों की उपलब्धता, कृषि मिशनों की पहुंच और किसानों को नई तकनीक उपलब्ध कराने जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी.

क्षेत्रीय जरूरतों के हिसाब से बनेगी कृषि रणनीति

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों में खेती और जलवायु की परिस्थितियां अलग हैं. इसी वजह से अब कृषि रणनीति को भी क्षेत्रीय जरूरतों के हिसाब से तैयार किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि जयपुर, लखनऊ और भुवनेश्वर में क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन आयोजित किए जा चुके हैं. इसके अलावा उत्तर-पूर्व और दक्षिण भारत में भी जल्द सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे.

उन्होंने कहा कि छोटे समूहों में राज्यों के साथ चर्चा करने से स्थानीय समस्याओं और जरूरतों को बेहतर तरीके से समझा जा सकता है. भविष्य में एग्रो-क्लाइमेटिक जोन के आधार पर भी सम्मेलन आयोजित करने की योजना है. इससे खेती से जुड़ी योजनाओं को जमीन तक ज्यादा प्रभावी तरीके से पहुंचाने में मदद मिलेगी. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सम्मेलन से पहले राज्यों के साथ वर्चुअल बैठकें भी आयोजित की गई थीं और उसी आधार पर आगे की रणनीति तैयार की जा रही है.

खाद्यान्न उत्पादन में बना नया रिकॉर्ड

केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि किसानों की मेहनत, वैज्ञानिकों के अनुसंधान और केंद्र सरकार की योजनाओं के कारण इस बार देश ने खाद्यान्न उत्पादन के पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. उन्होंने बताया कि वर्ष 2025-26 में देश का अनुमानित कुल खाद्यान्न उत्पादन 3,765.63 लाख टन तक पहुंच गया है. यह पिछले साल की तुलना में करीब 188 लाख टन ज्यादा है.

उन्होंने कहा कि चावल उत्पादन में भारत ने नया कीर्तिमान बनाया है. देश में चावल का उत्पादन 1,540.24 लाख टन तक पहुंच गया है और भारत दुनिया में पहले स्थान पर पहुंच गया है. उनके अनुसार भारत ने इस मामले में चीन को भी पीछे छोड़ दिया है. वहीं गेहूं उत्पादन 1,206.57 लाख टन और मक्का उत्पादन 550.92 लाख टन दर्ज किया गया है, जो रिकॉर्ड स्तर माना जा रहा है.

दलहन और तिलहन पर रहेगा सरकार का फोकस

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि दलहन और तिलहन में आत्मनिर्भरता हासिल करना सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है. इसके लिए अलग-अलग मिशन तैयार किए गए हैं. राज्यों के साथ मिलकर बेहतर बीज, सीड रिप्लेसमेंट रेट बढ़ाने, डेमोंस्ट्रेशन और प्रोसेसिंग व्यवस्था को मजबूत करने पर काम किया जाएगा.

उन्होंने बताया कि इस साल तिलहन उत्पादन का अनुमान 430.59 लाख टन है. मूंगफली उत्पादन 130.74 लाख टन और रेपसीड-सरसों उत्पादन 137.68 लाख टन तक पहुंचने का अनुमान है. दलहन उत्पादन में भी लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है. सरकार का लक्ष्य आयात पर निर्भरता कम करना और घरेलू उत्पादन को मजबूत बनाना है.

क्लाइमेट चेंज और डिजिटल खेती पर विशेष चर्चा

केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन खेती के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है. बदलते मौसम, अनियमित बारिश और बढ़ती गर्मी का असर खेती पर साफ दिखाई दे रहा है. उन्होंने कहा कि सम्मेलन में प्राकृतिक खेती, सॉइल हेल्थ कार्ड और उर्वरकों के संतुलित उपयोग जैसे विषयों पर विशेष फोकस रहेगा.

उन्होंने कहा कि कई किसान जानकारी के अभाव में जरूरत से ज्यादा उर्वरकों का इस्तेमाल कर लेते हैं, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित होती है. ऐसे में संतुलित उपयोग को बढ़ावा देना जरूरी है. इसके अलावा डिजिटल कृषि, फार्मर आईडी, एग्री इंफ्रा फंड और एफपीओ को मजबूत बनाने जैसे विषयों पर भी चर्चा की जाएगी.

छोटे किसानों की आय बढ़ाने पर जोर

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि देश में अधिकांश किसानों के पास छोटी जोत है. ऐसे में कम जमीन में ज्यादा लाभ देने वाले इंटीग्रेटेड फार्मिंग मॉडल पर विशेष जोर दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि किसानों को केवल फसल उत्पादन ही नहीं, पोस्ट हार्वेस्ट मैनेजमेंट और जोखिम से सुरक्षा की भी जरूरत है.

उन्होंने माना कि कृषि ऋण वितरण में राज्यों के बीच असमानता बनी हुई है. कुछ राज्यों में किसानों को पर्याप्त ऋण नहीं मिल पाता है. ऐसे में केसीसी और अन्य योजनाओं के जरिए किसानों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने पर भी चर्चा होगी. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि खरीफ सम्मेलन के दौरान राज्यों के साथ मिलकर संयुक्त कृषि रोडमैप तैयार किया जाएगा, ताकि आने वाले समय में खेती को ज्यादा लाभकारी और टिकाऊ बनाया जा सके.

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