
खाद्य तेलों में आत्मनिर्भरता की दिशा में शुरू किया गया नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल्स - ऑयल पाम (NMEO-OP) देश की सबसे महत्वाकांक्षी कृषि पहलों में शामिल है. इस मिशन को जमीन पर उतारने में तेलंगाना ने अन्य राज्यों की तुलना में तेज और ठोस बढ़त बनाई है. राज्य में अब तक एक लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में ऑयल पाम का रोपण हो चुका है. NMEO-OP के औपचारिक शुभारंभ से पहले ही टीजी ऑयल फेड, गोदरेज एग्रोवेट और पतंजलि फूड्स जैसी एजेंसियों ने लगभग 18,747 हेक्टेयर क्षेत्र विकसित कर शुरुआती आधार तैयार कर दिया था. फिलहाल 31 जिलों में 14 एजेंसियां सक्रिय हैं और टीजी ऑयल फेड द्वारा 120 टन प्रति घंटा एफएफबी क्रशिंग क्षमता की दो प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित की जा चुकी हैं.
‘बिजनेसलाइन’ में पबलिश्ड आर्टिकल में नसीम अली (गोदरेज एग्रोवेट लिमिटेड में पूर्व सीईओ– ऑयल पाम प्लांटेशन और वर्तमान में कोलकाता में पाम ऑयल उत्पादन और प्लांटेशन विकास के सलाहकार) ने कहा कि तेलंगाना ने बीते तेल वर्ष में 20 प्रतिशत से अधिक ऑयल एक्सट्रैक्शन रेशियो दर्ज कर देश में सर्वोच्च स्थान हासिल किया है. कुल रोपित क्षेत्र का 56 प्रतिशत से अधिक हिस्सा टीजी ऑयल फेड के अंतर्गत होना, राज्य की प्रशासनिक प्रतिबद्धता और शुरुआती जोखिम उठाने की क्षमता को दर्शाता है.
हालांकि, शुरुआती वर्षों में तेज विस्तार के बाद, हाल के समय में रोपण की रफ्तार कुछ धीमी पड़ी है. इसके पीछे केवल कीमतें नहीं, बल्कि ऑयल पाम जैसे दीर्घकालिक फसल मॉडल से जुड़ी स्थिरता, नीति निरंतरता और भरोसे की भूमिका अहम रही है. किसान अभी भी धान जैसी फसलों को कम जोखिम और त्वरित आय के कारण प्राथमिकता देते हैं.
इसके बावजूद, जहां भरोसेमंद व्यवस्था बनी है, वहां ऑयल पाम ने ठोस नतीजे दिए हैं. नलगोंडा के ए. रामचंद्र रेड्डी और जंगांव के पी. अनंत राव जैसे किसान तीन साल बाद ही प्रति हेक्टेयर 8 टन से अधिक एफएफबी उत्पादन कर रहे हैं. इससे उन्हें सालाना करीब एक लाख रुपये प्रति हेक्टेयर की शुद्ध आय मिल रही है, जो आगे और बढ़ने की संभावना रखती है.
इस मिशन को लागू करने वाली एजेंसियों ने नर्सरी, मानव संसाधन और प्रोसेसिंग में दीर्घकालिक निवेश किया है, हालांकि सभी की प्रगति समान नहीं रही है. लक्ष्य संशोधन, सिंचाई की स्थिति और जमीनी हकीकत ने भी रफ्तार को प्रभावित किया है. तेलंगाना सरकार द्वारा हाल में की गई समीक्षा और पुनर्गठन की पहल को सुधारात्मक प्रयास के रूप में देखा गया है, लेकिन ऑयल पाम जैसी लंबी अवधि की फसल के लिए स्थिरता और पूर्वानुमेयता सबसे बड़ा भरोसा होती है.
भुगतान में देरी, माइक्रो इरिगेशन से जुड़ी अड़चनें और संस्थागत तालमेल की कमी जैसी चुनौतियां समन्वय की मांग करती हैं. यह समय टकराव का नहीं, बल्कि समझदारी भरे सुधार और पहले से बने आधार को मजबूत करने का है. अगर नीति में स्थिरता और संवाद बना रहता है तो तेलंगाना न केवल अपनी बढ़त को संभाल सकता है, बल्कि NMEO-OP के तहत देश के लिए एक प्रभावी मॉडल भी बन सकता है.