
उत्तर प्रदेश सरकार और इंडिया टुडे ग्रुप ‘किसान तक’ की संयुक्त पहल के तहत 75 जिलों में चल रहे विशेष अभियान ‘किसान कारवां’ का 38वां पड़ाव आजमगढ़ जिले के ठेकमा ब्लॉक के जीवली गांव में आयोजित किया गया. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया और आधुनिक खेती से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल की. इस दौरान कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों को केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न कृषि योजनाओं की जानकारी दी और उन्हें इन योजनाओं का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया. अधिकारियों ने बताया कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने और खेती को लाभकारी बनाने के लिए कई योजनाएं चला रही है.
वहीं, कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को आधुनिक खेती की तकनीकों, उन्नत बीजों के उपयोग, फसल प्रबंधन और आय बढ़ाने के विभिन्न उपायों के बारे में विस्तार से बताया. वैज्ञानिकों ने कहा कि नई तकनीकों को अपनाकर किसान कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं. कार्यक्रम के दौरान किसानों ने अपनी खेती से जुड़ी समस्याएं भी विशेषज्ञों के सामने रखीं, जिनका समाधान मौके पर ही दिया गया. इस कार्यक्रम से किसानों में नई तकनीकों को अपनाने के प्रति उत्साह देखने को मिला.
कार्यक्रम के पहले चरण में आजमगढ़ के उप कृषि निदेशक डॉ. आशीष कुमार ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि जिले के अधिकांश किसानों को योजना का लाभ मिल रहा है, लेकिन कई किसानों की किस्त केवाईसी न होने या पति-पत्नी दोनों के नाम से आवेदन होने के कारण रुकी हुई है. उन्होंने किसानों से जल्द से जल्द केवाईसी अपडेट कराने की अपील की.
दूसरे चरण में कृषि विज्ञान केंद्र के उद्यान वैज्ञानिक डॉ. विजय कुमार विमल ने आम की फसल में लगने वाले कीट और रोगों से बचाव के उपाय बताए. उन्होंने बताया कि इस समय आम में बौर के बाद फल लगने की अवस्था में कीटों का प्रकोप बढ़ जाता है, जिससे फल गिरने की समस्या होती है. इससे बचाव के लिए 4 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में नीम का तेल मिलाकर छिड़काव करना चाहिए. उन्होंने बताया कि उद्यान विभाग द्वारा किसानों को नीम तेल मुफ्त में उपलब्ध कराया जा रहा है.
तीसरे चरण में कृषि विज्ञान केंद्र आजमगढ़ के मृदा वैज्ञानिक डॉ. रणधीर नायक ने मृदा स्वास्थ्य के महत्व पर जोर दिया. उन्होंने बताया कि मृदा को 16 पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है, लेकिन किसान अक्सर केवल पांच तत्वों पर ही ध्यान देते हैं. विशेष रूप से बोरान और सल्फर की कमी से उत्पादन और फलों की गुणवत्ता प्रभावित होती है.
चौथे चरण में कृषि विज्ञान केंद्र आजमगढ़ के अध्यक्ष एवं प्रभारी डॉ. अखिलेश यादव ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए कृषि के साथ पशुपालन और मत्स्य पालन को भी अपनाना जरूरी है. उन्होंने कृषि विविधीकरण और लेयर फार्मिंग जैसे विकल्पों पर भी विस्तार से जानकारी दी.
पांचवें चरण में इफको के ड्रोन पायलट दुष्यंत कुमार सिंह ने नैनो यूरिया और लिक्विड डीएपी के उपयोग के फायदे बताए. उन्होंने कहा कि इनके प्रयोग से मृदा स्वास्थ्य बेहतर रहता है और कम लागत में अच्छी पैदावार प्राप्त की जा सकती है.
छठे चरण में पशुपालन विभाग के चिकित्सक डॉ. सुरेश चंद्र ने नंद बाबा योजना के तहत नंदिनी योजना की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत पशुपालन के लिए किसानों को 11 लाख 80 हजार रुपये तक का अनुदान तीन किस्तों में दिया जाता है. इसके लिए किसान के पास कम से कम एक हेक्टेयर भूमि होना आवश्यक है.
सातवें चरण में सहायक विकास अधिकारी (कृषि रक्षा) कपिल राजभर ने फसल सुरक्षा से जुड़ी सरकारी योजनाओं की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि जैविक तरीके से कीट नियंत्रण के लिए सोलर लाइट ट्रैप सहित कई उपकरणों पर सरकार अनुदान दे रही है.
आठवें चरण में जादूगर सलमान ने रोचक अंदाज में किसानों को पशुपालन के महत्व के बारे में जागरूक किया. उन्होंने बताया कि पशुपालन से मिलने वाले गोबर और गोमूत्र का उपयोग खेती में करने से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और उत्पादन में भी सुधार होता है.
नौवें चरण में सम्मान समारोह आयोजित किया गया, जिसमें गांव के प्रधान विनीत राय ने गांव की महिलाओं और प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया.
कार्यक्रम के अंतिम चरण में किसानों के बीच प्रतियोगिता कराई गई, जिसमें 10 किसानों को 500-500 रुपये के पुरस्कार दिए गए. प्रतियोगिता में महिला किसान आशा देवी ने पहला और किसान दशरथ ने दूसरा स्थान प्राप्त किया. किसान कारवां के इस कार्यक्रम से किसानों में आधुनिक तकनीकों को अपनाने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने के प्रति जागरूकता बढ़ी.
1. किसान कारवां क्या है?
किसानों से सीधे जुड़ने वाला किसान तक का विशेष कृषि अभियान.
2. किसान कारवां का उद्देश्य क्या है?
किसानों की समस्याएं, समाधान और नई जानकारी सामने लाना.
3. किसान कारवां किन जगहों पर हो रहा है?
उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में.
4. किसान कारवां किन किसानों के लिए है?
छोटे, सीमांत, युवा, महिला और प्रगतिशील किसान-सभी के लिए.
5. किसान कारवां में क्या-क्या जानकारी मिलेगी?
खेती, लागत घटाने के तरीके, तकनीक और योजनाओं की जानकारी.
6. क्या किसान अपनी समस्या सीधे बता सकते हैं?
हां, किसान अपनी बात सीधे मंच पर रख सकते हैं.
7. क्या इसमें भाग लेने के लिए शुल्क है?
नहीं, किसानों के लिए यह पूरी तरह निःशुल्क है.
8. किसान कारवां की जानकारी कहां मिलेगी?
किसान तक के सोशल मीडिया हैंडल और यूट्यूब चैनल https://www.youtube.com/@kisantakofficial पर