ओडिशा में भूली-बिसरी फसलों और खाद्यान्नों को मिलेगा नया जीवन, 247 करोड़ की योजना शुरू

ओडिशा में भूली-बिसरी फसलों और खाद्यान्नों को मिलेगा नया जीवन, 247 करोड़ की योजना शुरू

ओडिशा सरकार ने पारंपरिक फसलों और भूले-बिसरे खाद्यान्नों को फिर से बढ़ावा देने के लिए 247.024 करोड़ रुपये की योजना शुरू की है. यह पहल 15 जिलों के 25 जैव-विविधता क्षेत्रों में लागू होगी, जिससे देशी बीजों का संरक्षण और किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद है.

Odisha Agri Dept Signs MoA with WassanOdisha Agri Dept Signs MoA with Wassan
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Mar 20, 2026,
  • Updated Mar 20, 2026, 1:44 PM IST

ओडिशा सरकार ने पारंपरिक कृषि और स्थानीय खाद्य विरासत को फिर से मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. राज्य के कृषि और किसान सशक्तिकरण विभाग ने गैर-लाभकारी संस्था WASSAN के साथ समझौता कर ऐसी फसलों और खाद्य पदार्थों को पुनर्जीवित करने की पहल शुरू की है, जो समय के साथ खेती से लगभग गायब हो चुके हैं. सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत करीब 247.024 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. 

अगले पांच साल तक लागू रहेगा प्रोग्राम

यह कार्यक्रम अगले पांच वर्षों, यानी 2025-26 से 2029-30 तक लागू रहेगा. इसका मुख्य फोकस पारंपरिक फसलों और देशी बीजों के संरक्षण, संवर्धन और व्यावसायिक उपयोग को बढ़ावा देना है, जिससे किसानों की आय के नए रास्ते खुल सकें. यह पहल राज्य के 15 जिलों के 25 जैव-विविधता समृद्ध ब्लॉकों में लागू की जाएगी. 

इनमें गांधमर्दन, नियमगिरि, सुनाबेड़ा, सतकोसिया, गुप्तेश्वर, मलयागिरि और सिमलीपाल जैसे क्षेत्र शामिल हैं, जहां अब भी पारंपरिक कृषि की झलक देखने को मिलती है. इन क्षेत्रों को इसलिए चुना गया है, क्योंकि यहां की जैव विविधता और पारंपरिक ज्ञान अभी भी संरक्षित है.

डिप्‍टी सीएम ने दी यह जानकारी

राज्य के उप मुख्यमंत्री और कृषि विभाग के प्रभारी केवी सिंह देव ने इस पहल को सांस्कृतिक संरक्षण से जोड़ते हुए कहा कि भोजन केवल पोषण का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी परंपरा और पहचान का हिस्सा है. ऐसे में इन फसलों को बचाना हमारी सांस्कृतिक धरोहर को बचाने जैसा है. उन्होंने बताया कि इस परियोजना के तहत फसलों के संरक्षण के साथ-साथ उनका दस्तावेजीकरण और बाजार से जोड़ने पर भी जोर दिया जाएगा.

योजना के तहत पारंपरिक बीजों का उत्पादन बढ़ाने, किसान फील्ड स्कूल स्थापित करने, पोषण विश्लेषण करने और वैल्यू एडिशन के जरिए इन फसलों को बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाने की रणनीति अपनाई जाएगी. साथ ही ‘कमला पुजारी फेलोशिप’ जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से स्थानीय ज्ञान और नवाचार को भी बढ़ावा दिया जाएगा.

आकाशीय बिजली गिरने से 600 लोगों की मौत

उधर, गुरुवार को राजस्व और आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने विधानसभा में जानकारी दी कि राज्‍य में पिछले दो वित्तीय वर्षों के दौरान आकाशीय बिजली, डूबने और सांप के काटने जैसी घटनाओं में कुल 6,578 लोगों की मौत हुई है. आंकड़ों के अनुसार 2023-24 में 3,439 और 2024-25 में 3,139 लोगों की जान गई.

इनमें सबसे अधिक 3,860 मौतें डूबने से, 2,118 सांप के काटने से और 600 मौतें आकाशीय बिजली गिरने से हुईं. सरकार इन घटनाओं को राज्य-विशिष्ट आपदा मानते हुए मृतकों के परिजनों को SDRF से 4 लाख रुपये की सहायता देती है और दो वर्षों में कुल 263.12 करोड़ रुपये का मुआवजा वितरित किया गया है. (पीटीआई)

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