किसानों के लिए कर्जमाफी पर विचार नहीं: निर्मला सीतारमण, KCC और सस्ती लोन योजना पर जोर

किसानों के लिए कर्जमाफी पर विचार नहीं: निर्मला सीतारमण, KCC और सस्ती लोन योजना पर जोर

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि किसानों के लिए कर्ज माफी पर कोई प्रस्ताव नहीं है. सरकार KCC, सस्ती ब्याज दरों पर लोन, PM-KISAN और फसल बीमा जैसी योजनाओं से किसानों को आर्थिक मजबूती दे रही है.

Nirmala Sitaraman underlined that India has a clear path on getting trade deals done with various countriesNirmala Sitaraman underlined that India has a clear path on getting trade deals done with various countries
क‍िसान तक
  • New Delhi ,
  • Mar 23, 2026,
  • Updated Mar 23, 2026, 5:26 PM IST

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को संसद को बताया कि केंद्र सरकार के पास किसानों के लिए पूरी तरह से कर्ज माफी का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है. हालांकि, उन्होंने कहा कि सरकार ने किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं, जिनमें किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के माध्यम से समय पर और पर्याप्त लोन उपलब्ध कराना शामिल है. इसके तहत, संशोधित ब्याज सहायता योजना (MISS) के तहत 3 लाख रुपये तक का फसल लोन रियायती ब्याज दरों पर दिया जाता है, और समय पर उसे लौटाने पर अतिरिक्त इंसेंटिव भी मिलते हैं.

बिना किसी गारंटी के कृषि लोन

इसके अलावा, सरकार ने बिना किसी गारंटी (collateral-free) वाले कम अवधि वाले कृषि लोन की सीमा—जिसमें कृषि से जुड़े अन्य काम के लिए लोन भी शामिल हैं—को 1.60 लाख रुपये से बढ़ाकर 2.00 लाख रुपये कर दिया है. लोकसभा में दिए गए एक जवाब में उन्होंने कहा कि सरकार यह भी सुनिश्चित कर रही है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी 'प्राथमिकता क्षेत्र ऋण' (Priority Sector Lending) दिशानिर्देशों के तहत, बैंकिंग प्रणाली से अर्थव्यवस्था के प्राथमिकता वाले क्षेत्रों—जिनमें कृषि भी शामिल है—को पर्याप्त लोन मिलता रहे.

इसके अलावा, सरकार ने फसल बीमा योजना शुरू की है और 'प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि' (PM-KISAN) के माध्यम से जमीन-धारक किसानों के खातों में सीधे नकद राशि ट्रांसफर करने की व्यवस्था भी की है.

पेंशन पर दी अहम जानकारी

एक अन्य प्रश्न का उत्तर देते हुए सीतारमण ने कहा कि सशस्त्र बलों के उन सदस्यों को मिलने वाली विकलांगता पेंशन पर दी जाने वाली छूट—जो सैन्य सेवा के कारण हुई किसी विकलांगता की वजह से या सैन्य सेवा के दौरान उस विकलांगता के और बढ़ जाने के कारण सेवा से मुक्त (invalided out) कर दिए जाते हैं—का प्रावधान 'आयकर अधिनियम, 1922' के तहत बने ढांचे के समय से ही मौजूद है. यह प्रावधान 21 मार्च, 1922 को जारी अधिसूचना संख्या 878-F (आयकर) के माध्यम से लागू किया गया था.

उन्होंने कहा कि जब 'आयकर अधिनियम, 1961' लागू हुआ, तब भी यह छूट निरसन और बचत प्रावधानों (repeal and savings provisions) के माध्यम से जारी रही. मंत्री ने कहा, "जब 'आयकर अधिनियम, 2025' लागू हुआ, तो 'आयकर अधिनियम, 1922' से संबंधित पहले के कानून और उससे जुड़े बचत प्रावधान निष्प्रभावी हो गए. इसलिए, नए अधिनियम में किसी स्पष्ट प्रावधान के अभाव में, यह छूट समाप्त हो गई होती."

उन्होंने बताया कि वर्तमान प्रावधान को इसलिए शामिल किया गया है ताकि पहले से चली आ रही उसी छूट को—जिसमें उसका दायरा और शर्तें भी शामिल हैं—आगे भी जारी रखा जा सके.(PTI)

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