
महाराष्ट्र के बीड जिले के अरवी गांव की रहने वाली राजश्री आसाराम परदेशी के लिए सिलाई मशीन सिर्फ कमाई का जरिया नहीं है, बल्कि उस मदद की याद भी है जिसने मुश्किल वक्त में उनके परिवार को संभाला. करीब 10 साल पहले संकट में घिरे परिवार को नाना पाटेकर की नाम फाउंडेशन से एक सिलाई मशीन मिली थी. इसी मशीन की मदद से राजश्री ने अपने पैरों पर खड़े होकर घर की जिम्मेदारी संभाली.
राजश्री बीड जिले की शिरूर कासार तहसील के अरवी गांव की रहने वाली हैं. उनके पति निर्माण कार्य से जुड़े थे, लेकिन काम के दौरान गिरने से गंभीर रूप से घायल हो गए. इसके बाद वह बिस्तर पर आ गए और परिवार की पूरी जिम्मेदारी राजश्री के कंधों पर आ गई.
परिवार की आर्थिक स्थिति खराब होने पर करीब 10 साल पहले नाम फाउंडेशन ने राजश्री को सिलाई मशीन उपलब्ध कराई. इसके बाद उन्होंने साड़ियों की हेमिंग और ब्लाउज सिलने का काम शुरू किया.
राजश्री के मुताबिक वह इस काम से रोजाना करीब 400 से 500 रुपये कमा लेती हैं. उनकी मासिक आमदनी करीब 10 हजार रुपये तक पहुंच जाती है. उनका कहना है कि मुश्किल समय में मिली सिलाई मशीन ने न केवल उन्हें रोजगार दिया, बल्कि अपने परिवार को सम्मान के साथ चलाने का रास्ता भी दिखाया.
नाना पाटेकर और मराठी अभिनेता मकरंद अनासपुरे ने 2015 में सूखे से जूझ रहे मराठवाड़ा के लोगों की मदद के लिए बड़े स्तर पर काम शुरू किया था. उस दौरान बीड समेत मराठवाड़ा के कई इलाकों में गंभीर कृषि संकट था और किसान परिवारों को कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा था.
दोनों कलाकारों ने प्रभावित किसान परिवारों की मदद को केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं रखा. परिवारों को अपनी आय का साधन मिल सके, इसके लिए महिलाओं को सिलाई मशीन, आटा चक्की और पशुधन जैसी मदद भी उपलब्ध कराई गई. बाद में नाम फाउंडेशन के जरिए ग्रामीण आजीविका और जल संरक्षण के काम भी आगे बढ़ाए गए.
नाम फाउंडेशन ने बीड जिले में पानी की समस्या को देखते हुए जल संरक्षण के कई काम किए. संस्था के जिला समन्वयक शिवराम घोड़के के मुताबिक बीड तहसील के पिंपलनेर क्षेत्र में रिद्धि सिद्धि नदी के करीब 34 किलोमीटर हिस्से में गाद निकालने और नदी को चौड़ा करने का काम किया गया.
इसके बाद राज्य सरकार ने नदी पर चार छोटे चेक डैम बनाए. इससे आसपास के 14 गांवों के लोगों को फायदा मिला और किसानों को अलग-अलग सीजन में फसल उगाने के लिए पानी उपलब्ध कराने में मदद मिली.
इसके अलावा जिले में नालों, छोटी नदियों और जलाशयों से गाद निकालने के लिए अर्थमूवर मशीनों का इस्तेमाल किया गया.
नाम फाउंडेशन के जिला समन्वयक शिवराम घोड़के का कहना है कि संस्था की ओर से किए गए नदी गहरीकरण और जल संरक्षण के काम से जिले में करीब 10 हजार हेक्टेयर जमीन सिंचाई के दायरे में आई. इससे लगभग एक लाख किसानों को फायदा पहुंचने का दावा किया गया है.
आज भी बीड और मराठवाड़ा के ग्रामीण इलाकों में ऐसे कई परिवार हैं, जिनके लिए नाम फाउंडेशन से मिली मदद केवल राहत नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर बनने का माध्यम बनी. राजश्री की सिलाई मशीन भी उसी कहानी का एक उदाहरण है.
नाना पाटेकर हमेशा आत्महत्या करने वाले किसानों के परिवारों और उनके भविष्य को लेकर चिंतित रहते थे. 2016-17 में, उन्होंने मराठवाड़ा इलाके में आत्महत्या करने वाले किसानों की पत्नियों को 'आरोग्य कार्ड' देने का विचार रखा."
नाम फाउंडेशन के ज़रिए लगभग 500 महिलाओं को ये कार्ड बांटे गए, जिससे उन्हें कई तरह की बीमारियों के लिए मुफ्त इलाज की सुविधा मिली.
इसके बाद MGM अस्पताल ने लगभग पांच साल तक उन महिलाओं को मुफ्त इलाज दिया.
यह पहल यहीं खत्म नहीं हुई. MGM यूनिवर्सिटी ने एक कदम और आगे बढ़कर आत्महत्या करने वाले किसानों के परिवारों के छात्रों को मुफ्त शिक्षा भी दी."(PTI)