Haryana Sugarcane Price: 600 रुपये प्रति क्विंटल SAP की मांग को लेकर आंदोलन, गन्ना किसानों ने बुलाई पंचायत

Haryana Sugarcane Price: 600 रुपये प्रति क्विंटल SAP की मांग को लेकर आंदोलन, गन्ना किसानों ने बुलाई पंचायत

हरियाणा के गन्ना किसान स्टेट एडवाइज्ड प्राइस (SAP) को 415 रुपये से बढ़ाकर 600 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग को लेकर आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं. BKU (चढ़ूनी) और गन्ना किसान संघर्ष समिति ने 3 सितंबर को रादौर और 7 सितंबर को नारायणगढ़ शुगर मिल में किसान पंचायत बुलाने का ऐलान किया है. किसानों का कहना है कि बढ़ती लागत, भुगतान में देरी और घटते रकबे के कारण गन्ने का भाव बढ़ाना जरूरी है.

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600 रुपये प्रति क्विंटल SAP की मांग को लेकर आंदोलन, गन्ना किसानों ने बुलाई पंचायतहरियाणा में गन्ने के रेट को लेकर आंदोलन की तैयारी

हरियाणा में गन्ने के 'स्टेट एडवाइज़्ड प्राइस' (SAP) को बढ़ाकर कम से कम 600 रुपये प्रति क्विंटल करने की अपनी मांग को मनवाने के लिए गन्ना किसान एक आंदोलन शुरू करने की तैयारी कर रहे हैं.

भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) और गन्ना किसान संघर्ष समिति के बैनर तले किसानों ने गन्ने की कीमत, शेड्यूल और पेमेंट से जुड़े मुद्दों को उठाने के लिए 3 सितंबर को यमुनानगर के रादौर में और फिर 7 सितंबर को नारायणगढ़ शुगर मिल में पंचायत करने का फैसला किया है. 'दि ट्रिब्यून' ने एक रिपोर्ट में जानकारी दी.

नेताओं ने समर्थन जुटाने और किसानों को बड़ी संख्या में दोनों पंचायतों में पहुंचने के लिए आमंत्रित करने के लिए बैठकें शुरू कर दी हैं.

600 रुपये SAP करने की मांग

गन्ना किसान नेताओं का मानना ​​है कि मौजूदा हालात में शुगर मिलों को पेराई के लिए पर्याप्त स्टॉक मिलने की संभावना कम है, क्योंकि किसान बेहतर कीमत पाने के लिए अपनी उपज चीनी मिलों को भेजेंगे. उन्होंने कहा कि राज्य में SAP को मौजूदा 415 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 600 रुपये प्रति क्विंटल किया जाना चाहिए.

गन्ना किसान और BKU (चढ़ूनी) अंबाला के प्रवक्ता राजीव शर्मा ने कहा, "एक तरफ जहां उत्पादन लागत बढ़ रही है और चीनी की कीमतें भी बढ़ी हैं, वहीं गन्ना किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है. बढ़ते खर्चों और शुगर मिलों के पेमेंट में देरी के कारण किसान दूसरी फसलों की ओर रुख करने लगे हैं, जिससे गन्ने की खेती के रकबे में कमी देखी जा रही है." 

“पिछले साल मिल मालिकों ने 470 रुपये प्रति क्विंटल का दाम दिया था, जिसकी वजह से बड़ी संख्या में किसानों ने अपना गन्ना शुगर मिलों के बजाय क्रशर मालिकों को बेचा. इस साल हमें उम्मीद है कि मिल मालिक पिछले साल से ज्यादा दाम देंगे और किसान फिर से अपनी उपज मिलों को ही बेचना पसंद करेंगे. सरकार को गन्ने का दाम बढ़ाकर 600 रुपये प्रति क्विंटल कर देना चाहिए ताकि शुगर मिलों को पर्याप्त मात्रा में गन्ना मिलता रहे. अगर मांगें पूरी नहीं हुईं, तो किसान आंदोलन करने को मजबूर होंगे,” उन्होंने कहा.

गन्ना किसान संघर्ष समिति की मांग

गन्ना किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष विनोद राणा ने कहा, “हमें पता चला है कि चीनी की कीमतें बढ़ने के बाद, कुछ दूसरे राज्यों में मिल मालिक गन्ने के लिए 500 से 550 रुपये प्रति क्विंटल का दाम दे रहे हैं. हमें उम्मीद है कि हरियाणा में भी मिल मालिक इस साल 500 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक दाम देंगे. एक सर्वे के मुताबिक, नारायणगढ़ शुगर मिल के इलाके में पिछले साल करीब 24,000 एकड़ में गन्ने की खेती हुई थी, जबकि इस साल यह रकबा घटकर करीब 22,000 एकड़ रह गया है. शुगर मिलों के पास पेराई के लिए पर्याप्त गन्ना न होने से न सिर्फ चीनी के उत्पादन पर असर पड़ेगा, बल्कि आने वाले सालों में किसानों पर भी बुरा असर पड़ेगा.”

“नारायणगढ़ शुगर मिल द्वारा भुगतान में देरी भी एक बड़ी चिंता का विषय रही है. यूनियनों ने किसानों की चिंताओं को मजबूती से उठाने के लिए किसान पंचायतें करने का फैसला किया है. सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि शुगर मिलों में पेराई का सीजन शुरू होने में कोई देरी न हो और उन्हें पर्याप्त मात्रा में गन्ना मिले. हम गन्ने से जुड़े मुद्दों पर हरियाणा के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा से मिलने की कोशिश करेंगे और उनसे किसानों के हितों की रक्षा करने का अनुरोध करेंगे,” उन्होंने कहा.

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