
Milky Mist Dairy Food का IPO इन दिनों चर्चा में है. 11 अगस्त से शुरू हुआ कंपनी का ₹1,553 करोड़ का IPO आज यानी 13 अगस्त को बंद हो रहा है. इसमें ₹1,428 करोड़ का फ्रेश इश्यू और ₹125 करोड़ का ऑफर फॉर सेल शामिल है. IPO से मिलने वाले पैसे का इस्तेमाल कंपनी अपने कारोबार के विस्तार, Perundurai प्लांट के विस्तार और कुछ कर्ज चुकाने में करेगी. लेकिन शेयर बाजार के इस IPO की एक और कहानी है, जो सीधे किसानों से जुड़ती है. सवाल है कि अगर Milky Mist का कारोबार बढ़ता है और उसे ज्यादा दूध की जरूरत पड़ती है, तो क्या इसका फायदा दूध बेचने वाले किसानों को भी मिलेगा?
सबसे पहले Milky Mist के कारोबार को समझना जरूरी है. कंपनी Amul या Mother Dairy की तरह बड़े पैमाने पर रोजाना पैकेट वाला दूध बेचने पर निर्भर नहीं है. इसका मुख्य फोकस वैल्यू एडेड डेयरी प्रोडक्ट्स पर है. यानी दूध को सीधे बेचने के बजाय उससे पनीर, चीज, दही, योगर्ट, आइसक्रीम, मक्खन, घी और दूसरे प्रोडक्ट बनाकर बेचे जाते हैं.
यही मॉडल कंपनी के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि एक लीटर दूध से सिर्फ दूध बेचने की तुलना में पनीर, चीज या दूसरे प्रोडक्ट बनाकर ज्यादा वैल्यू पैदा की जा सकती है. FY26 में Milky Mist ने करीब 39.62 करोड़ लीटर दूध खरीदा. कंपनी के साथ करीब 74,654 किसान जुड़े हुए थे और कुल दूध खरीद का लगभग 74.3% हिस्सा सीधे किसानों से आया था.
अब किसान के लिए सबसे जरूरी बात यहां से शुरू होती है. IPO से मिलने वाले ₹1,428 करोड़ के फ्रेश इश्यू का एक बड़ा हिस्सा कंपनी के Perundurai मैन्युफैक्चरिंग प्लांट के विस्तार और आधुनिकीकरण में लगाया जाना है. इसके अलावा कंपनी अपने कूलिंग और वितरण नेटवर्क को भी मजबूत करने की योजना बना रही है. अगर कंपनी की उत्पादन क्षमता बढ़ती है और पनीर, चीज, योगर्ट, आइसक्रीम जैसे प्रोडक्ट की बिक्री बढ़ती है, तो जाहिर है कि उसे ज्यादा कच्चे दूध की जरूरत होगी. ऐसे में कंपनी को नए किसानों से जुड़ना पड़ सकता है और मौजूदा किसानों से भी ज्यादा दूध खरीदना पड़ सकता है. यानी IPO का पैसा सीधे किसान के बैंक खाते में नहीं जाएगा, लेकिन कंपनी के विस्तार से किसानों के लिए दूध बेचने का बाजार जरूर बड़ा हो सकता है.
किसानों के लिए सिर्फ दूध का उत्पादन बढ़ाना काफी नहीं है. असली चुनौती यह है कि दूध को नियमित रूप से कहां और किस कीमत पर बेचा जाए. अगर किसी इलाके में दूध खरीदने वाली कंपनियों की संख्या बढ़ती है तो किसानों के पास अपना दूध बेचने के ज्यादा विकल्प हो सकते हैं. Milky Mist का मॉडल इस मामले में दिलचस्प है. कंपनी ने 25 जिलों में किसानों से सीधे दूध खरीदने के लिए हजारों ऑटोमेटेड मिल्क कलेक्शन यूनिट और चिलिंग सेंटर बनाए हैं. FY26 में कंपनी ने किसानों से सीधे 29.448 करोड़ लीटर से ज्यादा दूध खरीदा.
इस तरह कंपनी का विस्तार सिर्फ उसके लिए नहीं, बल्कि उन इलाकों के डेयरी किसानों के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है जहां वह अपना milk procurement network बढ़ाएगी.
यहां थोड़ा सावधान रहने की जरूरत है. कंपनी का IPO आने का मतलब यह नहीं है कि किसानों को तुरंत दूध का भाव बढ़ जाएगा. दूध की कीमत कई चीजों पर निर्भर करती है. इसमें दूध की उपलब्धता, फैट और SNF की मात्रा, चारे की लागत, मौसम, स्थानीय बाजार और कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा जैसी चीजें शामिल हैं. केंद्र सरकार भी स्पष्ट कर चुकी है कि दूध की खरीद कीमतें डेयरी सहकारी समितियां और निजी डेयरियां बाजार की स्थिति और उत्पादन लागत के आधार पर तय करती हैं.
इसलिए किसान के लिए असली फायदा तभी होगा जब कंपनी का विस्तार दूध की खरीद बढ़ाने के साथ किसानों को प्रतिस्पर्धी कीमत, नियमित खरीद और समय पर भुगतान भी दे.
यही इस कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा है. Milky Mist के सामने बाजार में पहले से ही Amul और Mother Dairy जैसी मजबूत कंपनियां हैं. लेकिन यहां सीधी लड़ाई सिर्फ दूध के पैकेट की नहीं है. Milky Mist का फोकस पनीर, चीज, योगर्ट, दही और दूसरे वैल्यू एडेड प्रोडक्ट पर ज्यादा है. कंपनी FY26 में पैकेज्ड पनीर बाजार में करीब 19% हिस्सेदारी के साथ सबसे बड़ी निजी पैकेज्ड पनीर ब्रांड होने का दावा करती है. साथ ही कंपनी की करीब 69% आय दक्षिण भारत से आती है, यानी अभी भी उसका मजबूत आधार इसी क्षेत्र में है.
दूसरी तरफ Amul का नेटवर्क बहुत बड़ा और मजबूत है. Amul का फायदा सिर्फ ब्रांड नाम नहीं, बल्कि उसके पीछे मौजूद डेयरी सहकारी ढांचा है, जो बड़ी संख्या में दूध उत्पादकों को बाजार से जोड़ता है. सरकार के मुताबिक डेयरी सहकारी समितियां किसानों को स्थिर और लाभकारी खरीद व्यवस्था देने की दिशा में काम करती हैं.
Mother Dairy भी छोटा खिलाड़ी नहीं है. कंपनी करीब 1 लाख किसानों से 16 राज्यों में 23 milk producer organisations के जरिए दूध लेती है. FY26 में कंपनी का कारोबार करीब ₹20,300 करोड़ रहा और उसने FY27 के लिए ₹24,000 करोड़ के टर्नओवर का लक्ष्य रखा है. यानी जिस समय Milky Mist राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार की तैयारी कर रही है, उसी समय बड़े खिलाड़ी भी अपनी स्थिति मजबूत कर रहे हैं.
इसका मतलब यह नहीं है कि Amul या Mother Dairy Milky Mist को बाजार में "टिकने नहीं देंगी". असल में मुकाबला ब्रांड, कीमत, क्वालिटी, वितरण और नए प्रोडक्ट के स्तर पर होगा. Milky Mist की खासियत यह है कि वह सीधे तरल दूध के बड़े बाजार में पूरी ताकत से उतरने के बजाय ज्यादा मार्जिन वाले प्रोडक्ट पर जोर दे रही है. इसलिए उसके पास बड़े खिलाड़ियों से मुकाबला करने के लिए एक अलग रणनीति है.
Milky Mist की सबसे बड़ी ताकत उसका दक्षिण भारत में मजबूत आधार है, लेकिन यही आगे चलकर चुनौती भी बन सकता है. FY26 में कंपनी की करीब 69.2% आय दक्षिण भारत से आई. कंपनी अब देश के दूसरे हिस्सों में भी पहुंच बढ़ा रही है. उसके उत्पाद मार्च 2026 तक 22 राज्यों और 5 केंद्र शासित प्रदेशों में उपलब्ध थे.
दक्षिण भारत के बाहर जाते समय कंपनी को स्थानीय ब्रांडों और सहकारी डेयरियों से मुकाबला करना होगा. खासकर उत्तर भारत में Amul, Mother Dairy और कई क्षेत्रीय डेयरियों की पहले से मजबूत पकड़ है. इसलिए सिर्फ पैसा लगाकर प्लांट बढ़ा देना काफी नहीं होगा. कंपनी को किसानों से दूध खरीदने का नेटवर्क भी उसी तेजी से बनाना होगा, जिस तेजी से वह बाजार में अपने प्रोडक्ट पहुंचाना चाहती है.
अगर Milky Mist देश के नए राज्यों में प्लांट और procurement network बढ़ाती है तो सबसे बड़ा बदलाव दूध की स्थानीय मांग में आ सकता है. उदाहरण के लिए, अगर किसी क्षेत्र में कंपनी नया चिलिंग सेंटर बनाती है और आसपास के किसानों से नियमित दूध खरीदना शुरू करती है तो किसान को दूर बाजार तक दूध ले जाने की जरूरत कम हो सकती है.
इसके साथ ही कंपनी और दूसरी डेयरियों के बीच दूध खरीदने को लेकर प्रतिस्पर्धा बढ़ती है तो किसानों की bargaining power भी कुछ हद तक मजबूत हो सकती है. हालांकि यह तभी होगा जब बाजार में पर्याप्त खरीदार मौजूद हों और किसान केवल एक कंपनी पर निर्भर न हो जाए.
यानी किसानों के लिए अच्छी स्थिति वह होगी जहां Milky Mist, Amul, Mother Dairy और दूसरी डेयरियां एक-दूसरे से मुकाबला करें और किसान के पास दूध बेचने के कई विकल्प हों.
Milky Mist IPO को सिर्फ शेयर बाजार की नजर से देखना इस कहानी का आधा हिस्सा होगा. दूसरी तरफ यह एक ऐसी डेयरी कंपनी के विस्तार की कहानी है, जिसका कारोबार सीधे किसानों से खरीदे गए दूध पर निर्भर करता है. कंपनी के पास अभी 74,654 किसानों का नेटवर्क है और FY26 में उसने करीब 39.62 करोड़ लीटर दूध खरीदा. अगर IPO के बाद उत्पादन और बिक्री तेजी से बढ़ती है तो दूध की मांग भी बढ़ने की संभावना है.
लेकिन किसान के लिए असली सवाल यह नहीं होना चाहिए कि "Milky Mist का IPO सफल हुआ या नहीं?" असली सवाल यह है कि "कंपनी के बढ़ने के साथ किसान से कितना ज्यादा दूध खरीदा जाएगा, किस कीमत पर खरीदा जाएगा और क्या किसान को समय पर भुगतान मिलेगा?"
अगर इन तीनों सवालों का जवाब किसानों के पक्ष में जाता है, तभी Milky Mist का विस्तार किसानों की आय के लिए भी अच्छी खबर माना जाएगा.
कुल मिलाकर Milky Mist IPO से किसानों को सीधा आर्थिक फायदा नहीं मिलने वाला है, लेकिन इसके जरिए कंपनी का विस्तार अगर सफल रहता है तो अप्रत्यक्ष फायदा जरूर हो सकता है. ज्यादा प्लांट, ज्यादा प्रोडक्शन और ज्यादा बिक्री का मतलब ज्यादा दूध की जरूरत हो सकती है. इससे कंपनी का farmer network बढ़ सकता है और मौजूदा किसानों से खरीद भी बढ़ सकती है.
लेकिन इस पूरी कहानी की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कंपनी किसानों के साथ कितनी मजबूत और पारदर्शी procurement व्यवस्था बनाती है. वहीं Amul और Mother Dairy जैसी कंपनियों के मजबूत नेटवर्क के बीच Milky Mist को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी जगह बनाने के लिए सिर्फ पैसा नहीं, बल्कि किसान, प्रोडक्ट और बाजार- तीनों मोर्चों पर मजबूत रणनीति बनानी होगी.
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