मिठाई से लेकर नमक तक में गड़बड़ी! FSSAI ने इन दो कंपनियों पर लगाया जुर्माना

मिठाई से लेकर नमक तक में गड़बड़ी! FSSAI ने इन दो कंपनियों पर लगाया जुर्माना

खाने वाली चीजों की क्वालिटी को लेकर FSSAI ने सख्त कार्रवाई की है. जांच में कर्नाटक के मोतीचूर लड्डू में तय सीमा से ज्यादा फूड कलर और गुजरात के आयोडीनयुक्त नमक में नियमों के विपरीत गलतियां मिलीं. इसके बाद दोनों कंपनियों पर खाद्य सुरक्षा कानून के तहत जुर्माना लगाया गया.

मिठाई से लेकर नमक तक में गड़बड़ीमिठाई से लेकर नमक तक में गड़बड़ी
संदीप कुमार
  • Noida,
  • Aug 13, 2026,
  • Updated Aug 13, 2026, 1:31 PM IST

खाने-पीने की चीजें खरीदते समय पैकेट पर लिखी जानकारी और क्वालिटी पर भरोसा करना आम बात है, लेकिन भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने ग्राहकों के इन्हीं भरोसे का पर्दाफाश किया है. दरअसल, FSSAI की जांच में दो कंपनियों के उत्पादों को लेकर सवाल खड़े हुए हैं. जांच में कर्नाटक की Dharwad Mishra Pedha and Food Processing Industry और गुजरात के कच्छ की Shree Chemfood Pvt. Ltd. के उत्पाद तय खाद्य क्वालिटी मानकों पर खरे नहीं पाए गए. इनमें एक उत्पाद की क्वालिटी मानक से कम मिली, जबकि एक मामले में पैकेट पर दी गई लेबलिंग भी भ्रामक पाई गई. इसके बाद FSSAI ने खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 के तहत दोनों कंपनियों पर जुर्माना लगाया है.

मोतीचूर लड्डू में तय सीमा से ज्यादा मिला रंग

कर्नाटक की Dharwad Mishra Pedha and Food Processing Industry के खिलाफ कार्रवाई मोतीचूर लड्डू को लेकर की गई. जांच में कंपनी के बनाए और सप्लाई किए गए लड्डू की क्वालिटी तय मानकों से कम पाई गई. FSSAI के मुताबिक, ‘मोतीचूर लड्डू’ का सैंपल जांच के लिए भेजा गया था. लैब जांच में इसमें Tartrazine नाम का फूड कलर 267.05 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम पाया गया, जबकि इसकी तय सीमा सिर्फ 100 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम है. यानी लड्डू में इस रंग की मात्रा तय सीमा से काफी ज्यादा थी. इसी वजह से FSSAI ने लड्डू के सैंपल को तय क्वालिटी मानकों से कम माना है.

क्या होता है Tartrazine?

Tartrazine एक तरह का आर्टिफिशियल फूड कलर है, जिसका इस्तेमाल खाने-पीने की चीजों को पीला या नारंगी रंग देने के लिए किया जाता है. खाने वाली चीजों में इसका इस्तेमाल सरकार द्वारा तय मात्रा और नियमों के अनुसार ही किया जा सकता है. अगर किसी उत्पाद में इसकी मात्रा तय सीमा से ज्यादा मिलती है, तो इसे खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन माना जाता है.

आयोडीन वाली नमक में भी मिली गड़बड़ी

दूसरी कार्रवाई गुजरात के कच्छ स्थित Shree Chemfood Pvt. Ltd. के खिलाफ हुई. कंपनी की ओर से बनाए और बेचे जा रहे आयोडीनयुक्त नमक के सैंपल में कई कमियां सामने आईं. FSSAI की जांच में नमक का सैंपल क्वालिटी के तय मानकों पर खरा नहीं उतरा. इसे मानक से कम क्वालिटी वाला पाया गया. साथ ही, पैकेट पर दी गई जानकारी में भी गड़बड़ी मिलने के कारण इसे भ्रामक लेबलिंग वाला माना गया. जांच में कंपनी पर खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 की कई धाराओं के उल्लंघन का मामला भी पाया गया.

नमक में किन चीजों की मिली कमी?

सैंपलिंग और लैब टेस्ट के दौरान जब्त किए गए आयोडीन नमक और उसके नमूनों में कई क्वालिटी संबंधी कमियां मिलीं.

  • नमक में आयोडीन की मात्रा पर्याप्त नहीं थी.
  • सोडियम क्लोराइड का स्तर तय मानकों के अनुरूप नहीं पाया गया.
  • नमक में अघुलनशील पदार्थ की समस्या भी मिली.
  • इसके अलावा उत्पाद की लेबलिंग में भी नियमों का उल्लंघन पाया गया, जिसके कारण इसे भ्रामक जानकारी वाला घोषित किया गया.

FSSAI ने क्यों की कार्रवाई?

खाने-पीने की चीजों की क्वालिटी और सुरक्षा जांचने के लिए FSSAI और राज्य की खाद्य सुरक्षा टीमें समय-समय पर बाजार से सैंपल लेती हैं. इन सैंपल की लैब में जांच की जाती है।.अगर किसी उत्पाद में क्वालिटी, लेबल या सुरक्षा से जुड़े नियमों का उल्लंघन मिलता है, तो संबंधित कंपनी या कारोबारी के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जाती है. इन दोनों मामलों में भी जांच के दौरान नियमों का उल्लंघन पाया गया. इसके बाद संबंधित कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए कानून के तहत जुर्माना लगाया गया.

ग्राहकों के लिए क्या है संदेश?

यह कार्रवाई बताती है कि बाजार में बिकने वाली खाने-पीने की चीजों की क्वालिटी की जांच कितनी जरूरी है. खासकर मिठाई, नमक और पैकेज्ड या खुले खाने वाली चीजें खरीदते समय ग्राहकों को लेबल, पैकिंग, बनाने की तारीख, FSSAI लाइसेंस नंबर और दूसरी जरूरी जानकारी जरूर जांचनी चाहिए.

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