
कानपुर के जाजमऊ इलाके में एक बहुत बड़ा कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) बना है. यह प्लांट लगभग 28 एकड़ जमीन में फैला हुआ है. इसका काम बहुत महत्वपूर्ण है. यहां रोजाना करीब 20 मिलियन लीटर फैक्ट्रियों और टेनरियों से आने वाला गंदा और केमिकल वाला पानी साफ किया जाता है. यह पानी पहले सीधे नदियों में चला जाता था, जिससे बहुत ज्यादा प्रदूषण होता था. लेकिन अब इस प्लांट की वजह से पानी को पहले साफ किया जाता है और फिर आगे भेजा जाता है.
इस प्लांट में पानी को साफ करने का काम तीन अलग-अलग स्टेज में किया जाता है. पहले स्टेज में पानी से बड़े और ठोस कचरे को अलग किया जाता है. फिर दूसरे स्टेज में केमिकल और गंदगी को धीरे-धीरे हटाया जाता है.
तीसरे स्टेज में पानी को पूरी तरह साफ करने के लिए उसमें ऑक्सीजन मिलाई जाती है. यह काम ब्लोअर रूम से किया जाता है, जहां पाइप के जरिए पानी में हवा और ऑक्सीजन पहुंचाई जाती है. इससे पानी में मौजूद गंदगी और हानिकारक चीजें कम हो जाती हैं और पानी साफ होने लगता है.
जब पानी पूरी तरह साफ हो जाता है, तो उसे सीधे Ganga River में नहीं छोड़ा जाता. अब इस साफ पानी को एक 16 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन में भेजा जाता है.
इस पाइपलाइन का इस्तेमाल किसान अपने खेतों की सिंचाई (इरिगेशन) के लिए करते हैं. यानी जो पानी पहले नदी को गंदा करता था, वही अब खेतों को हरा-भरा बनाने में काम आ रहा है.
सरकार ने नियम बनाया है कि हर लेदर फैक्ट्री के अंदर ही एक छोटा ट्रीटमेंट सिस्टम होना चाहिए. इससे फैक्ट्री में ही खतरनाक केमिकल और ठोस कचरा अलग कर दिया जाता है.
ठोस कचरे को डंपिंग साइट पर फेंका जाता है और बचा हुआ पानी सीईटीपी प्लांट में भेज दिया जाता है. इससे गंगा नदी में गंदा पानी जाने की संभावना बहुत कम हो गई है.
केंद्र सरकार के नमामि गंगे कार्यक्रम की वजह से गंगा नदी में जाने वाले औद्योगिक प्रदूषण में बड़ी कमी आई है. 2017 की तुलना में अब करीब 60 प्रतिशत कम प्रदूषण गंगा में जा रहा है.
पहले जहां बहुत ज्यादा गंदा पानी नदी में जाता था, अब उसे साफ करके ही आगे भेजा जाता है. इससे नदी की स्थिति पहले से बेहतर हुई है.
Kanpur में जल गुणवत्ता में सुधार देखा गया है. हालांकि अभी पूरी तरह से पानी इतना साफ नहीं हुआ है कि उसे पूरी तरह सुरक्षित माना जा सके, लेकिन पहले की तुलना में काफी सुधार हुआ है.
कई जगहों पर बीओडी (पानी की गंदगी का स्तर) भी कम हुआ है, जिससे पता चलता है कि पानी पहले से ज्यादा साफ हो रहा है.
मथुरा में भी एक सीईटीपी प्लांट काम कर रहा है जो रिफाइनरी और फैक्ट्रियों के पानी को साफ करता है. साफ पानी को फिर दोबारा इस्तेमाल किया जाता है, जिससे पानी की बचत होती है.
उन्नाव में भी नया प्लांट बन रहा है जो आने वाले समय में पानी को और साफ करने में मदद करेगा.
सरकार अब हर बड़ी फैक्ट्री की नियमित जांच करती है. अगर कोई फैक्ट्री नियम तोड़ती है, तो उस पर जुर्माना लगाया जाता है और जरूरत पड़ने पर उसे बंद भी किया जा सकता है. बरसात और त्योहारों के समय खास जांच भी की जाती है ताकि गंगा नदी में प्रदूषण न बढ़े.
जाजमऊ का यह सीईटीपी प्लांट दिखाता है कि अगर सही तकनीक और नियमों का पालन किया जाए तो बड़ी नदियों को बचाया जा सकता है. अब गंदा पानी सीधे नदियों में जाने के बजाय साफ होकर खेतों तक पहुंच रहा है. यह कदम न सिर्फ पर्यावरण के लिए अच्छा है बल्कि किसानों के लिए भी फायदेमंद है.
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