
झारखंड के रामगढ़ जिले से बागवानी और कृषि क्षेत्र के लिए एक अहम खबर सामने आई है, जहां स्थानीय स्तर पर बिकने वाला आम अब अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचने लगा है. जिले में उत्पादित आम्रपाली आम की पहली 4 टन यानी 4000 किलो की खेप विदेश के लिए रवाना की गई है. इस खेप को रामगढ़ के उपायुक्त ऋतुराज ने हरी झंडी दिखाकर भेजा. यह पहल जिले के किसानों के लिए नए बाजार खोलने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है.
रामगढ़ में आम उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए पिछले कुछ वर्षों में बागवानी गतिविधियों पर लगातार काम किया गया है. अब उसका असर जमीन पर दिखाई देने लगा है. स्थानीय किसानों की मेहनत और प्रशासन के सहयोग से यहां तैयार आम को विदेशी बाजार तक पहुंचाने की व्यवस्था बनाई गई है. इससे किसानों को केवल उत्पादन तक सीमित नहीं रहना पड़ेगा, बल्कि उन्हें बेहतर मार्केटिंग के मौके भी मिल सकेंगे.
रामगढ़ जिले में इस समय 250 से अधिक आम के बागान बताए जा रहे हैं और इस सीजन में 100 टन से ज्यादा उत्पादन हो रहा है. जिले के मांडू प्रखंड के मुरपा क्षेत्र में मनरेगा पार्क के तहत विकसित 16 एकड़ क्षेत्र में ही करीब 20 टन आम का उत्पादन हो रहा है. यह मॉडल इस बात का उदाहरण बन रहा है कि उपलब्ध भूमि और योजनाओं का बेहतर इस्तेमाल कर किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में काम किया जा सकता है.
रामगढ़ के इन आमों को 'आम्रपाली' ब्रांड नाम के साथ वैश्विक बाजार में उतारा जा रहा है. एक निजी कंपनी किसानों से सीधे खरीद कर निर्यात प्रक्रिया को आगे बढ़ा रही है, जिससे किसानों को सीधे बाजार से जुड़ने का मौका मिलेगा. इससे बिचौलियों की भूमिका कम होने और उत्पाद का बेहतर मूल्य मिलने की संभावना बढ़ी है.
रामगढ़ से आम की पहली निर्यात खेप केवल एक कारोबारी उपलब्धि नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और बागवानी क्षेत्र के लिए भी एक महत्वपूर्ण संकेत मानी जा रही है. अगर इसी तरह उत्पादन, ब्रांडिंग और बाजार को जोड़ने का मॉडल आगे बढ़ता है तो राज्य के अन्य जिलों के किसानों के लिए भी नए अवसर बन सकते हैं. स्थानीय स्तर की खेती को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने की यह पहल आने वाले समय में बागवानी क्षेत्र को नई दिशा दे सकती है.