E20 पेट्रोल पर सरकार का बड़ा दावा: गाड़ी की उम्र पर असर नहीं, माइलेज में केवल 3–5% कमी

E20 पेट्रोल पर सरकार का बड़ा दावा: गाड़ी की उम्र पर असर नहीं, माइलेज में केवल 3–5% कमी

संसद में इथेनॉल ब्लेंडिंग को लेकर उठे सवालों के जवाब में सरकार ने कहा है कि E20 पेट्रोल कई वैज्ञानिक परीक्षणों के बाद लागू किया गया है. सरकार के अनुसार इससे गाड़ी की उम्र पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ता, जबकि कुछ पुरानी गाड़ियों में माइलेज में 3–5 प्रतिशत तक कमी आ सकती है. सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि फिलहाल E20 से अधिक ब्लेंडिंग या डीजल में इथेनॉल मिलाने का कोई प्रस्ताव नहीं है.

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क‍िसान तक
  • New Delhi,
  • Jul 21, 2026,
  • Updated Jul 21, 2026, 5:11 PM IST

देश में इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) को लेकर संसद में उठे सवालों के जवाब में केंद्र सरकार ने कहा है कि इस कार्यक्रम को लागू करने से पहले कई वैज्ञानिक अध्ययन, परीक्षण और वैलिडेशन किए गए थे. सरकार का दावा है कि E20 ईंधन सुरक्षित है और निर्धारित मानकों के अनुसार उपयोग करने पर इससे गाड़ी की उम्र कम नहीं होती.

सांसद राजीव शुक्ला, प्रमोद तिवारी और डॉ. जॉन ब्रिटास की ओर से पूछे गए सवालों के जवाब में सरकार ने इथेनॉल ब्लेंडिंग के तकनीकी, पर्यावरणीय और आर्थिक पहलुओं पर अपना पक्ष रखा.

E20 लागू करने से पहले हुआ था परीक्षण

सरकार के अनुसार E20 पेट्रोल पर रिसर्च और वैलिडेशन का काम नीति आयोग, ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI), सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM), इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों और गाड़ी निर्माताओं ने मिलकर किया था.
सरकार ने कहा कि इन अध्ययनों के आधार पर E20 को सुरक्षित पाया गया और चरणबद्ध तरीके से देश में लागू किया गया.

माइलेज और इंजन लाइफ पर क्या असर?

सरकार के मुताबिक E20 से गाड़ी की उम्र कम होने का कोई प्रमाण नहीं मिला है. हालांकि कुछ पुरानी गाड़ियों में माइलेज पर मामूली असर देखा गया है. सरकार ने स्वीकार किया कि E20 तेल के उपयोग से कुछ पुराने वाहनों में लगभग 3 से 5 प्रतिशत तक माइलेज कम हो सकता है. वहीं, सरकार का कहना है कि वास्तविक माइलेज केवल ईंधन पर निर्भर नहीं करता, बल्कि ड्राइविंग स्टाइल, वाहन की मेंटेनेंस, टायर प्रेशर और एयर कंडीशनर के उपयोग जैसे कारक भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

सरकार का दावा है कि E20 पेट्रोल में अधिक ऑक्टेन रेटिंग होने के कारण बेहतर कंबशन होता है, जिससे इंजन की कार्यक्षमता में सुधार और प्रदूषण में कमी आती है.

E20 के बताए गए प्रमुख फायदे

सरकार ने संसद में कहा कि इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम से कई प्रत्यक्ष लाभ मिले हैं. इनमें शामिल हैं:

  • पेट्रोल में ऑक्टेन की मात्रा बढ़ना
  • ईंधन का अधिक स्वच्छ दहन
  • इंजन प्रदर्शन में सुधार
  • कार्बन उत्सर्जन में कमी
  • कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होना

सरकार के अनुसार इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम के चलते देश को विदेशी मुद्रा में 1.97 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बचत हुई है. साथ ही किसानों को 1.66 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान हुआ है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी लाभ मिला है.

क्या E20 से पानी का संकट बढ़ेगा?

सांसद प्रमोद तिवारी द्वारा उठाई गई चिंता के जवाब में सरकार ने कहा कि इथेनॉल उत्पादन के कारण देश में जल संकट बढ़ने की आशंका नहीं है. सरकार का कहना है कि इथेनॉल उत्पादन अब केवल गन्ने पर आधारित नहीं है, बल्कि अलग-अलग प्रकार के फीडस्टॉक का उपयोग किया जा रहा है. इसके अलावा मक्के की हिस्सेदारी बढ़कर लगभग 37 प्रतिशत तक पहुंच गई है.

सरकार ने यह भी कहा कि फसल विविधीकरण और जल संरक्षण वाली कृषि पद्धतियों को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि जल संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव न पड़े.

वेस्टवॉटर प्रबंधन के लिए ZLD नियम

इथेनॉल उत्पादन के दौरान निकलने वाले अपशिष्ट जल के संबंध में सरकार ने बताया कि सभी डिस्टिलरी इकाइयों के लिए Zero Liquid Discharge (ZLD) मानकों का पालन अनिवार्य है. इन नियमों के तहत वेस्टवॉटर को बिना ट्रीटमेंट के बाहर छोड़ने की अनुमति नहीं है. उद्योगों को खराब पानी का री-साइकल और दोबारा उपयोग करना होता है.

गाड़ी खराब होने की शिकायतें मिलीं या नहीं?

सांसद डॉ. जॉन ब्रिटास ने सरकार से पूछा था कि क्या E20 पेट्रोल के कारण इंजन फेल होने, फ्यूल पंप खराब होने, जंग लगने, ईंधन दक्षता घटने या अन्य तकनीकी समस्याओं की शिकायतें मिली हैं. इसके जवाब में सरकार ने कहा कि वाहन निर्माताओं, ऑटोमोबाइल संगठनों या उपभोक्ता समूहों की ओर से E20 के कारण वाहन क्षति की कोई बड़ी या पुष्ट शिकायत दर्ज नहीं हुई है.

सरकार ने यह भी बताया कि पिछले तीन साल में ऐसी शिकायतों का वर्षवार और राज्यवार आंकड़ा शून्य है.

पानी की मिलावट पर कोई विशेष एडवाइजरी नहीं

संसद में सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल में पानी की मिलावट को लेकर वाहन चालकों के लिए कोई विशेष एडवाइजरी जारी नहीं की है.

किस आधार पर कहा गया कि कोई बड़ी समस्या नहीं हुई?

सरकार के मुताबिक उसका निष्कर्ष कई स्रोतों पर आधारित है. इनमें वैज्ञानिक अध्ययन, ARAI और SIAM की टेस्टिंग रिपोर्ट, वाहन निर्माताओं का डेटा, 25 वर्षों से अधिक का अनुभव, देश में 20 करोड़ से अधिक दोपहिया वाहनों और लगभग 3 करोड़ पेट्रोल कारों का वास्तविक उपयोग अनुभव शामिल है.

इसके अतिरिक्त ऑयल मार्केटिंग कंपनियों द्वारा 30,000 से अधिक बार ईंधन की क्वालिटी की जांच भी इस निष्कर्ष का आधार बताई गई है.

फिलहाल E20 से आगे बढ़ने की योजना नहीं

सरकार ने संसद में स्पष्ट किया कि वर्तमान में इथेनॉल ब्लेंडिंग को 20 प्रतिशत से अधिक बढ़ाने या डीजल में इथेनॉल ब्लेंडिंग शुरू करने को लेकर कोई निर्णय नहीं लिया गया है. ऐसे किसी प्रस्ताव पर फिलहाल विचार नहीं किया जा रहा है.

संसद में दिए गए जवाबों से केंद्र सरकार का रुख स्पष्ट है कि E20 पेट्रोल को व्यापक परीक्षणों के बाद लागू किया गया है और इसे वाहन और पर्यावरण के नजरिये से सुरक्षित माना जा रहा है. सरकार माइलेज में सीमित कमी की संभावना मानती है, लेकिन इंजन लाइफ या बड़े पैमाने पर तकनीकी नुकसान के दावों को उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर खारिज करती है. साथ ही, फिलहाल E20 से आगे की ब्लेंडिंग या डीजल में इथेनॉल ब्लेंडिंग की कोई योजना नहीं है.

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