
जम्मू-कश्मीर के बारामूला जिले के उरी क्षेत्र में किसानों की आय बढ़ाने और औषधीय व सुगंधित पौधों की खेती को प्रोत्साहन देने के लिए कृषि विभाग ने दो नई लैवेंडर नर्सरियां स्थापित की हैं. ये नर्सरियां सीमावर्ती त्रिकंजन बोनियार और सुल्तानदाखी क्षेत्र में विकसित की गई हैं. सरकार का उद्देश्य किसानों को पारंपरिक खेती के साथ अधिक लाभ देने वाली फसलों की ओर आकर्षित करना है. करीब 40 कनाल क्षेत्र में विकसित त्रिकंजन बोनियार नर्सरी में आधुनिक लैवेंडर ऑयल निष्कर्षण और प्रसंस्करण इकाई भी स्थापित की गई है. इस इकाई के जरिए उच्च गुणवत्ता वाले लैवेंडर एसेंशियल ऑयल और इत्र तैयार किए जाएंगे. इससे स्थानीय स्तर पर मूल्य संवर्धन होगा और किसानों को बेहतर आर्थिक लाभ मिलने की संभावना बढ़ेगी.
करीब 10 कनाल में विकसित सुल्तानदाखी नर्सरी का मुख्य उद्देश्य किसानों को गुणवत्तापूर्ण लैवेंडर पौध उपलब्ध कराना है. यहां तैयार किए गए पौधों का वितरण स्थानीय किसानों के बीच किया जाएगा, ताकि क्षेत्र में लैवेंडर की खेती का विस्तार हो सके और अधिक किसान इससे जुड़ सकें.
त्रिकंजन फार्म में लैवेंडर के अलावा रोजमेरी, कूठ, बर्गेनिया सिलियाटा, आर्टेमिसिया एनुआ और बछ जैसी कई उच्च मूल्य वाली औषधीय और सुगंधित प्रजातियों की भी खेती की जा रही है. इससे किसानों के लिए फसल विविधीकरण के नए अवसर तैयार होंगे और आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित किए जा सकेंगे.
कृषि विशेषज्ञ शरण गुरदेव सिंह ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य किसानों को औषधीय और सुगंधित पौधों की व्यावसायिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित करना है. विभाग इच्छुक किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन, गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री और खेती से जुड़ा निरंतर सहयोग उपलब्ध करा रहा है.
त्रिकंजन बोनियार के फार्म प्रबंधक फैयाज अहमद मीर ने कहा कि नई नर्सरियों और प्रसंस्करण सुविधा की स्थापना उरी को औषधीय एवं सुगंधित पौधों के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. उनके अनुसार लैवेंडर भविष्य में क्षेत्र की प्रमुख नकदी फसल बनकर स्थानीय कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत कर सकता है.
नर्सरियों में कार्यरत कर्मचारियों ने बताया कि पौधों की अच्छी वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए नियमित सफाई और रखरखाव किया जाता है. उन्होंने कहा कि सप्ताह में कम से कम तीन बार पौधों की देखभाल और आवश्यक रखरखाव का कार्य किया जाता है. इससे पौधों की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद मिलती है. (पीटीआई)