
मिडिल ईस्ट में भड़की जंग ने एक बार फिर वैश्विक व्यापार की धड़कनें बढ़ा दी हैं. ईरान और इजरायल के बीच फिर शुरू हुए युद्ध, साथ ही ईरान के अलग-अलग देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमलों के बाद अंतरराष्ट्रीय हवाई मार्गों पर बड़ा असर पड़ा है. कई अहम हवाई मार्ग बाधित या सीमित हो गए हैं, जिससे मिडिल ईस्ट में और इस रास्ते से रास्ते होने वाला व्यापार सीधे संकट में आ गया है. इस अशांति की आंच भारत पर भी पड़ने की आशंका है. खासकर कृषि और खाद्य उत्पादों के निर्यात में, जो समय और लॉजिस्टिक्स पर सबसे ज्यादा निर्भर रहते हैं. यह क्षेत्र अब गंभीर जोखिम में है. अगर हालात लंबे खिंचे तो इसका सीधा नुकसान भारतीय किसानों और निर्यातकों को उठाना पड़ सकता है.
बता दें कि भारत और ईरान के रिश्ते लंबे समय से रणनीतिक और आर्थिक रूप से मजबूत रहे हैं. ऊर्जा, इंफ्रास्ट्रक्चर और कृषि जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों का सहयोग दशकों पुराना है. हालांकि, बीते कुछ वर्षों में अमेरिकी प्रतिबंधों ने इस रिश्ते की आर्थिक धार को कुंद कर दिया है. इसका सीधा-सीधा असर भारत-ईरान के व्यापार के सरकारी आंकड़ों में दिखता है.
भारतीय दूतावास, तेहरान की वेबसाइट पर उपलब्ध वाणिज्य विभाग के डेटा के अनुसार, 2018-19 में भारत और ईरान के बीच कुल द्विपक्षीय व्यापार लगभग 17 अरब अमेरिकी डॉलर के आसपास था. यह वह दौर था जब भारत ईरान से कच्चा तेल बड़े पैमाने पर आयात करता था. लेकिन 2019-20 के बाद तस्वीर तेजी से बदली.
अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते तेल आयात लगभग बंद हो गया और बैंकिंग चैनल भी सीमित होते चले गए. नतीजा यह हुआ कि 2019-20 में कुल व्यापार तेज गिरावट के साथ 5 अरब डॉलर से नीचे आ गया. इसके बाद 2020-21 और 2021-22 में व्यापार और सिमटकर करीब 2 अरब डॉलर के आसपास रह गया.
हाल के वर्षों में मामूली उतार-चढ़ाव के बावजूद 2024-25 तक कुल व्यापार 2 अरब डॉलर से भी नीचे बना हुआ है. यानी छह-सात साल में भारत-ईरान व्यापार अपने शिखर से करीब 85-90 प्रतिशत तक घट चुका है.
जब ईरान से तेल का व्यापार रुका, तब भारत-ईरान रिश्तों को जीवित रखने में कृषि और खाद्य उत्पादों ने अहम भूमिका निभाई. मौजूदा व्यापार ढांचे में कृषि आयात-निर्यात की हिस्सेदारी काफी अहम है. ईरान से भारत का कृषि आयात मुख्य रूप से उच्च मूल्य वाले उत्पादों पर केंद्रित है. इसमें पिस्ता, खजूर, सेब, कीवी और अन्य कुछ उत्पाद शामिल हैं.
दूसरी ओर, भारत से ईरान को होने वाला कृषि निर्यात अपेक्षाकृत ज्यादा स्थिर रहा है. डीजीसीआईएस की वेबसाइट पर उपलब्ध डेटा के मुताबिक, पिछले वित्त वर्ष में भारत ने ईरान को हजारों करोड़ रुपये मूल्य के कृषि और खाद्य उत्पाद भेजे. इसमें सबसे बड़ा हिस्सा बासमती चावल का रहा. इसके अलावा चाय, मसाले, दालें, ताजे फल, पशु आहार, चीनी और कुछ प्रोसेस्ड फूड उत्पाद भी भारत के प्रमुख निर्यात में शामिल रहे.
अब मौजूदा युद्ध ने एक नई चुनौती खड़ी कर दी है. हवाई मार्गों के बंद और सीमित होने से खासकर उन कृषि उत्पादों पर असर पड़ने की आशंका है, जो एयर कार्गो के जरिए भेजे जाते हैं. ताजा सब्जियों, फलों और कुछ प्रोसेस्ड फूड की शिपमेंट में देरी का खतरा बढ़ गया है. अगर इनका निर्यात रुकता है तो उत्पादों के खराब होने से किसानों और निर्यातकों को काफी नुकसान झेलना पड़ सकता है.