Farmers News: कस्टम हायरिंग सेंटर्स को MPLADS से नहीं मिलेगा फंड, कृषि मंत्री चौहान ने दिया ये तर्क

Farmers News: कस्टम हायरिंग सेंटर्स को MPLADS से नहीं मिलेगा फंड, कृषि मंत्री चौहान ने दिया ये तर्क

कस्टम हायरिंग सेंटर को MPLADS फंड से बाहर रखने पर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट तर्क दिया है. सरकार ने बताया कि ऐसे सेंटर संचालन आधारित मॉडल हैं, जिन्हें अलग योजनाओं से ही समर्थन मिलेगा.

Shivraj On Custom Hiring Centre FundingShivraj On Custom Hiring Centre Funding
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Apr 11, 2026,
  • Updated Apr 11, 2026, 5:34 PM IST

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बदलते मौसम और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों कस्‍टम हायरिंग सेंटर की फंडिंग सहित कई विषयों पर बयान दिया है. उन्‍होंने कहा कि आज के समय में खेती को सुरक्षित और टिकाऊ बनाना सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है. अनियमित बारिश, वेस्टर्न डिस्टर्बेंस और तापमान में लगातार उतार-चढ़ाव से खेती पर सीधा असर पड़ रहा है, इसलिए अब कृषि नीतियों को पूरी तरह क्लाइमेट-रेजिलिएंट बनाना जरूरी हो गया है.

कृषि मंत्री ने बताया कि देश के वैज्ञानिक संस्थान ऐसी फसल किस्मों पर तेजी से काम कर रहे हैं, जो बदलते मौसम के अनुकूल हों.  उन्होंने कहा कि ऐसी वैरायटी विकसित की जा रही हैं जो अधिक गर्मी, ज्यादा वर्षा और कम पानी जैसी परिस्थितियों में भी बेहतर उत्पादन दे सकें. इन नई किस्मों को तेजी से किसानों तक पहुंचाने के लिए केंद्र और राज्य स्तर पर समन्वित प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि किसानों को समय रहते वैज्ञानिक समाधान मिल सके.

कस्टम हायरिंग सेंटर से छोटे किसानों को राहत

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सरकार का फोकस केवल व्यक्तिगत सब्सिडी तक सीमित नहीं है, बल्कि साझा इस्‍तेमाल के मॉडल को बढ़ावा दिया जा रहा है. उन्होंने बताया कि गांव स्तर पर कस्टम हायरिंग सेंटर और फार्म मशीनरी बैंक स्थापित किए जा रहे हैं, जहां से छोटे और सीमांत किसान किराये पर आधुनिक कृषि यंत्र ले सकेंगे. इससे महंगी मशीनों की खरीद का बोझ कम होगा और कम लागत में खेती संभव हो सकेगी.

पंचायत, एफपीओ और समूह आधारित मॉडल को बढ़ावा

मंत्री ने कहा कि पंचायतों, किसान उत्पादक संगठनों (FPO) और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से इन केंद्रों का विस्तार किया जा रहा है. उन्होंने जानकारी दी कि सब-मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन (SMAM) जैसी योजनाओं के तहत परियोजनाओं पर 40 से 80 प्रतिशत तक वित्तीय सहायता दी जा रही है. इससे करीब 30 लाख रुपये तक की परियोजनाओं को भी मजबूती मिल रही है और ग्रामीण स्तर पर मशीनरी की पहुंच बढ़ रही है.

कस्टम हायरिंग सेंटर की फंडि‍ंग पर कही ये बात

एमपी लैड्स फंड के उपयोग को लेकर उठे सवाल पर शिवराज सिंह चौहान ने साफ किया कि इस निधि का उद्देश्य स्थायी सामुदायिक परिसंपत्तियों का निर्माण है, जैसे सड़क, स्कूल या स्वास्थ्य सुविधाएं. उन्होंने कहा कि कस्टम हायरिंग सेंटर संचालन आधारित मॉडल है, इसलिए इसे MPLADS से वित्तपोषित नहीं किया जा सकता. ऐसे केंद्रों को केवल कृषि मशीनीकरण योजनाओं के माध्यम से ही समर्थन दिया जाएगा.

जनप्रतिनिधियों की अहम भूमिका

केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि सांसद और विधायक सीधे फंडिंग भले न कर सकें, लेकिन योजनाओं के क्रियान्वयन में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है. वे किसानों, पंचायतों और एफपीओ के प्रस्तावों को आगे बढ़ाने, स्वीकृति दिलाने और समस्याओं के समाधान में मदद कर सकते हैं. उनकी सक्रिय भागीदारी से योजनाओं का लाभ अंतिम किसान तक पहुंचाना आसान होता है.

प्राइवेट सेक्टर के साथ साझेदारी का दिया संकेत

प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी पर उन्होंने कहा कि कुछ राज्यों में निजी कंपनियां पहले से इस मॉडल में काम कर रही हैं और जहां मांग और नीति स्पष्ट होती है, वहां अच्छे परिणाम सामने आते हैं. सरकार पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के जरिए ऐसे केंद्रों को और मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है, ताकि किसानों को समय पर और सस्ती सेवा मिल सके.

समग्र और किसान-केन्द्रित रणनीति पर जोर

अंत में शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यह पूरी पहल किसान-केन्द्रित सोच, वैज्ञानिक सलाह और जनभागीदारी का परिणाम है. सरकार अब कृषि को एग्रो-क्लाइमेटिक दृष्टिकोण, आधुनिक तकनीक और बाजार से जोड़कर एक समग्र रोडमैप पर आगे बढ़ा रही है, जिससे उत्पादन बढ़े, लागत घटे और किसानों की आय स्थिर व सुरक्षित हो सके.

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