
इंडोनेशिया ने भारत की मूंगफली पर जो बैन लगाया था, उसे हटा लिया है. लेकिन इसके बाद भी अब भारतीय निर्यातक देश को आयात करने में इच्छुक नहीं हैं.उनका मानना है कि बैन के हटने के बाद भी आयात रिस्की है. आपको बता दें कि इंडोनेशिया ने सितंबर 2025 में भारत से मूंगफली के आयात को बैन कर दिया था.उस समय जो वजह बताई थी, वह थी मूंगफली में तय मात्रा से ज्यादा मात्रा में एफ्लैटॉक्सिन का होना जो कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी को जन्म दे सकता है.
पश्चिमी भारत के एक निर्यातक ने अखबार बिजनेसलाइन को बताया, 'इंडोनेशिया ने पिछले महीने भारतीय मूंगफली के आयात की मंजूरी दी है. लेकिन उसने बहुत सख्त तरीके अपनाए हैं जिसमें एक्सपोर्टर्स की लिस्ट को घटाकर लगभग 75 करना भी शामिल है.' इंडोनेशिया ने क्वालिटी स्टैंडर्ड्स, खासकर ज्यादा एफ्लैटॉक्सिन लेवल का पालन न करने की वजह से 2 सितंबर, 2025 से मूंगफली के एक्सपोर्ट पर रोक लगा दी. निर्यातकों ने इंडोनेशिया के मूंगफली शिपमेंट में एफ्लैटॉक्सिन होने की जानकारी देने में देरी करने के प्रोसेस पर सवाल उठाया. निर्यातकों का कहना है कि भारत से मूंगफली आयात के मामले को संभालने के इंडोनेशिया के तरीके में कुछ दिक्कतें हैं.
इंडोनेशिया की तरफ से जो आदेश आया था उसके मुताबिक देश की क्वारंटाइन अथॉरिटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि भारत से आने वाली मूंगफली में एफ्लाटॉक्सिन कर मात्रा तय स्टैंडर्ड से कहीं ज्यादा पाई गई है. एफ्लाटॉक्सिन को एक जहरीला कंपाउंड या यौगिक माना जाता है. यह ऐस्परजिलस फ्लेवस और ऐस्परजिलस पैरासिटिकस नाम फंगस से पैदा होता है. यह फंगस गर्म और नम वातावरण में मूंगफली को इनफेक्टेड कर देते हैं.
इन टॉक्सिन्स को जीनोटॉक्सिक (जीन को नुकसान पहुंचाने वाले) और कार्सिनोजेनिक (कैंसर पैदा करने वाले) बताया गया है. इनमें एफ्लाटॉक्सिन B1 को लिवर कैंसर की वजह माना गया है. व्यापारिक सूत्रों के अनुसार, टेस्टिंग लैब्स में असली समस्या है जो कुछ छोटे कमरों में बिना सही इक्विपमेंट्स के के स्थापित की गई हैं. एक सूत्र की मानें तो इंडोनेशियाई अधिकारियों ने चेन्नई की एक लैब का दौरा किया था और उसकी वर्किंग मैथेड को लेकर चिंता जताई थी.'
इंडोनेशिया एक बड़ा खरीदार है और भारत के मूंगफली एक्सपोर्ट का करीब एक-तिहाई हिस्सा खरीदता है. साल 2024 में देश ने भारत के कुल मूंगफली उत्पादन का 2.77 लाख टन खरीदा था जिसकी कीमत 280 मिलियन डॉलर थी. भारत में मूंगफली की कीमतें पहले से ही काफी कम हैं और बंपर उत्पादन किसानों के लिए एक टेंशन की वजह बन गया है. अकेले गुजरात में साल 2025 में रिकॉर्ड 6.7 लाख टन मूंगफली का उत्पादन हुआ था. राजस्थान में भी स्थिति कुछ इसी तरह की रहने का अनुमान है.
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