
भारत के चावल की मांग दुनिया के कई देशों में बढ़ रही है. इसका बड़ा उदाहरण भारत इंटरनेशनल राइस कॉन्फ्रेंस (BIRC) 2026 है. इस सम्मेलन में अब तक 138 देशों के 3,317 खरीदार रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं. इससे पता चलता है कि दूसरे देशों के लोग भारतीय चावल की अलग-अलग किस्मों में काफी रुचि दिखा रहे हैं. BIRC 2026 का आयोजन 23 से 25 अक्टूबर तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में किया जाएगा. आयोजकों के अनुसार, 30 अगस्त तक 138 देशों से 3,317 खरीदारों ने अपना रजिस्ट्रेशन कराया है. इस सम्मेलन का मुख्य मकसद भारतीय चावल के लिए नए बाजार ढूंढना और विदेशी खरीदारों को भारतीय निर्यातकों से जोड़ना है.
इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन (IREF) के उपाध्यक्ष देव गर्ग ने कहा कि इतने देशों से खरीदारों का जुड़ना भारत के लिए अच्छी बात है. अब कोशिश यह है कि इन खरीदारों को नए व्यापारिक रास्तों और लंबे समय के कारोबार से जोड़ा जाए.
BIRC 2026 में सबसे ज्यादा रजिस्ट्रेशन बांग्लादेश से 336 खरीदारों का हुआ है. इसके बाद बेनिन से 179 और नाइजीरिया से 177 खरीदार जुड़े हैं. संयुक्त अरब अमीरात से 145, जबकि नेपाल और फिलीपींस से 137-137 खरीदारों ने रजिस्ट्रेशन कराया है. इथियोपिया से 127 और सऊदी अरब से 125 खरीदार जुड़े हैं. वहीं इंडोनेशिया और दक्षिण अफ्रीका से 109-109 खरीदारों ने रजिस्ट्रेशन कराया है. इसके अलावा सेनेगल, इराक, सोमालिया, गिनी, यमन, कोटे डी आइवर, नाइजर, ऑस्ट्रेलिया, माली, मलेशिया, घाना, अंगोला और केन्या जैसे देशों से भी खरीदार सम्मेलन में शामिल होंगे.
विदेशी खरीदारों के रजिस्ट्रेशन से पता चलता है कि अफ्रीका, खाड़ी और दक्षिण-पूर्व एशिया भारतीय चावल के लिए बड़े बाजार बन सकते हैं. अफ्रीका में बेनिन, नाइजीरिया और इथियोपिया से काफी खरीदार आए हैं. दक्षिण अफ्रीका, सेनेगल, घाना, अंगोला और केन्या जैसे देशों ने भी रुचि दिखाई है. खाड़ी क्षेत्र में संयुक्त अरब अमीरात एक अहम बाजार है. वहीं दक्षिण-पूर्व एशिया में फिलीपींस, इंडोनेशिया और मलेशिया से आए खरीदार भारतीय निर्यातकों के लिए नए कारोबारी अवसर खोल सकते हैं.
BIRC 2026 का एक बड़ा लक्ष्य भारतीय चावल के लिए नए बाजार तैयार करना है. इससे भारत कुछ चुनिंदा देशों पर ज्यादा निर्भर रहने के बजाय कई देशों में चावल बेच सकेगा. इससे निर्यातकों को अपने कारोबार को बढ़ाने में मदद मिल सकती है. पिछले सम्मेलन में भी नए देशों में चावल का बाजार बढ़ाने पर काम किया गया था. उस समय करीब 1.8 लाख करोड़ रुपये के संभावित चावल आयात बाजार की पहचान की गई थी. इस बार बड़ी संख्या में विदेशी खरीदारों के आने से उस अवसर को आगे बढ़ाने की कोशिश की जाएगी.
इस सम्मेलन में कारोबार को आसान बनाने के लिए मोबाइल ऐप आधारित B2B मैचमेकिंग की सुविधा होगी. इसका मतलब है कि खरीदार और चावल बेचने वाले पहले से ही अपनी जरूरी जानकारी साझा कर सकेंगे और अपनी पसंद के लोगों से मिलने का समय तय कर सकेंगे. खरीदार चावल की किस्म, मात्रा, गुणवत्ता और अपनी जरूरत के हिसाब से भारतीय निर्यातकों, मिल मालिकों और दूसरी कंपनियों से संपर्क कर पाएंगे. इससे सम्मेलन में होने वाली मुलाकातें ज्यादा काम की और सीधे कारोबार से जुड़ी हो सकेंगी.
BIRC 2026 में दुनिया के चावल बाजार पर भी खास चर्चा होगी. एक बड़े सत्र में 2027 में चावल की मांग, उत्पादन, कीमत और व्यापार को लेकर जानकारी दी जाएगी. इस सत्र का विषय है “Global Demand & Supply Outlook 2027: Price Crash or New Bull Run?” यानी 2027 में चावल की कीमतों में बड़ी गिरावट आएगी या फिर कीमतें तेजी से बढ़ेंगी. इसमें फसल, उत्पादन, मांग, स्टॉक और बाजार से जुड़े आंकड़ों पर चर्चा होगी.
सम्मेलन में कारोबार से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर भी चर्चा होगी. इसमें फसल और कीमत का अनुमान, नए बाजार, कागजी काम, बीमा, कर्ज, जहाज से चावल भेजना, गुणवत्ता, प्रमाणपत्र, सरकारी नीतियां और व्यापार योजनाएं शामिल हैं. इसके अलावा चावल मिलिंग को ज्यादा लाभदायक बनाने और चावल से नए उत्पाद तैयार करने पर भी जानकारी दी जाएगी. इसका उद्देश्य कारोबारियों को बाजार समझने और जोखिम कम करने में मदद करना है.
BIRC 2026 में Rice Sector Vision 2047 भी लॉन्च किया जाएगा. इसके साथ चावल क्षेत्र में होने वाले नए आविष्कारों को भी दिखाया जाएगा. यहां नई तकनीक और चावल की खेती से जुड़े नए कामों की जानकारी लोगों को दी जाएगी. सम्मेलन में नौ अलग-अलग Experience Zones भी बनाए जाएंगे. इनमें चावल की शुरुआत, अलग-अलग किस्में, किसान, दुनिया के खान-पान, चावल का व्यापार, नए उत्पाद और भविष्य में आने वाले बीजों के बारे में जानकारी दी जाएगी.
BIRC का आखिरी दिन यानी 25 अक्टूबर को Rice Festival भी आयोजित किया जाएगा. इसमें चावल और उससे जुड़े उत्पादों को आम लोगों के सामने पेश किया जाएगा. कुल मिलाकर, BIRC 2026 भारत के चावल कारोबार के लिए एक बड़ा मंच बनने जा रहा है. 138 देशों के 3,317 खरीदारों का रजिस्ट्रेशन दिखाता है कि दुनिया के कई बाजार भारतीय चावल में दिलचस्पी ले रहे हैं. अब भारतीय निर्यातकों के सामने सबसे बड़ा मौका इन खरीदारों को नए कारोबार और लंबे समय के व्यापारिक रिश्तों में बदलने का है.
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