Cloud Seeding: कर्नाटक में कमजोर मॉनसून से निपटने की तैयारी, कृत्रिम बारिश के लिए दो कमेटी गठित

Cloud Seeding: कर्नाटक में कमजोर मॉनसून से निपटने की तैयारी, कृत्रिम बारिश के लिए दो कमेटी गठित

कर्नाटक में कमजोर मॉनसून और बारिश की कमी से निपटने के लिए सरकार ने क्लाउड सीडिंग कार्यक्रम की तैयारी तेज कर दी है. कृत्रिम बारिश की योजना के प्रभावी संचालन, निगरानी और तकनीकी मूल्यांकन के लिए दो अलग-अलग समितियां गठित की गई हैं.

Drought threat karnataka cloud seedingDrought threat karnataka cloud seeding
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Aug 30, 2026,
  • Updated Aug 30, 2026, 12:19 PM IST

कर्नाटक में इस साल सामान्य से कम मॉनसूनी बारिश के बीच राज्य सरकार ने क्लाउड सीडिंग प्रोग्राम को वैज्ञानिक और प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए दो अलग-अलग समितियां गठित की हैं. इन समितियों का काम कार्यक्रम की निगरानी, तकनीकी सलाह और ऑपरेशन का मूल्यांकन करना होगा. इसका लक्ष्य बारिश की कमी और सूखे जैसी परिस्थितियों से प्रभावित इलाकों में खड़ी फसलों को राहत पहुंचाना है. सरकार ने 2026-27 के दौरान बारिश की कमी से निपटने के लिए क्लाउड सीडिंग कार्यक्रम शुरू करने की योजना बनाई है. एक अधिकारी ने बताया कि आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से जहां संभव हो, वहां अतिरिक्त बारिश कराने की कोशिश की जाएगी, ताकि इसका अधिकतम फायदा खेतों में खड़ी फसलों को मिल सके. इसे लेकर 28 अगस्त को दो समितियों के गठन का आदेश जारी किया गया है.

दो समितियां करेंगी कार्यक्रम की निगरानी

क्लाउड सीडिंग अभियान के लिए मॉनिटरिंग कमेटी और तकनीकी सलाह और मूल्यांकन समिति बनाई गई है. दोनों समितियां बारिश की कमी वाले क्षेत्रों में क्लाउड सीडिंग ऑपरेशन को वैज्ञानिक तरीके से लागू कराने और इसकी प्रगति पर नजर रखने का काम करेंगी.

क्या है क्लाउड सीडिंग?

क्लाउड सीडिंग मौसम में कृत्रिम हस्तक्षेप की एक तकनीक है, जिसमें बादलों में विशेष पदार्थों का छिड़काव कर बारिश या बर्फबारी की संभावना बढ़ाने का प्रयास किया जाता है. इस तकनीक का उपयोग कुछ परिस्थितियों में ओलावृष्टि के असर को कम करने या कोहरे को हटाने के लिए भी किया जाता है.

मॉनिटरिंग कमेटी की जिम्मेदारी तय

जल संसाधन मंत्री एन. चेलुवरायस्वामी के कार्यालय की ओर से जारी बयान के मुताबिक, मॉनिटरिंग कमेटी पूरे कार्यक्रम के क्रियान्वयन की निगरानी, समीक्षा और मूल्यांकन करेगी. राज्य के अतिरिक्त मुख्य सचिव और विकास आयुक्त इस समिति के अध्यक्ष होंगे. समिति में छह सदस्य होंगे, जबकि कर्नाटक सिंचाई निगम के प्रबंध निदेशक सदस्य सचिव की भूमिका निभाएंगे.

कई विभागों के अधिकारी होंगे शामिल

इस समिति में जल संसाधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव, राजस्व विभाग के प्रधान सचिव, आपदा प्रबंधन से जुड़े अधिकारी, ग्रामीण विकास एवं पंचायत राज विभाग के सचिव और जल संसाधन विभाग के सचिव समेत अन्य अधिकारी शामिल होंगे. अलग-अलग विभागों की भागीदारी से कार्यक्रम के संचालन और प्रशासनिक समन्वय को बेहतर बनाने की कोशिश की जाएगी.

तकनीकी समिति देगी वैज्ञानिक सलाह

तकनीकी सलाह और मूल्यांकन समिति कर्नाटक राज्य प्राकृतिक आपदा निगरानी केंद्र को क्लाउड सीडिंग से जुड़े विभिन्न तकनीकी पहलुओं पर मार्गदर्शन देगी. इस समिति की अध्यक्षता केएसएनडीएमसी के निदेशक करेंगे. इसमें आठ सदस्य, एक सदस्य सचिव और एक विशेष आमंत्रित सदस्य शामिल होगा.

IMD और कृषि विभाग के विशेषज्ञ भी जुड़ेंगे

तकनीकी समिति में कृषि विभाग, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग, कर्नाटक राज्य रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर और अन्य संबंधित संस्थानों के प्रतिनिधियों और विशेषज्ञों को शामिल किया जाएगा. इनकी भूमिका क्लाउड सीडिंग अभियान की तकनीकी गुणवत्ता और इसके परिणामों के आकलन में अहम होगी.

60 दिन चलेगा 28.52 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट

अधिकारियों के मुताबिक, क्लाउड सीडिंग परियोजना पर करीब 28.52 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है. अभियान 60 दिनों तक चलाया जाएगा, जिसमें लगभग 200 घंटे का हवाई संचालन शामिल होगा. इसके लिए विमान रोजाना सुबह 8 बजे से शाम 6 बजे तक उड़ान भरेंगे.

चार राजस्व मंडलों में होगा ऑपरेशन

जल संसाधन विभाग राज्य के चारों राजस्व मंडलों में क्लाउड सीडिंग ऑपरेशन चलाएगा. अधिकारियों के अनुसार, जिन क्षेत्रों में यह प्रक्रिया अपनाई जाएगी, वहां से करीब 15 किलोमीटर के दायरे में बारिश होने की संभावना जताई गई है. हालांकि, वास्तविक परिणाम मौसम और बादलों की स्थिति पर निर्भर करेंगे. (पीटीआई)

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