
देश में दलहन और तिलहन का उत्पादन लगातार बढ़ने के बावजूद भारत अभी भी दालों और खाद्य तेलों के आयात पर काफी हद तक निर्भर है. पिछले साल लोकसभा में सांसद एस. जगतरक्षकन के सवाल के जवाब में कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने बताया कि पिछले पांच वर्षों में दलहन और तिलहन उत्पादन में वृद्धि दर्ज की गई है, लेकिन घरेलू मांग को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर आयात जारी है.
सरकार के मुताबिक, दलहन उत्पादन में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है, जबकि तिलहन उत्पादन ने कुछ बेहतर काम किया है. इसी वजह से केंद्र सरकार ने आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए दलहन और तिलहन क्षेत्र में नई मिशन आधारित योजनाएं शुरू की हैं.
पांच साल में दलहन और तिलहन उत्पादन की स्थिति
सरकार के आंकड़ों के अनुसार, साल 2024-25 में देश का कुल दलहन उत्पादन 256.83 लाख टन रहा, जबकि तिलहन उत्पादन 429.89 लाख टन तक पहुंच गया.
आंकड़ों से स्पष्ट है कि दलहन उत्पादन में लगातार स्थिर बढ़ोतरी नहीं हुई और कुछ वर्षों में गिरावट भी दर्ज की गई. इसके विपरीत तिलहन उत्पादन में लंबे दिनों की वृद्धि का रुझान दिखाई देता है.
केंद्र सरकार ने मूल्य समर्थन योजना (PSS) के तहत दलहन और तिलहन की खरीद भी की है. खरीद के आंकड़े बताते हैं कि अलग-अलग साल में किसानों से खरीद की मात्रा में भारी अंतर रहा.
MSP पर खरीद (मीट्रिक टन में)
साल 2024-25 में तिलहन की MSP खरीद रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची, जो किसानों को बेहतर मूल्य दिलाने की दिशा में सरकार के बढ़ते दखल को दर्शाती है.
लोकसभा में पेश आंकड़ों के अनुसार, भारत दुनिया का सबसे बड़ा दलहन उत्पादक होने के बावजूद दालों का आयात लगातार कर रहा है.
दाल आयात
साल 2024-25 में दाल आयात बढ़कर 72.56 लाख टन हो गया, जो पांच साल पहले के मुकाबले लगभग तीन गुना है. आयात बिल भी बढ़कर 46,427 करोड़ रुपये तक पहुंच गया. इसके अलावा, साल 2024-25 में खाद्य तेलों का आयात 164.10 लाख टन रहा, जिस पर देश को 1.46 लाख करोड़ रुपये से अधिक खर्च करने पड़े.
सरकार ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में दलहन उत्पादन में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिला है. घरेलू मांग और उत्पादन के बीच अंतर बने रहने के कारण आयात की जरूरत पड़ती है. इसी चुनौती को देखते हुए केंद्र सरकार ने दलहन में आत्मनिर्भरता का लक्ष्य तय किया है.
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 1 अक्टूबर 2025 को "मिशन फॉर आत्मनिर्भरता इन पल्सेज" को मंजूरी दी थी. छह साल की इस योजना (2025-26 से 2030-31) पर 11,440 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे.
दलहन मिशन के प्रमुख लक्ष्यों की बात करें तो इसमें अरहर, उड़द और मसूर के उत्पादन में वृद्धि, जलवायु अनुकूल बीजों को बढ़ावा, दलहन क्षेत्र का विस्तार, भंडारण और पोस्ट-हार्वेस्ट प्रबंधन को मजबूत करना और NAFED और NCCF के जरिए गारंटीड खरीद शामिल हैं. सरकार ने 2030-31 तक 350 लाख टन दलहन उत्पादन का लक्ष्य रखा है.
खाद्य तेलों में आयात निर्भरता कम करने के लिए केंद्र सरकार ने अक्टूबर 2024 में राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-तिलहन (NMEO-OS) शुरू किया था. मिशन का लक्ष्य है, 2030-31 तक तिलहन उत्पादन 697 लाख टन करना, 3.3 करोड़ हेक्टेयर क्षेत्र में खेती बढ़ाना, उत्पादकता 2,112 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर तक पहुंचाना, किसानों को मुफ्त क्वालिटी वाले बीज उपलब्ध कराना और तेल मिलों और प्रोसेसिंग ढांचे को मजबूत बनाना.
लोकसभा में पेश आंकड़े बताते हैं कि भारत ने दलहन और तिलहन उत्पादन बढ़ाने में प्रगति की है, लेकिन बढ़ती आबादी और खपत के कारण आयात पर निर्भरता अभी भी काफी अधिक है. विशेष रूप से दालों और खाद्य तेलों के आयात बिल में लगातार बढ़ोतरी यह संकेत देती है कि आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए उत्पादन, उत्पादकता और सरकारी खरीद तीनों मोर्चों पर तेज प्रयासों की जरूरत होगी.