
डिजिटल पेमेंट के लिए इस्तेमाल होने वाले UPI को लेकर नया फ्रेमवर्क सामने आया है. नए नियमों के तहत कृषि इनपुट से जुड़े 2,000 रुपये से अधिक के UPI भुगतान पर प्रति ट्रांजैक्शन 5 रुपये का फ्लैट मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR तय किया गया है. कृषि इनपुट को ईंधन, रेलवे, टेलीकॉम और बीमा जैसे जरूरी और कम मार्जिन वाले सेक्टर की श्रेणी में रखा गया है.
नए फ्रेमवर्क के मुताबिक, सामान्य तौर पर व्यापारियों को किए जाने वाले 2,000 रुपये से ज्यादा के UPI भुगतान पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा. वहीं 75,000 रुपये या उससे अधिक की रकम के ट्रांजैक्शन पर अधिकतम MDR 300 रुपये तक होगा.
हालांकि, कृषि इनपुट जैसे जरूरी और कम मार्जिन वाले क्षेत्रों के लिए अलग व्यवस्था की गई है. इन क्षेत्रों में 2,000 रुपये से ज्यादा के पात्र भुगतान पर रकम चाहे जितनी हो, MDR सिर्फ 5 रुपये प्रति ट्रांजैक्शन रहेगा. इससे कृषि इनपुट से जुड़े भुगतान पर प्रतिशत के हिसाब से MDR लगाने के बजाय एक निश्चित शुल्क लागू होगा.
नए फ्रेमवर्क में छोटे व्यापारियों को राहत दी गई है. UPI QR कोड के जरिए P2PM कैटेगरी में हर महीने 1 लाख रुपये तक का भुगतान प्राप्त करने वाले व्यापारियों पर जीरो MDR की व्यवस्था जारी रहेगी. इसका फायदा रेहड़ी-पटरी वालों, पड़ोस की छोटी दुकानों और दूसरे छोटे कारोबारियों को मिल सकता है.
इसके अलावा, व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P UPI ट्रांजैक्शन पूरी तरह MDR मुक्त रहेंगे. इनके जरिए भेजी जाने वाली रकम पर MDR नहीं लगेगा. व्यापारियों को किए जाने वाले 2,000 रुपये तक के भुगतान को भी MDR से बाहर रखा गया है.
सरकार के मुताबिक, नए नियमों के बाद भी करीब 96 प्रतिशत P2M यानी व्यक्ति से व्यापारी को किए जाने वाले UPI ट्रांजैक्शन MDR के दायरे से बाहर रहेंगे. केवल करीब 4 प्रतिशत मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर MDR लागू होने की बात कही गई है.
अहम बात यह है कि MDR का भुगतान ग्राहक को नहीं करना होगा. बैंकों को यह सुनिश्चित करने की सलाह दी गई है कि व्यापारी MDR का बोझ ग्राहकों पर न डालें. साथ ही UPI ऐप उपलब्ध कराने वाली कंपनियों को प्लेटफॉर्म फीस या छिपे हुए शुल्क लगाने से भी रोका गया है.
MDR को सरकार ने टैक्स नहीं माना है. इससे मिलने वाली रकम UPI पेमेंट सिस्टम से जुड़े बैंकों, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडरों और UPI ऐप प्रोवाइडर्स के बीच बांटी जाएगी.
नए फ्रेमवर्क में कुल MDR कलेक्शन के 5 प्रतिशत के बराबर राशि का एक अलग फंड बनाने का भी प्रावधान है. इस रकम का इस्तेमाल छोटे व्यापारियों के बीच UPI के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए किया जाएगा. बड़े मर्चेंट ट्रांजैक्शन से मिलने वाली रकम का इस्तेमाल ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों सहित डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने में किए जाने की बात कही गई है.
कृषि क्षेत्र के लिहाज से देखें तो नए नियम में कृषि इनपुट को जरूरी सेक्टर में रखने से 2,000 रुपये से अधिक के पात्र UPI भुगतान पर प्रतिशत आधारित MDR के बजाय 5 रुपये का तय MDR लगेगा. वहीं छोटे भुगतान और नियमों के तहत आने वाले छोटे व्यापारियों को जीरो-MDR का फायदा मिलता रहेगा.