देशभर में बारिश और ओलावृष्टि से 2.49 लाख हेक्टेयर फसल बर्बाद, सरकार ने राज्यों से मांगी रिपोर्ट

देशभर में बारिश और ओलावृष्टि से 2.49 लाख हेक्टेयर फसल बर्बाद, सरकार ने राज्यों से मांगी रिपोर्ट

देश के कई राज्यों में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से करीब 2.49 लाख हेक्टेयर फसल को नुकसान पहुंचा है. गेहूं, दलहन और सब्जियों की फसलें सबसे ज्यादा प्रभावित हुई हैं. केंद्रीय कृषि मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने राज्यों को नुकसान का आकलन कर जानकारी सार्वजनिक करने के निर्देश दिए हैं, जबकि किसान सरकार से राहत की मांग कर रहे हैं.

shivraj singh chouhanshivraj singh chouhan
क‍िसान तक
  • New Delhi ,
  • Apr 10, 2026,
  • Updated Apr 10, 2026, 12:52 PM IST

देश के कई राज्यों में बारिश और ओलावृष्टि की वजह से फसलों का नुकसान हुआ है. इसमें पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और गुजरात शामिल हैं. फसलों की बात करें तो गेहूं सबसे ज्यादा प्रभावित है. दलहन के अलावा सब्जियों की फसलें भी चौपट हुई हैं. नुकसान को देखते हुए किसानों ने सरकार से राहत की मांग उठाई है. फसल नुकसान के बारे में आधिकारिक जानकारी देते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से 2 लाख 49 हजार हेक्टेयर में फसल नुकसान की प्रारंभिक रिपोर्ट आई है. कृषि मंत्री ने भोपाल में यह बात कही.

कृषि मंत्री ने कहा, राज्यों से नुकसान का आकलन करने को कहा गया है. नुकसान की जानकारी हर पंचायत में पंचायत भवन पर चस्पा करने को कहा गया है.

मौसम की मार, फसल क्षति और सर्वे

असामान्य मौसम और ओलावृष्टि से हुई फसल क्षति पर प्रश्न के उत्तर में चौहान ने बताया कि उन्होंने सभी राज्य सरकारों से तुरंत नुकसान का आकलन करने को कहा है. उन्होंने निर्देश दिए हैं कि क्रॉप कटिंग एक्सपेरिमेंट समय पर और वैज्ञानिक तरीके से हों, राजस्व, कृषि और पंचायत/ग्रामीण विकास – तीन विभाग संयुक्त सर्वे करें, नुकसान की सूची गांव–गांव के पंचायत भवनों पर चस्पा की जाए, ताकि किसान आपत्ति या सुधार के लिए आवेदन दे सकें. 

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत पूरी टीम सक्रिय है, लेकिन मौसम की मार विभिन्न चरणों में पड़ने और आंकड़े लगातार अपडेट होने के कारण अभी अंतिम कुल नुकसान बताना संभव नहीं है. फिर भी उन्होंने आश्वस्त किया कि किसान को हरसंभव राहत और बीमा लाभ दिलाने में कोई कमी नहीं रखी जाएगी.

वैश्विक संकट, एक्सपोर्ट और भारतीय किसान की सुरक्षा

पश्चिम एशिया के संकट और वैश्विक हालात से कृषि निर्यात और फर्टिलाइज़र आपूर्ति पर क्या असर पड़ रहा है, इस पर केंद्रीय कृषि मंत्री चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में निरंतर उच्च स्तरीय बैठकें हो रही हैं. उन्होंने माना कि कई अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का प्रभाव एक्सपोर्ट पर पड़ता है, लेकिन सरकार की प्राथमिकता यह है कि किसान को उसकी उपज का उचित मूल्य मिले, फर्टिलाइज़र की उपलब्धता बनी रहे और किसान पर वैश्विक संकट का बोझ न्यूनतम रहे.

शिवराज सिंह चौहान ने कहा, कृषि का विविधीकरण बेहद जरूरी है. गेहूं और धान में हम समृद्ध हैं, लेकिन दलहन और तिलहन में आत्मनिर्भर बनना हमारी प्राथमिकता है. हमने देश के पांच हिस्सों में रीजनल कॉन्फ्रेंस शुरू की है, ताकि हर क्षेत्र की जलवायु और जरूरतों के अनुसार खेती की दिशा तय हो सके.

फर्टिलाइजर पर सब्सिडी

फर्टिलाइजर व्यवस्था पर चौहान ने कहा कि कच्चे माल की अंतरराष्ट्रीय कीमतें बढ़ने के बावजूद सरकार ने फैसला किया है कि यूरिया की बोरी 266 रुपये और डीएपी की बोरी 1350 रुपये में ही किसानों को मिलेगी. इसके लिए हाल ही में कैबिनेट ने 41,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त व्यवस्था की है, ताकि बढ़ी हुई लागत का पूरा बोझ सरकार उठाए और किसान पर भार न पड़े. 

उन्होंने कहा कि सब्सिडी वाला खाद कई बार दूसरे उद्योगों या गैर–कृषि उपयोग में डायवर्ट हो जाता है. इसे रोकने के लिए फार्मर आईडी आधारित मॉडल विकसित किया जा रहा है, जिसके तहत हर किसान की जमीन, फसल और परिवार का डेटा एक एकीकृत आईडी से जुड़ा होगा. फार्मर आईडी के आधार पर यह तय होगा कि कितनी जमीन और कौन–सी फसल के लिए कितना खाद पर्याप्त है, ताकि किसान को कमी न हो, पर अतिरिक्त उठाव, जमाखोरी और ब्लैक मार्केटिंग पर रोक लगे.

जैविक खेती पर जोर

कृषि मंत्री ने कहा कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी यह धरती अन्न का आधार बनी रहे, इसके लिए जैविक खेती, प्राकृतिक खेती जैसे विषयों पर ध्यान दिया जा रहा है. उसके लिए देश में कई कार्यक्रम बनाए गए हैं. सरकार अभी तक रबी और खरीफ के लिए एक कॉन्फ्रेंस होती थी, लेकिन अब इसे अलग-अलग क्षेत्रों में रीजनल स्तर पर की जाएगी. खेती की समस्या के आधार पर सरकार रीजनल कॉन्फ्रेंस कर रही है. इसमें चर्चा होगी कि किसी क्षेत्र में कौन सी फसलें और कौन सी किस्मों की खेती की जाए.

कृषि मंत्री ने कहा कि वैज्ञानिकों की शोध का परिणाम है कि देश में फसलों का उत्पादन बढ़ा है. कई बार शोध लैब तक रह जाता है, लैंड तक नहीं जाता. अब वैज्ञानिकों को किसानों के साथ जोड़ा जा रहा है. पिछले साल इसके लिए कृषि संकल्प अभियान शुरू किया था, अब राज्यों के मौसम और फसलों के हिसाब से विकसित कृषि संकल्प अभियान चलाया जाएगा, यह काम राज्यों पर छोड़ा गया है.

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