Cashew Import: काजू का गैर-कानूनी आयात! परेशान ट्रेडर्स ने लिखी सरकार को चिट्ठी, की बड़ी अपील 

Cashew Import: काजू का गैर-कानूनी आयात! परेशान ट्रेडर्स ने लिखी सरकार को चिट्ठी, की बड़ी अपील 

काजू के गैर-कानूनी आयात पर एसोसिएशन के सेक्रेटरी एम. रामकृष्णन की तरफ से एक चिट्ठी लिखी गई है. उन्‍होंने कहा है कि काजू की बहुत ज्‍यादा कीमतों की वजह से काजू इंडस्ट्री बहुत ज्‍यादा दबाव में है जबकि गिरी की घरेलू डिमांड अभी भी सुस्त है. इससे देश भर में बड़ी संख्या में यूनिट्स के लिए काजू प्रोसेसिंग आर्थिक रूप से फायदेमंद नहीं रह गई है.  

क‍िसान तक
  • New Delhi ,
  • Jan 14, 2026,
  • Updated Jan 14, 2026, 3:47 PM IST

काजू भारत का वह मेवा है जिसे शायद ही कोई नापसंद करता होगा. लेकिन अब इसका गैर-कानूनी आयात देश के उत्‍पादकों की मुश्किलों को बढ़ा रहा है. ऑल इंडिया काजू एसोसिएशन ने वाणिज्‍य मंत्रालय से  अपील की है कि काजू की गिरी के गैर-कानूनी आयात में इजाफा हो रहा है. ऐसे में उसे तुरंत दखल देना जरूरी है. संगठन का मानना है कि इस तरह का कदम घरेलू काजू प्रोसेसिंग सेक्टर को बचाने के लिए बेहद जरूरी है. वाणिज्‍य मंत्रालय के सचिव राकेश अग्रवाल को संगठन की तरफ से एक चिट्ठी लिखी गई है.

क्‍या लिखा है चिट्ठी में 

यह चिट्ठी एसोसिएशन के सेक्रेटरी एम. रामकृष्णन की तरफ से लिखी गई है. उन्‍होंने कहा है कि काजू की बहुत ज्‍यादा कीमतों की वजह से काजू इंडस्ट्री बहुत ज्‍यादा दबाव में है जबकि गिरी की घरेलू डिमांड अभी भी सुस्त है. इससे देश भर में बड़ी संख्या में यूनिट्स के लिए काजू प्रोसेसिंग आर्थिक रूप से फायदेमंद नहीं रह गई है.  चिट्ठी में उन्‍होंने कहा, 'कमजोर घरेलू बाजार के पीछे एक बड़ा कारण भारत में काजू की गिरी का बड़े पैमाने पर गैर-कानूनी आयात है. यह आयात एचएसएन कोड की गलत जानकारी देकर किए जा रहे हैं जिसमें काजू की गिरी को जानवरों का चारा, काजू की भूसी या दूसरे अलग प्रोडक्ट बता दिए जाते हैं.

उन्होंने कहा कि हाल ही में एक नया तरीका सामने आया है जिसमें सादे काजू की गिरी को गलत तरीके से 'रोस्टेड काजू' बता दिया जाता है. उनका कहना था कि घरेलू बाजार अब वियतनाम और अफ्रीकी देशों से काजू की गिरी से भर गया है. उनकी मानें तो इस गैर-कानूनी आयात को  स्पेशल इकोनॉमिक जोन (SEZ) के रास्‍ते से लाया जा रहा और ऐसे में इसका भी गलत प्रयोग हो रहा है. 

ग्राहकों के साथ धोखा 

रामकृष्णन के अनुसार ये आयात भारतीय गिरी के तौर पर बेचे जाने से ग्राहकों को धोखा दे रहे हैं. साथ ही इससे खाने की सुरक्षा को लेकर भी चिंताएं बढ़ती हैं और घरेलू प्रोडक्ट की साख को नुकसान पहुंचता है. ये गिरी न केवल कीमतों में सस्ती हैं बल्कि भारतीय काजू की गिरी की तुलना में क्वालिटी में भी खराब हैं. उनका कहना था कि इन्हें ग्राहकों को भारतीय काजू की गिरी के रूप में भी बेचा जा रहा है जिससे खरीदारों को गुमराह किया जा रहा है और घरेलू बाजार में भारतीय काजू की गिरी की साख और भरोसे को नुकसान पहुंच रहा है. 

फैक्‍ट्री बंद होने का भी खतरा 

बिना रोक-टोक के जारी उन्होंने कहा कि इस स्थिति में लेबर-इंटेंसिव एग्रो-सेक्टर में फैक्ट्रियों के बड़े पैमाने पर बंद होने का खतरा है. इससे देश भर में 10 लाख से ज्‍यादा महिला वर्कर्स की रोजी-रोटी पर खतरा है.संगठन ने अपील की है कि एचएसएन कोड का सख्ती से वेरिफिकेशन पक्का करने, पोर्ट्स पर कस्टम वेरिफिकेशन बढ़ाने और SEZs का गलत इस्तेमाल रोका जाए. साथ ही घरेलू प्रोसेसर्स को सुरक्षित रखने के लिए फेयर ट्रेड प्रैक्टिस पक्का करके कंज्यूमर्स को गलत लेबल वाले और घटिया प्रोडक्ट्स से बचाने के लिए कदम उठाए जाने चाहिए. 

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