कृषि क्षेत्र की जीवीए 10 साल में दोगुने से ज्यादा बढ़ी, लोकसभा में सरकार ने दिए आंकड़े

कृषि क्षेत्र की जीवीए 10 साल में दोगुने से ज्यादा बढ़ी, लोकसभा में सरकार ने दिए आंकड़े

सरकार के अनुसार भारत में कृषि और संबद्ध क्षेत्रों का सकल मूल्य वर्धन (GVA) 2014–15 के 20.93 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2023–24 में 48.77 लाख करोड़ रुपये हो गया है. पिछले 10 वर्षों में इस क्षेत्र ने 8.83% की वार्षिक वृद्धि दर्ज की है. यह जानकारी कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने लोकसभा में दी.

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क‍िसान तक
  • New Delhi ,
  • Mar 11, 2026,
  • Updated Mar 11, 2026, 7:29 PM IST

सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) की ओर से जारी सकल मूल्य वर्धन (GVA) के ताजा अनुमानों के अनुसार, कुल जीवीए में कृषि और उससे जुड़े क्षेत्र की हिस्सेदारी लगभग 18% है. इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय लेखा सांख्यिकी के अनुसार वित्तीय वर्ष 2014–15 में कृषि और उससे जुड़े क्षेत्र का जीवीए 20,93,612 करोड़ रुपये आंका गया था, जबकि वित्तीय वर्ष 2023–24 में यह बढ़कर 48,77,867 करोड़ रुपये होने का अनुमान है. वित्तीय वर्ष 2014–15 से 2023–24 की अवधि के दौरान इस क्षेत्र ने 8.83% की वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) दर्ज की है.

राष्ट्रीय लेखा सांख्यिकी के अनुसार, कृषि और संबद्ध क्षेत्र में पशुधन, फसल, मत्स्य पालन और जलीय कृषि की हिस्सेदारी क्रमशः 30.87%, 54.39% और 7.55% है. पशुधन का जीवीए वित्तीय वर्ष 2014–15 में 5,10,411 करोड़ रुपये आंका गया था, जो बढ़कर वित्तीय वर्ष 2023–24 में 15,05,615 करोड़ रुपये हो गया है. फसलों का जीवीए वित्तीय वर्ष 2014–15 में 12,92,874 करोड़ रुपये था, जो बढ़कर वित्तीय वर्ष 2023–24 में 26,52,891 करोड़ रुपये हो गया है. इसी प्रकार, मत्स्य पालन और जलीय कृषि का जीवीए वित्तीय वर्ष 2014–15 में लगभग 1,16,567 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्तीय वर्ष 2023–24 में लगभग 3,68,124 करोड़ रुपये हो गया है.

खाद्यान्न उत्पादन में वृद्धि

देश में पिछले 10 वर्षों के दौरान खाद्यान्न उत्पादन लगातार बढ़ रहा है. वित्तीय वर्ष 2015–16 में देश का कुल खाद्यान्न उत्पादन 2515.42 लाख मीट्रिक टन अनुमानित था, जो बढ़कर वित्तीय वर्ष 2024–25 में 3577.32 लाख मीट्रिक टन हो गया है. इस अवधि में लगभग 3.6% की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) दर्ज किया गया है. इसके अलावा, वित्तीय वर्ष 2025–26 के लिए जारी पहले अग्रिम अनुमान के अनुसार, खरीफ फसलों का खाद्यान्न उत्पादन रिकॉर्ड 1733.30 लाख मीट्रिक टन होने का अनुमान है. 

वित्तीय वर्ष 2025–26 के लिए वार्षिक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के दूसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार, कृषि और उससे जुड़े क्षेत्र का सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) 52,08,800 करोड़ रुपये आंका गया है, जो 2.4% की वृद्धि दिखलाता है.

देश में किसान परिवारों की औसत मासिक आय का आकलन समय-समय पर राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ), सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) द्वारा आयोजित “कृषि परिवारों की स्थिति मूल्यांकन सर्वेक्षण (एसएएस)” के माध्यम से किया जाता है.

किसानों की मासिक आय में वृद्धि

नवीनतम एनएसएस के 77वें दौर के सर्वेक्षण (जनवरी 2019–दिसंबर 2019) के अनुसार, देश के ग्रामीण क्षेत्रों में प्रति किसान परिवार की औसत मासिक आय विभिन्न स्रोतों— जैसे फसल उत्पादन, पशुपालन, मजदूरी, गैर-कृषि व्यवसाय और भूमि पट्टे पर देने— से मिलाकर लगभग 10,218 रुपये प्रति माह आंकी गई है. इन स्रोतों का योगदान राज्यों के अनुसार अलग-अलग होता है, जो स्थानीय कृषि-जलवायु परिस्थितियों, खेत के आकार और फसल पैटर्न पर निर्भर करता है. इन सर्वेक्षणों के अनुसार, प्रति कृषक परिवार की अनुमानित औसत मासिक आय वित्तीय वर्ष 2012–13(एनएसएस 70वां राउंड) में 6,426 रुपये से बढ़कर वित्तीय वर्ष 2018–19 (एनएसएस 77वां राउंड) में 10,218 रुपये हो गया है.

यह जानकारी कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री, भागीरथ चौधरी ने आज लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दिया.

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