Icar achievement: ग्लोबल लेवल पर चमके भारत के कृषि संस्थान, ICAR संस्थानों की बड़ी उपलब्धि​

Icar achievement: ग्लोबल लेवल पर चमके भारत के कृषि संस्थान, ICAR संस्थानों की बड़ी उपलब्धि​

भारतीय कृषि संस्थानों ने ग्लोबल लेवल पर अपनी कामयाबी का परचम लहराकर एक नया इतिहास रच दिया है. पहली बार ICAR के संस्थानों ने 'क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2026' में जगह बनाकर दुनिया को अपनी ताकत का अहसास कराया है. अब तक इस क्षेत्र में पश्चिमी देशों का दबदबा था, लेकिन बरेली के इज्जतनग स्थित पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI) ने दुनिया के टॉप 100 संस्थानों में शामिल होकर यह भ्रम तोड़ दिया है. वहीं आईएआरआई पूसा दिल्ली ने भी खास जगह बनाई है. यह ऐतिहासिक कामयाबी साबित करता है कि हमारी कृषि शिक्षा और तकनीक किसी से कम नहीं है. विदेशी में मिली इस लोकप्रियता से भारत कासम्मान बढ़ा है.

ICAR संस्थानों की बड़ी उपलब्धिICAR संस्थानों की बड़ी उपलब्धि
जेपी स‍िंह
  • नई दिल्ली,
  • Apr 01, 2026,
  • Updated Apr 01, 2026, 7:53 AM IST

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के दो प्रमुख संस्थानों ने पहली बार 'क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2026' में अपनी जगह बनाकर दुनिया को अपनी ताकत का अहसास कराया है. अब तक वैश्विक स्तर पर कृषि शिक्षा में पश्चिमी देशों का दबदबा माना जाता था, लेकिन इस मकाम को हासिल कर भारत ने साबित कर दिया है कि हमारी कृषि शिक्षा और तकनीक किसी से कम नहीं है. बरेली के इज्जतनगर स्थितआईसीएआर-भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI) ने पशु चिकित्सा विज्ञान (Veterinary Science) में दुनिया के टॉप 100 संस्थानों में जगह पाकर एक नया रिकॉर्ड कायम किया है. वहीं, नई दिल्ली के आईसीएआर-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) यानी 'पूसा संस्थान' ने भी कृषि और वानिकी की श्रेणी में पहली बार रैंकिंग में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है.

यह जीत हमारे वैज्ञानिकों की बरसों की मेहनत, सटीक रिसर्च और कृषि के क्षेत्र में नए तजुर्बों का एक बेहतरीन नतीजा है. आईसीएआर के महानिदेश डॉ. एम.एल. जाट, का  मानना है कि यह रैंकिंग हमारे संस्थानों की बहुआयामी प्रतिभा का सबूत है. यह सफलता बताती है कि हमारे वैज्ञानिक न केवल प्रयोगशालाओं में नए बीज और दवाएं विकसित कर रहे हैं, बल्कि वे जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौतियों से लड़ने के लिए भी तैयार हैं और साथ ही किसानों का हमारे संस्थानों पर अटूट भरोसा ही वह ताकत है, जिसने हमें इस ऊंचे मुकाम तक पहुंचाया है.

​कृषि शिक्षा में भारत की ऊंची उड़ान

यूनाइटेड किंगडम की मशहूर संस्था 'क्यूएस क्वाक्वेरेली साइमंड्स' द्वारा जारी यह रैंकिंग दुनिया भर के 1,900 से ज्यादा विश्वविद्यालयों के 21,000 कार्यक्रमों को परखने के बाद तैयार की गई है. इसमें सिर्फ किताबों की पढ़ाई नहीं देखी जाती, बल्कि इस बात पर भी गौर किया जाता है कि वहां होने वाली रिसर्च का समाज पर क्या असर पड़ रहा है और वहां से निकलने वाले छात्रों की कंपनियों में क्या साखहै. आईसीएआर ने राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान शिक्षा एवं विस्तार प्रणाली) के तहत एक ऐसा माहौल तैयार किया है, जहां रिसर्च को किताबी ज्ञान से निकालकर सीधे खेतों तक पहुंचाया जा रहा है. सरकार की यह कोशिश रही है कि हमारे कृषि संस्थान सिर्फ भारत तक सीमित न रहें, बल्कि वे दुनिया भर के लिए इनोवेशन के  केंद्र बनें. आज रैंकिंग में सुधार देख रहे हैं,तो यह इसी संगठित कोशिश और सही दिशा में उठाए गए कदमों की जीत को साफ जाहिर करता है.

पशु चिकित्सा और कृषि शिक्षा में भारत का बढ़ता दबदबा

भारतीय संस्थानों का प्रदर्शन वाकई काबिले-तारीफ रहा है. बरेली के आईबीआरआई IVRI ने 51-100 की रैंकिंग श्रेणी में आकर दुनिया के चुनिंदा संस्थानों में अपनी जगह पक्की की है, जो पशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में भारत की बढ़ती विशेषज्ञता को दर्शाता है. कृषि और वानिकी की बात करें, तो दुनिया भर के 475 टॉप विश्वविद्यालयों में से 10 भारतीय संस्थानों का शामिल होना इस बात की प्रमाणित करता है कि हम सही रास्ते पर हैं. आईएआरई पूसा संस्थान दिल्ली के साथ-साथ बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU),दिल्ली विश्वविद्यालय और आईआईटी खड़गपुर ने भी 151-200 की श्रेणी में अपनी जगह बनाई है. इसकेअलावा,तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय और हिसार का चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय भी इस श्रेणी में शामिल हैं.

अब दुनिया पढ़ेगी भारत का 'कृषि मॉडल'

कृषि हमारे देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैऔर जब इसके शिक्षण संस्थान दुनिया के बेहतरीन संस्थानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होते हैं, तो पूरे देश का आत्मविश्वास बढ़ता है. यह रैंकिंग इस बात का इशारा है कि आने वाले समय में भारत दुनिया के लिए 'कृषि शिक्षा का हब' बनने वाला है. विज्ञान और तकनीक के इस दौर में अब खेती सिर्फ हल चलाने तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह आधुनिक डेटा, ड्रोन तकनीक और जलवायु-अनुकूल खेती का संगम बन चुकी है. इन संस्थानों की सफलता से न केवल देश के युवाओं को कृषि को एक करियर के रूप में चुनने की प्रेरणा मिलेगी,बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत का रुतबा और बढ़ेगा. यह उपलब्धि हमें याद दिलाती है कि नवाचार और कड़ी मेहनत से हम किसी भी बाधा को पार कर सकते हैं. आने वाले सालों में उम्मीद है कि भारत के और भी कई कृषि विश्वविद्यालय इस श्रेणी में शामिल होंगे.

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