
हिमाचल प्रदेश में इस मॉनसून सीजन के दौरान हुई प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान का जायजा लेने पहुंची सात सदस्यीय अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीम ने छह जिलों का दौरा पूरा कर लिया है. टीम ने राज्य सरकार के अधिकारियों के साथ बैठक कर राहत, पुनर्वास और पुनर्निर्माण के लिए जरूरी केंद्रीय सहायता पर चर्चा की. केंद्र की अंतर-मंत्रालयी टीम ने चंबा, कांगड़ा, मंडी, कुल्लू, शिमला और सोलन जिलों में आपदा प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया. टीम के सदस्यों ने भूस्खलन, जमीन धंसने, मकानों को हुए नुकसान, सड़कों और जलापूर्ति योजनाओं की स्थिति फसल खराबे समेत विभिन्न क्षेत्रों में हुए नुकसान का मौके पर जायजा लिया.
आपदा प्रबंधन विभाग के संयुक्त सचिव एम. रामचंद्रुडु के नेतृत्व में सात सदस्यीय टीम 28 सितंबर को हिमाचल प्रदेश पहुंची थी. टीम में वित्त, ग्रामीण विकास, सड़क, जल शक्ति और कृषि विभाग के अधिकारियों के अलावा राष्ट्रीय रिमोट सेंसिंग सेंटर यानी एनआरएससी के प्रतिनिधि को शामिल किया गया था.
संयुक्त सचिव एम. रामचंद्रुडु ने बताया कि राज्य सरकार की ओर से फिलहाल एक प्रारंभिक ज्ञापन उपलब्ध कराया गया था, जिसकी टीम ने समीक्षा की है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की ओर से नुकसान का अंतिम ज्ञापन अभी तैयार किया जाना बाकी है. अंतिम ज्ञापन मिलने के बाद टीम नुकसान के आकलन और राज्य की ओर से रखी गई मांगों की विस्तृत समीक्षा करेगी.
अफसर ने बताया कि टीम राज्य सरकार से मिले नुकसान के अनुमान और विभिन्न विभागों के प्रस्तावों की जांच करेगी. इसके बाद केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित मानकों के आधार पर केंद्रीय सहायता के संबंध में अपनी सिफारिश केंद्र सरकार को भेजेगी.
केंद्रीय टीम के आकलन में सड़कों और जलापूर्ति योजनाओं को हुए नुकसान का मुद्दा प्रमुख रहा. इसके अलावा मकानों को नुकसान और जनहानि के मामले भी सामने आए हैं. टीम ने कृषि, बागवानी, पशुधन और मत्स्य क्षेत्र में हुए नुकसान की जानकारी भी जुटाई है.
हिमाचल प्रदेश के आपदा प्रबंधन विभाग के विशेष सचिव पुष्पेंद्र राणा ने बताया कि केंद्रीय टीम ने प्रभावित इलाकों में स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों से भी बातचीत की. संबंधित विभागों के अधिकारियों ने टीम को मौके पर हुए नुकसान की जानकारी दी और प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति से अवगत कराया.
विशेष सचिव पुष्पेंद्र राणा ने कहा कि राज्य सरकार के मौजूदा ज्ञापन में आपदा से करीब 3,400 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया गया है. शिमला में हुई बैठक में वरिष्ठ सचिवों और विभिन्न विभागों के प्रमुखों के साथ इस ज्ञापन पर चर्चा की गई. बैठक में राहत और रिकवरी कार्यों के लिए वित्तीय सहायता बढ़ाने से जुड़े मुद्दों पर भी बातचीत हुई.
केंद्रीय टीम ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से भी मुलाकात की. मुख्यमंत्री ने टीम को राज्य में आपदा से हुए नुकसान और राहत, पुनर्प्राप्ति तथा पुनर्निर्माण के लिए आवश्यक संसाधनों की जानकारी दी. पुष्पेंद्र राणा ने बताया कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने केंद्रीय टीम के सामने हिमालयी राज्यों की विशेष परिस्थितियों का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि हिमालयी राज्यों के लिए निर्धारित राहत मानक मैदानी क्षेत्रों की तुलना में कम हैं और पहाड़ी क्षेत्रों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विशेष आवश्यकताओं पर विचार किया जाना चाहिए.
मुख्यमंत्री ने केंद्र से राज्य की ओर से मांगी गई सहायता जल्द जारी करने का आग्रह भी किया. उन्होंने बताया कि हिमाचल के पहाड़ी इलाकों में काम करने का मौसम सीमित रहता है, इसलिए राहत, नुकसान की भरपाई और आपदा न्यूनीकरण से जुड़े कार्य जल्द शुरू करना जरूरी है.
पुष्पेंद्र राणा ने कहा कि नुकसान से जुड़ी नई जानकारी मिलने के साथ राज्य सरकार अपने ज्ञापन को अपडेट करेगी. संशोधित विवरण आने वाले दिनों में केंद्र सरकार को भेजा जाएगा. अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीम अब हिमाचल प्रदेश सरकार की ओर से भेजे जाने वाले अंतिम ज्ञापन की समीक्षा करेगी. इसके बाद आपदा सहायता के लिए केंद्र सरकार के निर्धारित नियमों के अनुसार सहायता की सिफारिश की जाएगी. (एएनआई)