भूमाफियाओं और साहूकारों को झटका! गुजरात में किसानों को वापस मिली करोड़ों की जमीन

भूमाफियाओं और साहूकारों को झटका! गुजरात में किसानों को वापस मिली करोड़ों की जमीन

गुजरात के राजकोट में पुलिस ने जमीन धोखाधड़ी के शिकार 55 किसानों को करीब 100 करोड़ रुपये की जमीन के दस्तावेज वापस दिलाए हैं. उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने शापर में आयोजित कार्यक्रम में किसानों को दस्तावेज सौंपे. पुलिस और विशेष जांच दल (SIT) की कार्रवाई से किसानों को बड़ी राहत मिली है. जानिए इस पूरे मामले की जानकारी और कार्रवाई की अहम बातें.

किसानों की सालों की लड़ाई खत्म?किसानों की सालों की लड़ाई खत्म?
क‍िसान तक
  • New Delhi,
  • Oct 16, 2026,
  • Updated Oct 16, 2026, 3:42 PM IST

गुजरात के राजकोट में किसानों के लिए राहत की बड़ी खबर सामने आई है. जमीन के धोखे का शिकार हुए 55 किसानों को उनकी जमीन वापस दिलाई गई है. इन जमीनों की कीमत करीब 100 करोड़ रुपये बताई जा रही है. गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने गुरुवार को यह जानकारी दी. उन्होंने बताया कि भूमाफियाओं और साहूकारों ने धोखाधड़ी करके किसानों की जमीन अपने कब्जे में ले ली थी. लंबे समय से अपने हक के लिए लड़ रहे किसानों को अब राहत मिली है. पुलिस और विशेष जांच दल (SIT) की कोशिशों से किसानों को उनकी जमीन से जुड़े दस्तावेज वापस सौंपे गए हैं.

राजकोट में 55 किसानों को वापस मिली जमीन

राजकोट पुलिस ने जमीन से जुड़े धोखाधड़ी के मामलों में कार्रवाई करते हुए 55 किसानों को उनकी जमीन वापस दिलाने में सफलता हासिल की है. इन जमीनों की कुल कीमत करीब 100 करोड़ रुपये बताई गई है. गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने गुरुवार को राजकोट के शापर में आयोजित एक कार्यक्रम में किसानों को जमीन के दस्तावेज सौंपे. इस कार्यक्रम में किसानों को उनके जमीन से जुड़े कागजात वापस दिए गए, जिससे वे अपनी संपत्ति पर अपने अधिकार को फिर से साबित कर सकें. बताया गया कि इन किसानों को लंबे समय से अपनी जमीन वापस पाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा था. पुलिस और विशेष जांच दल की कार्रवाई के बाद उन्हें राहत मिली है.

भूमाफियाओं और साहूकारों पर धोखाधड़ी का आरोप

उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी के मुताबिक, इन किसानों की जमीन धोखाधड़ी के जरिए उनसे छीन ली गई थी. जमीन किसानों की सबसे बड़ी संपत्ति होती है. कई परिवारों के लिए खेती ही कमाई का मुख्य साधन है. ऐसे में जमीन छिन जाने से उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाता है. संघवी ने कहा कि जिन लोगों ने अपनी जिंदगी की सारी कमाई जमीन खरीदने या खेती करने में लगाई है, वे ही समझ सकते हैं कि जमीन खोने का दर्द कितना बड़ा होता है. उन्होंने कहा कि इन परिवारों को लंबे समय तक परेशानी झेलनी पड़ी, लेकिन अब पुलिस और SIT की कार्रवाई से उन्हें बड़ी राहत मिली है.

किसानों के लिए अदालतों में लड़ना आसान नहीं

हर्ष संघवी ने कहा कि जब साहूकारों या जमीन से जुड़े धोखाधड़ी के मामलों में आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज होता है, तो वे वकीलों की मदद ले सकते हैं और कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए दूसरे इंतजाम भी कर सकते हैं. लेकिन गरीब किसानों के लिए ऐसा करना आसान नहीं होता. किसानों के सामने कई तरह की परेशानियां होती हैं. उन्हें एक तरफ अदालतों के चक्कर लगाने पड़ते हैं, तो दूसरी तरफ वकीलों की फीस और परिवार का खर्च भी उठाना पड़ता है. इसके साथ ही उन्हें अपनी रोजी-रोटी के लिए काम भी करना होता है. ऐसे हालात में अपनी जमीन वापस पाने की लड़ाई लड़ना उनके लिए बेहद मुश्किल हो जाता है.

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि जमीन वापस मिलने से इन किसानों को लंबे समय से चल रही परेशानी से राहत मिली है. यह कार्रवाई उन परिवारों के लिए महत्वपूर्ण है, जिनकी आजीविका जमीन पर निर्भर है.

पुलिस और SIT की कार्रवाई से मिली राहत

इस मामले में राजकोट पुलिस और विशेष जांच दल (SIT) ने मिलकर कार्रवाई की. जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद किसानों को उनकी जमीन से जुड़े दस्तावेज वापस दिलाए गए. इससे किसानों को अपनी संपत्ति पर अधिकार वापस पाने में मदद मिली है. उपमुख्यमंत्री ने इस कार्रवाई को बड़ी सफलता बताया. उन्होंने दावा किया कि इतनी बड़ी कीमत की जमीन किसानों को वापस दिलाने की यह देश के इतिहास में अभूतपूर्व घटना है. हालांकि, यह दावा उपमुख्यमंत्री का है.

राजकोट ग्रामीण पुलिस के नए कार्यालय का उद्घाटन

किसानों को जमीन के दस्तावेज सौंपने के लिए शापर में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था. इसी कार्यक्रम के दौरान उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने राजकोट ग्रामीण डिवीजन के उपमंडल पुलिस अधिकारी के नवनिर्मित कार्यालय का उद्घाटन भी किया. कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद पुरुषोत्तम रूपाला, विधायक, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, जिला प्रशासन के अधिकारी, स्थानीय नेता और बड़ी संख्या में किसान व आम नागरिक मौजूद रहे.

किसानों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह कार्रवाई?

खेती करने वाले किसानों के लिए जमीन केवल संपत्ति नहीं, बल्कि उनकी कमाई और परिवार के भविष्य का आधार भी होती है. जमीन पर कब्जा हो जाने या धोखाधड़ी से उसे खो देने पर किसान की आर्थिक स्थिति बिगड़ सकती है. ऐसे मामलों में कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए पैसे और समय दोनों की जरूरत होती है. राजकोट में 55 किसानों को जमीन के दस्तावेज वापस मिलने से उन्हें अपने अधिकार की लड़ाई में राहत मिली है. अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित कानूनी प्रक्रिया के तहत सभी किसानों के जमीन पर अधिकार सुनिश्चित करने के लिए आगे क्या कदम उठाए जाते हैं. कुल मिलाकर, राजकोट पुलिस की इस कार्रवाई से उन 55 किसानों को राहत मिली है, जो लंबे समय से अपनी जमीन वापस पाने के लिए संघर्ष कर रहे थे. करीब 100 करोड़ रुपये की जमीन से जुड़े दस्तावेज वापस मिलने से किसानों को उम्मीद है कि वे अपनी खेती और आजीविका को फिर से संभाल सकेंगे. (PTI)

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