
गन्ना किसानों के मुद्दों को लेकर महाराष्ट्र में आंदोलन तेज होता जा रहा है. स्वाभिमानी शेतकरी संगठन के अध्यक्ष और पूर्व सांसद राजू शेट्टी ने कराड स्थित कृष्णा सहकारी चीनी मिल पर जोरदार प्रदर्शन करते हुए राज्य और केंद्र सरकार पर किसानों की अनदेखी का आरोप लगाया. इस दौरान बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मिल परिसर के बाहर जुटे और सरकार और चीनी मिल मालिकों के खिलाफ नारेबाजी की.
आंदोलन को देखते हुए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था. पुलिस की मध्यस्थता से मिल प्रशासन और राजू शेट्टी के बीच बातचीत भी हुई, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका. इसके बाद शेट्टी ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि जब तक गन्ना किसानों की मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक चीनी मिलों को सुचारु रूप से चलने नहीं दिया जाएगा.
स्वाभिमानी शेतकरी संगठन की प्रमुख मांग है कि किसानों को गन्ने का भाव 5,000 रुपये प्रति टन दिया जाए. इसके साथ ही चीनी की न्यूनतम बिक्री कीमत (MSP) बढ़ाकर 50 रुपये प्रति किलोग्राम और इथेनॉल का खरीद मूल्य 70 रुपये प्रति लीटर निर्धारित किया जाए.
राजू शेट्टी का कहना है कि वर्तमान परिस्थितियों में गन्ना किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है. उनका आरोप है कि चीनी उद्योग और सरकार दोनों किसानों के हितों की अनदेखी कर रहे हैं.
राजू शेट्टी ने कहा कि इस समय गन्ने में रिकवरी अपेक्षाकृत कम है. यदि कुछ सप्ताह और इंतजार किया जाए तो गन्ने का वजन और रिकवरी दोनों बढ़ सकते हैं. लेकिन समय से पहले गन्ने की कटाई और पेराई शुरू होने से किसानों को प्रति एकड़ लगभग 20 हजार रुपये तक का नुकसान हो सकता है.
उन्होंने तर्क दिया कि यदि सरकार और उद्योग जगत बाजार में जल्दी चीनी लाना चाहते हैं तो किसानों को होने वाले इस नुकसान की भरपाई भी करनी चाहिए. शेट्टी ने मांग की कि 40 टन प्रति एकड़ उत्पादन मानते हुए 500 रुपये प्रति टन की दर से किसानों को अनुदान दिया जाए, जिससे उन्हें प्रति एकड़ करीब 20 हजार रुपये का मुआवजा मिल सके.
गन्ना मूल्य, चीनी की बिक्री कीमत, मिलों में गन्ने की तुलाई और शुगर रिकवरी जैसे मुद्दों पर विचार करने के लिए केंद्र सरकार ने हाल ही में एक समिति गठित की है. हालांकि राजू शेट्टी ने इस समिति को किसानों को टालने की कोशिश करार दिया.
उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में किसानों की समस्याओं का समाधान चाहती है तो समिति को दो दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी चाहिए. केवल समिति बनाकर मामला लटकाना किसानों के साथ न्याय नहीं है.
राजू शेट्टी ने आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी देते हुए कहा कि जरूरत पड़ने पर 'कांटा बंद' आंदोलन चलाया जाएगा. उन्होंने कहा कि कार्यकर्ता मिलों के भीतर जाकर भी विरोध करेंगे और यदि जरूरी हुआ तो गन्ना पेराई इकाइयों के पास धरना देकर संचालन रोकेंगे.
उन्होंने यह भी कहा कि जब तक किसानों की मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक चीनी मिलों से तैयार चीनी को बाहर नहीं जाने दिया जाएगा.
राज्य में सूखे जैसी स्थिति के बीच मुख्यमंत्री की ओर से पेराई सीजन आगे नहीं बढ़ाने की अपील पर भी राजू शेट्टी ने सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि किसान पिछले एक महीने से आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन सरकार को सूखे की चिंता अब जाकर क्यों हुई.
शेट्टी का कहना है कि सूखे के बावजूद खेतों में बचा हुआ गन्ना यदि जल्दबाजी में काटा गया तो किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा. ऐसे में नुकसान की जिम्मेदारी कौन लेगा, इसका जवाब सरकार को देना चाहिए.
आंदोलन के दौरान गन्ना ढुलाई करने वाले वाहनों से सड़क सुरक्षा पर पड़ रहे असर का मुद्दा भी उठा. राजू शेट्टी ने कहा कि परिवहन नियमों का पालन सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है. उन्होंने संकेत दिए कि इस विषय पर क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) के अधिकारियों के साथ भी चर्चा की जाएगी.
कृष्णा सहकारी चीनी मिल पर हुए इस प्रदर्शन ने एक बार फिर गन्ने के दाम और चीनी उद्योग की नीतियों को राजनीतिक और किसान विमर्श के केंद्र में ला दिया है. अब किसानों, सरकार और चीनी उद्योग के बीच जारी इस टकराव पर सभी की नजरें टिकी हैं.