गेहूं का कैंसर है यह बीमारी, फूलों की अवस्था में दिखते हैं ये खतरनाक लक्षण

गेहूं का कैंसर है यह बीमारी, फूलों की अवस्था में दिखते हैं ये खतरनाक लक्षण

गेहूं में करनाल बंट रोग को गेहूं का कैंसर कहा जाता है, जिसके लक्षण फूलों की अवस्था में दिखाई देते हैं और दानों के चारों ओर काला पाउडर बन जाता है. यह रोग बीज, मिट्टी और हवा से तेजी से फैलता है. जानें इसके लक्षण, रोकथाम, प्रतिरोधी किस्में, बीज उपचार और रासायनिक नियंत्रण के प्रभावी तरीके. साथ ही गेहूं में खरपतवार और लूज स्मट रोग से बचाव की जानकारी भी पढ़ें.

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क‍िसान तक
  • New Delhi ,
  • Feb 23, 2026,
  • Updated Feb 23, 2026, 2:08 PM IST

गेहूं की फसल के साथ अनेकों खरपतवार उग आते हैं जो पैदावार में गिरावट लाते हैं. इन खरपतवारों में गोयला, चील, प्याजी, मोरवा, गुल्ली डंडा, बथुआ, अकरी, वनबट्टी, कृष्णनील व जंगली जई इत्यादि शामिल. ये खरपतवार पोषक तत्व, नमी और स्थान के लिए प्रतिस्पर्धा कर फसल उत्पादन को काफी कम कर देते हैं. इसलिए अधिक पैदावार पाने के लिए उचित खरपतवार नियंत्रण समय पर करना बहुत ही जरूरी है. 

खरपतवारों के नियंत्रण के लिए फसल पर पेंडीमिथेलीन, सल्फोसल्फूरान, मेट्रीब्यूजिन, 2,4 डी, आइसोप्रोफ्यूरान, क्लोडीनोफॉप, मेटासल्फूरान, मिसोसल्फूरान, आइडोसल्फूरान जैसे खरपतवारनाशी का छिड़काव कर सकते हैं.

खरपतवारों के अलावा, कई कीट और बीमारियां भी गेहूं की फसल को चौपट करते हैं. किसानों को इन कीटों और बीमारियों से भी सावधान रहना चाहिए. गेहूं का सबसे खतरनाक रोग करनाल बंट को माना जाता है. इस रोग को गेहूं का कैंसर कहते हैं जो बीज, मिट्टी और हवा से फैलता है. यह बीमारी क्वारंटाइन के लिए प्रतिबंधित है.

करनाल बंट के लक्षण 

इसके लक्षण सामान्य रूप से फूलों वाली अवस्था पर दिखाई देते हैं और दाने के चारों ओर काला पाउडर दिखाई देता है. इसमें दानों से एक अजीब सी खुशबू आती है. जिसका कारण है ट्राइमिथाइलेमाइन.

करनाल बंट का नियंत्रण

इस रोग से गेहूं को बचाने के लिए करनाल बंट प्रतिरोधी किस्मों का चयन करें, क्योंकि यह रोग बीज, मिट्टी और हवा से फैलती है, और बुवाई के पहले बीज उपचार करें.
फूलों वाली अवस्था पर सिंचाई न करें.

रासायनिक नियंत्रण में बाविस्टिन 1000 ग्राम/हेक्टेयर और प्रोकोनोजोल 500 ग्राम/हेक्टेयर की दर से उपयोग करें. एग्रोसान-जी.एन. (पी.एम.ए.) 2.5 ग्राम/किग्रा की दर से बीज उपचार करें.

लूज स्मट रोग (अनावृत कंडवा)

लूज स्मट रोग लगने पर गेहूं के खेतों में जल्दी निकलने वाली बालियों पर एक काला पाउडर दानों पर बन जाता है. इसके लक्षण तना-पत्तियों पर नहीं दिखाई देते हैं. सामान्य तौर पर बालों के स्थान पर रोगी बालों के अंडाशयों में काला पाउडर नजर आता है, जिन्हें स्पुर कहा जाता है.

नियंत्रण

  • रोग ग्रस्त पौधों को खेत से बाहर निकालकर जमीन में गाड़ दें.
  • सोलर उपचार विधि को अपनाकर बीजों को संकमण रहित बनाया जाता है.
  • गर्म जल उपचार जिसमें 540 डिग्री पर बीजों को 30 मिनट तक रखें.

रासायनिक नियंत्रण

बीज बुवाई के पहले फफूंदनाशक दवा वीटा वेक्स 2.5 ग्राम/किग्रा से बीजोपचार करें.

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