खेती-बाड़ी पर El Nino की बड़ी मार, केंद्र ने किसान संगठनों के साथ बुलाई बड़ी बैठक

खेती-बाड़ी पर El Nino की बड़ी मार, केंद्र ने किसान संगठनों के साथ बुलाई बड़ी बैठक

El nino की तैयारियों को लेकर केंद्र सरकार की बड़ी बैठक. केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसान संगठनों की बैठक बुलाई. देश भर के किसान संगठन कृषि मंत्री से मिलेंगे. अल नीनो की तैयारी और किसानों के मुद्दे पर अहम बैठक होगी. कंटिंजेंसी प्लान पर भी चर्चा होगी. अल नीनो के प्रभाव और उससे पैदा हो रही कृषि परिस्थितियों पर सरकार की लगातार नजर है.

Shivraj Singh ChouhanShivraj Singh Chouhan
क‍िसान तक
  • New Delhi,
  • Jul 13, 2026,
  • Updated Jul 13, 2026, 12:11 PM IST

देश में अल नीनो (El nino) की समस्या गंभीर होती जा रही है. बारिश की घोर कमी होने से खेतों में सिंचाई की समस्या खड़ी हो रही है. धान जैसी फसल जिसे पानी की अधिक जरूरत होती है, उसकी खेती पिछड़ रही है. सोयाबीन और कपास का भी बुरा हाल है. मध्य भारत जिसे खेती का केंद्र कहा जाता है, वहां मॉनसूनी बारिश बहुत पिछड़ गई है जिससे कई फसलों की या तो बुवाई नहीं हो पा रही है. या बहुत पीछे चल रही है. इस बीच, केंद्र सरकार ने अल नीनो की गंभीरता को देखते हुए किसान संगठनों के साथ बड़ी बैठक बुलाई है जिसकी अध्यक्षता कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान करेंगे.

इस बैठक में देश भर के किसान संगठन शामिल होंगे और कृषि मंत्री से मुलाकात करेंगे. यह बैठक अल नीनो की तैयारी और किसानों के मुद्दे पर अहम मानी जा रही है. कृषि मंत्री के साथ किसान संगठनों की होने वाली इस मीटिंग में अल नीनो के कंटींजेंसी (इमरजेंसी) प्लान पर भी चर्चा होगी.

अल नीनो पर सरकार की नजर

अल नीनो के प्रभाव और उससे पैदा हो रही कृषि परिस्थितियों पर सरकार की लगातार नजर है. कृषि मंत्रालय का कहना है कि हर मंगलवार परिस्थिति की समीक्षा की जा रही है. जून में 33% कम बारिश हुई थी, लेकिन जुलाई में स्थिति में कुछ सुधार आया है. जुलाई में अब तक हुई बारिश के चलते बारिश की कमी 24% रह गई है. यानी पिछले 3-4 दिनों में कई राज्यों में अच्छी बारिश हुई है, जिससे हालात बेहतर हुए हैं.

कृषि मंत्रालय के मुताबिक, जून तक पहले 262 जिले कम बारिश की श्रेणी में थे, जो अब घटकर 178 जिले रह गए हैं. सरकार का कहना है कि इन जिलों पर उसकी विशेष नजर बनी हुई है. ये जिले मुख्य रूप से महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, बिहार, झारखंड, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, पंजाब, पश्चिम बंगाल और ओडिशा सहित अन्य राज्यों में हैं. कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का कहना है कि जुलाई की अच्छी बारिश से बुवाई की संभावनाएं बढ़ी हैं और अब इसमें तेजी आने की उम्मीद है.

देश में मॉनसून की पिछड़ी चाल

इस साल केरल में मॉनसून की शुरुआत 4 जून को हुई, जिससे देश में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून सीजन (जून-सितंबर) की शुरुआत हुई. आम तौर पर, राज्य में मॉनसून का आगमन 1 जून को होता है.

जुलाई में अब तक भारत में सामान्य से कहीं ज़्यादा बारिश हुई है; महीने के पहले नौ दिनों में सामान्य बारिश 73.8 mm होती है, जबकि पूरे देश में 101.9 mm बारिश दर्ज की गई है. ध्यान दें कि 30 जून को अपने मंथली पूर्वानुमान में, IMD ने महीने के पहले सात से 10 दिनों में पूरे देश में बारिश का अनुमान लगाया था. हालांकि, उसने यह भी कहा कि जुलाई सामान्य से कम बारिश वाला महीना होगा और पूरे देश में बारिश 'लॉन्ग-पीरियड एवरेज' (LPA) का 94 प्रतिशत रहने की उम्मीद है.

IMD ने अगले 6-7 दिनों में उत्तर-पश्चिम, पश्चिम-मध्य और दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में कम बारिश का अनुमान भी लगाया है. कम बारिश का अनुमान ऐसे समय में सामने आया है जब धान, सोयाबीन और कपास जैसी फसलों की बुवाई अपने चरम पर है. कम बारिश की असली वजह अल नीनो को बताया जा रहा है.

भारत मौसम विज्ञान विभाग के जिलेवार बारिश के आंकड़ों के अनुसार, इस सीजन में अब तक उत्तर प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून सामान्य से कम रहा है. राज्य में 1 जून से 12 जुलाई के बीच कुल 158.8 मिमी बारिश दर्ज की गई, जबकि सामान्य बारिश 190.9 मिमी होनी चाहिए थी. इस तरह बारिश में 17 प्रतिशत की कमी रही. राजस्थान में पूरे राज्य में मौसम सूखा बना रहा. ये ऐसे राज्य हैं जहां खरीफ में कई फसलों की खेती बहुत मायने रखती है.

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