कचरे का पहाड़ बना काल, पुणे हादसे में 9 कर्मचारियों की मौत, 83 घंटे बाद खत्म हुआ रेस्क्यू

कचरे का पहाड़ बना काल, पुणे हादसे में 9 कर्मचारियों की मौत, 83 घंटे बाद खत्म हुआ रेस्क्यू

पुणे के मोशी में हुए दर्दनाक कचरा हादसे में 83 घंटे बाद रेस्क्यू ऑपरेशन खत्म हुआ. मलबे के नीचे दबे आखिरी कर्मचारी का शव मिलने के बाद मृतकों की संख्या 9 हो गई. वेस्ट-टू-एनर्जी प्रोजेक्ट में हुए इस हादसे के बाद कंपनी के मुआवजे और ठेकेदार पर कार्रवाई को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं.

पुणे के मोशी हादसे का दर्दनाक अंतपुणे के मोशी हादसे का दर्दनाक अंत
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Jul 12, 2026,
  • Updated Jul 12, 2026, 4:18 PM IST

महाराष्ट्र के पुणे जिले के मोशी इलाके में हुए दर्दनाक हादसे का रेस्क्यू ऑपरेशन आखिरकार 83 घंटे बाद समाप्त हो गया. रविवार तड़के करीब एक बजे मलबे के नीचे दबे आखिरी लापता कर्मचारी वामन कसबे का शव बरामद किया गया. इसके साथ ही इस हादसे में जान गंवाने वाले कर्मचारियों की संख्या बढ़कर नौ हो गई. पिछले चार दिनों से सेना, एनडीआरएफ, दमकल विभाग, पुलिस और पिंपरी-चिंचवड़ महानगरपालिका की टीमें लगातार राहत और बचाव कार्य में जुटी थीं. आखिरी शव मिलने के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन समाप्त कर दिया गया.

कैसे हुआ यह दर्दनाक हादसा?

यह हादसा 8 जुलाई को मोशी स्थित वेस्ट-टू-एनर्जी प्रोजेक्ट में हुआ था. यहां प्रशासनिक इमारत के ऊपर अचानक कचरे का एक विशाल पहाड़ टूटकर गिर गया. उस समय इमारत के अंदर कुल 23 कर्मचारी काम कर रहे थे. हादसे के बाद पांच कर्मचारी किसी तरह अपनी जान बचाकर बाहर निकलने में सफल रहे. वहीं, राहत टीमों ने नौ कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया, लेकिन नौ कर्मचारियों की जान नहीं बचाई जा सकी. देखते ही देखते एक सामान्य कार्यस्थल मातम में बदल गया.

चार दिनों तक चलता रहा राहत और बचाव अभियान

हादसे के बाद लगातार चार दिनों तक बचाव अभियान चलाया गया. सेना, एनडीआरएफ, दमकल विभाग, पुलिस और नगर निगम की टीमें दिन-रात मलबे के बीच फंसे लोगों की तलाश करती रहीं. हर पल उम्मीद थी कि शायद कोई कर्मचारी जीवित मिल जाए, लेकिन समय बीतने के साथ उम्मीदें कम होती गईं और मलबे से केवल शव ही बरामद होते रहे.

जहरीली गैस और मलबे ने बढ़ाई मुश्किलें

रेस्क्यू टीमों के सामने कई बड़ी चुनौतियां थीं. हादसे वाली जगह पर जहरीली गैस फैल रही थी. कचरे का ढेर लगातार खिसक रहा था. टूटे हुए कंक्रीट के बीम और भारी पिलर भी राहत कार्य में बाधा बन रहे थे. इन कठिन परिस्थितियों के बावजूद बचाव दल बिना रुके काम करता रहा. शनिवार को इमारत के एक हिस्से को तोड़कर अंदर जाने का रास्ता बनाया गया. इसके बाद एक-एक कर सात शव निकाले गए. रविवार सुबह आखिरी लापता कर्मचारी का शव मिलने के बाद राहत अभियान समाप्त कर दिया गया.

नौ परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़

इस हादसे ने नौ परिवारों से उनके अपने छीन लिए. किसी ने अपना बेटा खोया, किसी ने पति तो किसी ने पिता. जिन परिवारों के सदस्य हर रोज काम पर जाते थे, अब वे कभी घर वापस नहीं लौटेंगे. हादसे के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है और पीड़ित परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है.

इस हादसे में जान गंवाने वाले कर्मचारियों के नाम भावेश वाणी, अक्षय सावंत, सुनील कोरके, सन्नी माने, महेश कुंभार, नागेश गायकवाड, रणजीत पाटील, राहुल गायकवाड और वामन कसबे हैं.

कंपनी ने मुआवजे का किया ऐलान

हादसे के बाद संबंधित कंपनी ने मृतक कर्मचारियों के परिवारों के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा की है. कंपनी ने प्रत्येक परिवार को 25-25 लाख रुपये देने, परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने और बच्चों की पढ़ाई का पूरा खर्च उठाने का वादा किया है. हालांकि, कई लोगों का कहना है कि किसी अपने की जान की भरपाई केवल मुआवजे से नहीं हो सकती.

ठेकेदार पर उठ रहे हैं सवाल

हादसे के बाद अब सबसे बड़ा सवाल जिम्मेदारी को लेकर उठ रहा है. लोगों की मांग है कि इस घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए. चर्चा है कि संबंधित ठेकेदार एंटोनी के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जा सकता है. वहीं, यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या प्रशासन इस मामले में निष्पक्ष कार्रवाई करेगा.

इसी बीच एक और जानकारी सामने आई है. कंपनी ने स्वीकार किया है कि मृतकों के परिवारों को दिए जाने वाले 25 लाख रुपये कंपनी की ओर से अलग से नहीं दिए जा रहे हैं, बल्कि यह कर्मचारियों के ग्रुप इंश्योरेंस की राशि है. इस खुलासे के बाद पूरे मामले को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं.

जांच पर टिकी सबकी नजर

अब सभी की नजर प्रशासन की जांच पर है. यह पता लगाया जाएगा कि हादसा किन कारणों से हुआ, सुरक्षा व्यवस्था में कहीं लापरवाही तो नहीं हुई और यदि किसी की गलती सामने आती है तो उसके खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी. पीड़ित परिवारों और आम लोगों की मांग है कि दोषियों को सख्त सजा मिले ताकि भविष्य में इस तरह की दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो.

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