
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में डायबिटीज तेजी से लोगों की खानपान और दिनचर्या दोनों को बदल रही है. कभी सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित मानी जाने वाली यह बीमारी अब युवाओं और बच्चों तक पहुंच चुकी है. ऐसे में हर खाने की चीज को लेकर एक सवाल जरूर उठता है कि क्या ये ब्लड शुगर बढ़ाएगा? और जब बात चावल की आती है, तो ज्यादातर लोग इसे डायबिटीज का दुश्मन मान लेते हैं. लेकिन दिलचस्प बात यह है कि हर चावल एक जैसा नहीं होता क्योंकि देश की मिट्टी में आज भी कई ऐसी पारंपरिक चावल की किस्में उगाई जाती हैं, जिनका ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) काफी कम माना जाता है. यानी ये चावल शरीर में शुगर को धीरे-धीरे रिलीज करते हैं और ब्लड शुगर को अचानक बढ़ने नहीं देते. हालांकि, खुशबू, स्वाद और सेहत का यह अनोखा मेल डायबिटीज मरीजों के लिए बेहतर विकल्प साबित हो सकते हैं. लेकिन कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, इन चावलों को अपने आहार में शामिल करने से पहले डायबिटीज मरीजों को अपने निजी डॉक्टर से सलाह अवश्य लेनी चाहिए.
आप जो चावल, रोटी या दूसरी कार्बोहाइड्रेट वाली चीजें खाते हैं, वे आपके शरीर में जाकर कितनी तेजी से शुगर बढ़ाती हैं, इसी को मापने का तरीका है ग्लाइसेमिक इंडेक्स यानी GI. दरअसल, GI एक तरह का 'स्पीड मीटर' है, जो बताता है कि कोई भोजन आपके ब्लड शुगर को कितनी तेजी से बढ़ाएगा.
GI की रेटिंग 0 से 100 के बीच होती है. अगर किसी खाने का GI 55 या उससे कम है, तो उसे Low GI माना जाता है. ऐसी खाने वाली चीजें जो धीरे-धीरे पचते हैं और शरीर में शुगर को अचानक बढ़ने नहीं देते. जैसे चावल की कुछ खास किस्में, दाल और ओट्स. वहीं, 56 से 69 के बीच वाले चीजें मध्यम GI में आते हैं, जबकि 70 या उससे ज्यादा GI वाले खाने वाली चीजें ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ा सकते हैं. इसमें ज्यादा पॉलिश किया हुआ सफेद चावल और सफेद ब्रेड शामिल हैं.
1. मणिपुरी काला चावल: मणिपुरी काला चावल को सिर्फ उसके गहरे काले रंग और शाही स्वाद के लिए ही नहीं, बल्कि सेहत के लिए भी बेहद खास माना जाता है. खासकर डायबिटीज के मरीजों के बीच यह चावल तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. इसकी सबसे बड़ी वजह है इसका कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI), मणिपुरी ब्लैक राइस का GI लगभग 35 से 42 के बीच होता है, जो इसे कम GI कैटेगरी में रखता है. बता दें कि ये चावल शरीर में शुगर को धीरे-धीरे रिलीज करता है और ब्लड शुगर अचानक बढ़ने नहीं देता. यही कारण है कि इसे सामान्य सफेद चावल की तुलना में ज्यादा हेल्दी विकल्प माना जाता है. इतना ही नहीं यह चावल एंटीऑक्सीडेंट, फाइबर और कई पोषक तत्वों से भरपूर होता है. इसलिए इसे कई लोग 'सुपरफूड राइस' भी कहते हैं.
2. काला नमक चावल: ये चावल अपनी खास खुशबू और स्वाद के लिए दुनियाभर में मशहूर है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि यह सेहत के लिहाज से भी बेहद खास माना जाता है. खासकर डायबिटीज के मरीजों के लिए यह चावल एक बेहतर विकल्प है. काला नमक चावल का ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) आमतौर पर लगभग 49 से 52 के बीच माना जाता है, यानी यह कम GI वाली कैटेगरी में आता है. ये चावल शरीर में शुगर को धीरे-धीरे बढ़ाता है. यही वजह है कि सामान्य पॉलिश्ड सफेद चावल की तुलना में इसे ज्यादा हेल्दी माना जाता है. पूर्वांचल की मिट्टी में उगने वाला यह पारंपरिक चावल सिर्फ अपनी सुगंध ही नहीं, बल्कि पोषण और स्वास्थ्य लाभ के कारण भी लोगों का पसंदीदा बनता जा रहा है.
3. अजरा घानसाल चावल: महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले के अजरा तालुका में उगाया जाने वाला ये एक अत्यंत सुगंधित और औषधीय, गुणों से भरपूर चावल है, जिसे अब सिर्फ स्वाद ही नहीं बल्कि सेहत के लिए भी खास माना जा रहा है. ये किस्म डायबिटीज और हेल्दी डाइट को लेकर जागरूक लोगों के बीच काफी फेमस हो रही है. अजरा घनसाल चावल का ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) लगभग 50 से 55 के बीच होता है. ऐसे में ये चावल कम GI कैटेगरी के में आता है. ये अजरा घनसाल किस्म सामान्य सफेद चावल की तुलना में ज्यादा बेहतर है. पहाड़ियों और प्राकृतिक वातावरण में उगने वाला यह पारंपरिक चावल अपनी खास खुशबू, मुलायम बनावट और पोषण गुणों के लिए जाना जाता है. स्वाद और सेहत का शानदार मेल इसे लोगों की थाली में एक खास जगह दिला रहा है.
4. कालो नूनिया चावल: ये चावल पूर्वी भारत की एक बेहद खास पारंपरिक चावल की किस्म मानी जाती है. अपनी अनोखी खुशबू, हल्के स्वाद और पौष्टिक गुणों के कारण यह चावल अब हेल्दी डाइट पसंद करने वालों के बीच भी तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. खासकर डायबिटीज के मरीजों के लिए इसे बेहतर विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है. माना जाता है कि कालो नुनिया चावल का ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) लगभग 45 से 50 के बीच होता है, यानी यह कम GI कैटेगरी का होता है. यही वजह है कि इसे सामान्य सफेद चावल की तुलना में ज्यादा संतुलित और हेल्दी माना जाता है. पारंपरिक खेती और प्राकृतिक तरीकों से उगाया जाने वाला यह चावल सिर्फ स्वाद ही नहीं, बल्कि पोषण के लिए भी खास पहचान बना रहा है.
5. तुलसी भोग चावल: ये किस्म अपनी मनमोहक खुशबू और स्वाद के लिए खास पहचान रखता है. पारंपरिक तरीके से उगाई जाने वाली यह चावल की किस्म अब सिर्फ स्वाद तक सीमित नहीं रही, बल्कि हेल्दी खानपान पसंद करने वालों के बीच भी तेजी से लोकप्रिय हो रही है. तुलसी भोग राइस का Glycemic Index (GI) लगभग 50 से 55 के बीच होता है. ऐसे में खुशबू, स्वाद और संतुलित पोषण का मेल तुलसी भोग राइस को खास बनाता है. पारंपरिक भारतीय थाली में इसकी अलग पहचान रही है और अब हेल्दी डाइट की दुनिया में भी यह अपनी मजबूत जगह बना रहा है.