
केंद्र सरकार ने किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ दिलाने के मुद्दे पर सख्त रुख अपनाया है. केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने साफ कर दिया है कि किसी भी हाल में किसान अपनी उपज MSP से नीचे बेचने को मजबूर नहीं होना चाहिए. इसी दिशा में कृषि भवन में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में उन्होंने राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (NAFED) और राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता महासंघ (NCCF) को लक्ष्य आधारित और तेज खरीद सुनिश्चित करने के निर्देश दिए.
बैठक में मंत्री ने स्पष्ट किया कि उपार्जन को केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं बल्कि किसानों को उचित मूल्य दिलाने के मिशन के रूप में देखा जाए. उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी कि जहां बाजार भाव MSP से नीचे हैं और खरीद धीमी है, वहां यह स्थिति स्वीकार्य नहीं होगी. जिला स्तर तक लक्ष्य तय करने, संभावित आवक और खरीद क्षमता का आकलन करने तथा जमीनी स्तर पर निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए.
सरकार ने चना, मसूर, उड़द और सरसों जैसी फसलों पर विशेष ध्यान देने का फैसला किया है. मंत्री ने कहा कि जिन क्षेत्रों में किसानों को कम कीमत मिल रही है, वहां तुरंत प्रभाव से खरीद बढ़ाई जाए. साथ ही उपार्जन केंद्रों की संख्या, क्षमता और स्थानीय बाधाओं की रोजाना समीक्षा करने के निर्देश भी दिए गए.
किसानों को भुगतान में देरी को गंभीर मुद्दा मानते हुए शिवराज सिंह चौहान ने सख्ती दिखाई. उन्होंने निर्देश दिया कि खरीद के बाद अधिकतम 72 घंटे के भीतर भुगतान सुनिश्चित किया जाए. इसके लिए एक स्पष्ट और सख्त SOP तैयार करने तथा राज्यों के साथ समन्वय कर इसे लागू करने को कहा गया.
समीक्षा बैठक में विभिन्न राज्यों से जुड़ी समस्याएं भी सामने आईं, जिनमें भुगतान में देरी, DBT व्यवस्था की कमी और डेटा लंबित रहने जैसी दिक्कतें शामिल रहीं. मंत्री ने भरोसा दिलाया कि अगर राज्य स्तर की प्रक्रियाएं या प्रशासनिक बाधाएं खरीद में रुकावट बनती हैं तो केंद्र सरकार सीधे हस्तक्षेप कर समाधान सुनिश्चित करेगी.
मंत्री ने कहा कि दलहन-तिलहन उत्पादन बढ़ाने का लक्ष्य तभी सफल होगा, जब किसानों को MSP पर खरीद का भरोसा होगा. उन्होंने एजेंसियों को निर्देश दिया कि वे समस्याओं की सूची बनाकर समाधान के साथ प्रस्तुत करें और मौजूदा सीजन में खरीद प्रदर्शन में स्पष्ट सुधार दिखाएं.