
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के आदेश के बाद उत्तर प्रदेश की राज्यपाल और कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने बड़ा फैसला लिया है. राज्यपाल ने डॉ. ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह की नियुक्ति रद्द करने वाले पुराने आदेश को वापस ले लिया है और उन्हें तत्काल प्रभाव से आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कुमारगंज अयोध्या के कुलपति का कार्यभार संभालने का निर्देश दिया है. इससे पहले हाईकोर्ट ने कुलाधिपति द्वारा फरवरी और मार्च 2026 में जारी किए गए उन आदेशों को पूरी तरह अवैध और मनमाना बताते हुए रद्द कर दिया था, जिसके तहत डॉ. सिंह की नियुक्ति को निरस्त किया गया था.
दरअसल, डॉ. ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह की नियुक्ति 10 फरवरी 2026 को हुई थी. उस समय वे भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के NBPGR निदेशक पद पर थे, इसलिए कागजी कार्रवाई और वहां सेकार्यमुक्त होने में थोड़ा समय लग रहा था. उन्होंने जॉइन करने के लिए 31 मार्च तक का समय मांगा था, लेकिन उन्हें सिर्फ 1 मार्च तक का समय दिया गया और तय समय पर न आने के कारण 3 मार्च को उनकी नियुक्ति रद्द कर दी गई.
इसके खिलाफ डॉ. सिंह हाईकोर्ट पहुंचे. कोर्ट ने पाया कि नियुक्ति पत्र में जॉइनिंग की कोई आखिरी तारीख नहीं लिखी थी और पहले भी अन्य कुलपतियों को कई महीनों का समय दिया गया था. कोर्ट ने डॉ. सिंह की मांग को सही माना और उनकी नियुक्ति बहाल करने का आदेश दिया.
डॉ. ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह का पढ़ाई और करियर का सफर बहुत प्रेरणादायक रहा है. 17 मार्च 1964 को वाराणसी में जन्मे डॉ. सिंह ने सेंट्रल हिंदू स्कूल से शुरुआती पढ़ाई की. इसके बाद उन्होंने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन और पोस्ट-ग्रेजुएशन की डिग्री ली और 1992 में अपनी PhD पूरी की. वे देश के एक नामी कृषि वैज्ञानिक हैं, जिन्हें साल 2025 में राष्ट्रपति द्वारा देश के प्रतिष्ठित 'विज्ञान श्री' (नेशनल साइंस अवॉर्ड) से सम्मानित किया जा चुका है.
वे करनाल के मशहूर ICAR-IIWBR के डायरेक्टर और दिल्ली के NBPGR के हेड जैसे बड़े पदों पर रहकर भारतीय कृषि को दुनिया भर में पहचान दिला चुके हैं. उन्हें डॉ. रफी अहमद किदवई अवॉर्ड और डॉ. ए.बी. जोशी मेमोरियल अवॉर्ड जैसे दर्जनों बड़े सम्मान भी मिल चुके हैं.
डॉ. सिंह की रिसर्च मुख्य रूप से गेहूं की फसलों को सुधारने, प्लांट जेनेटिक रिसोर्स मैनेजमेंट और क्लाइमेट चेंज के हिसाब से खेती को ढालने पर रही है. उन्होंने गेहूं की ऐसी किस्में तैयार करने में मदद की है जो तेज गर्मी और सूखे में भी अच्छी फसल दे सकती हैं. उनकी इस रिसर्च से देश की फूड सिक्योरिटी (खाद्य सुरक्षा) बहुत मजबूत हुई है.
कृषि जानकारों का मानना है कि राज्यपाल के नए आदेश के बाद उनकी यूनिवर्सिटी में वापसी अयोध्या और पूरे उत्तर प्रदेश के कृषि क्षेत्र के लिए एक "बदलाव लाने वाला मास्टरस्ट्रोक" साबित होगी. उनकी गहरी समझ से अयोध्या की इस यूनिवर्सिटी में रिसर्च का स्तर इंटरनेशनल स्टैंडर्ड तक पहुंच जाएगा.