दिल्ली के गोयला डेयरी इलाके में 16 करोड़ का बायोगैस प्लांट शुरू, रोजाना 200 टन गोबर से बनेगी गैस और जैविक खाद

दिल्ली के गोयला डेयरी इलाके में 16 करोड़ का बायोगैस प्लांट शुरू, रोजाना 200 टन गोबर से बनेगी गैस और जैविक खाद

दिल्ली के गोयला डेयरी इलाके में 16 करोड़ रुपये की लागत से बायोगैस प्लांट शुरू किया गया है. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इसका उद्घाटन किया. प्लांट में रोजाना 200 टन गोबर का प्रसंस्करण कर 5.6 टन कंप्रेस्ड बायोगैस और जैविक खाद तैयार की जाएगी. इससे डेयरी कचरे को नालों में जाने से रोकने और यमुना प्रदूषण कम करने में मदद मिलेगी.

Biogas Plant Goyla Dairy Delhi Biogas Plant Goyla Dairy Delhi
क‍िसान तक
  • New Delhi,
  • Oct 20, 2026,
  • Updated Oct 20, 2026, 3:14 PM IST

दिल्ली के गोयला डेयरी इलाके में पशुओं के गोबर के निस्तारण और यमुना में प्रदूषण की समस्या को कम करने के लिए 16 करोड़ रुपये की लागत से बायोगैस प्लांट शुरू किया गया है. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोमवार को इस प्‍लांट का उद्घाटन किया. इस प्लांट में रोजाना 200 मीट्रिक टन गोबर को प्रोसेस करने की क्षमता है. इससे स्वच्छ ईंधन और जैविक खाद तैयार की जाएगी, जबकि डेयरी से निकलने वाले कचरे को नालों में जाने से रोकने में मदद मिलेगी.

रोजाना 5.6 टन कंप्रेस्ड बायोगैस का उत्पादन

एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, प्लांट से प्रतिदिन करीब 14,000 घन मीटर कच्ची बायोगैस और 5.6 टन शुद्धीकृत कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) का उत्पादन होने की उम्मीद है. तैयार गैस को पाइपलाइन के जरिए इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (आईजीएल) को उपलब्ध कराया जाएगा. गोबर की प्रोसेसिंग के बाद बचने वाली स्लरी का इस्तेमाल जैविक खाद बनाने में किया जाएगा.

गोबर से नालों और यमुना में प्रदूषण रोकने की तैयारी

गोयला डेयरी इलाके में हर दिन करीब 200 मीट्रिक टन गोबर निकलता है. उचित निस्तारण की व्यवस्था नहीं होने के कारण पशुओं का अपशिष्ट नालों में पहुंचता है और आगे चलकर यमुना को प्रदूषित करता है. नए प्लांट के जरिए गोबर को सीधे उपयोगी संसाधन में बदलने और कचरे के सुरक्षित प्रबंधन की व्यवस्था विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है.

67 पैसे प्रति किलो की दर से खरीदा जाएगा गोबर

परियोजना के तहत संबंधित एजेंसी डेयरी संचालकों से 67 पैसे प्रति किलोग्राम की दर से गोबर एकत्र करेगी. इससे पशुपालकों को गोबर बेचकर अतिरिक्त आमदनी का अवसर मिलेगा और उन्हें इसके निस्तारण पर होने वाली परेशानी से राहत मिल सकती है. दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने इस परियोजना को केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के अर्बन डेवलपमेंट फंड के तहत विकसित किया है.

दिल्ली में तीन बायोगैस प्लांट चालू, छह और पर काम

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि पिछले 18 महीनों में दिल्ली में तीन बायोगैस प्लांट चालू हो चुके हैं, जबकि छह अन्य संयंत्रों पर काम जारी है. उन्होंने नांगली सकरावती प्लांट का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां एक साल में 55,000 टन गोबर का प्रसंस्करण किया गया और इसके लिए किसानों को 3.5 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया.

यमुना की सफाई के लिए कार्रवाई जरूरी

रेखा गुप्ता ने कहा कि यमुना की सफाई के लिए केवल नदी की सफाई करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन स्रोतों पर भी कार्रवाई जरूरी है जिनसे प्रदूषक नदी तक पहुंचते हैं. उन्होंने कहा कि डेयरी क्षेत्रों में पैदा होने वाले कचरे को नालों में बहने देने के बजाय उसकी सही प्रोसेसिंग की जानी चाहिए. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों और प्लांट संचालकों से गोबर के नियमित संग्रह, परिवहन और सुरक्षित निस्तारण की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा.

डेयरी कॉलोनियों में ड्रेनेज सुधार के लिए 50 करोड़ रुपये

मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली की डेयरी कॉलोनियों में नालों के निर्माण और जल निकासी व्यवस्था में सुधार के लिए 50 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं. इन क्षेत्रों में कचरा संग्रहण और जलापूर्ति जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी लंबे समय से बनी हुई है. बायोगैस प्लांट और ड्रेनेज सुधार के प्रयासों से डेयरी क्षेत्रों की स्वच्छता बेहतर करने और अपशिष्ट को उपयोगी संसाधन में बदलने में मदद मिलेगी.

केंद्र की क्लीन यमुना पहल से भी जुड़ी परियोजना

यह परियोजना केंद्र सरकार की कचरे से संपदा तैयार करने की पहल के अनुरूप है. एक आधिकारिक बयान के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में क्लीन यमुना पहल के तहत 1,500 टन डेयरी कचरे के प्रसंस्करण का लक्ष्य रखा था. दिल्ली के कैबिनेट मंत्री आशीष सूद ने कहा कि पहले डेयरियों को आवासीय कॉलोनियों से निर्धारित डेयरी क्षेत्रों में स्थानांतरित किया गया, लेकिन गोबर के वैज्ञानिक निस्तारण और नागरिक सुविधाओं की व्यवस्था पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया.

उद्घाटन कार्यक्रम में ये भी रहे मौजूद

गोयला डेयरी रोड पर स्थित प्लांट के उद्घाटन के दौरान दिल्ली की महापौर प्रवेश वाही, उपमहापौर मोनिका पंत और विधायक संदीप सहरावत भी मौजूद रहे. मुख्यमंत्री ने डेयरी संचालकों से निर्धारित संग्रह व्यवस्था में सहयोग करने की अपील की. परियोजना का उद्देश्य डेयरी क्षेत्रों में स्वच्छता सुधारना, नालों में गोबर का प्रवाह रोकना और अपशिष्ट से स्वच्छ ऊर्जा तथा जैविक खाद का उत्पादन बढ़ाना है.

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