
उत्तर प्रदेश सरकार खेती को बढ़ावा देने और किसानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने के लिए बड़ा कदम उठाने जा रही है. इसके तहत राज्य के 18 कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) को अलग-अलग कृषि क्षेत्रों की जरूरतों के अनुसार सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जाएगा. इस योजना के तहत बिजनौर में जैविक बासमती चावल और बांदा में प्राकृतिक खेती पर विशेष ध्यान दिया जाएगा. सरकार का उद्देश्य स्थानीय मिट्टी और जलवायु के अनुकूल खेती को बढ़ावा देना, किसानों की लागत कम करना और उनकी आमदनी बढ़ाना है.
उत्तर प्रदेश को खेती और जलवायु की परिस्थितियों के आधार पर नौ कृषि जलवायु क्षेत्रों में बांटा गया है. योजना के तहत हर क्षेत्र के दो कृषि विज्ञान केंद्रों को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जाएगा. इन केंद्रों पर स्थानीय जरूरतों के हिसाब से फसलों की उन्नत खेती, वैज्ञानिक अनुसंधान, कौशल विकास और कृषि उत्पादों की प्रोसेसिंग पर जोर दिया जाएगा. किसानों, ग्रामीण युवाओं और महिलाओं को भी यहां प्रशिक्षण दिया जाएगा. इसके साथ ही कृषि उत्पादों की क्वालिटी सुधारने, उनकी प्रोसेसिंग करने और बाजार में बेहतर कीमत दिलाने के लिए काम होगा.
सरकार ने इस योजना के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में 900 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं. इस योजना के तहत कुल 18 कृषि विज्ञान केंद्रों को विकसित करने के लिए 2,636.25 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे. हर केंद्र के लिए 1.01 करोड़ से 2.24 करोड़ रुपये तक की राशि निर्धारित की गई है. शुरुआती चरण में प्रत्येक केंद्र को आधारभूत सुविधाओं के विकास और शुरुआती गतिविधियों के लिए 12.50 लाख रुपये जारी किए गए हैं.
इस योजना में हर जिले और क्षेत्र की खास कृषि गतिविधियों को ध्यान में रखा गया है. बिजनौर में जैविक बासमती चावल की खेती को बढ़ावा दिया जाएगा, जबकि बांदा में प्राकृतिक और शुष्क खेती पर विशेष ध्यान दिया जाएगा. इसके अलावा अलग-अलग कृषि विज्ञान केंद्रों पर फसल उत्पादन, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन से जुड़ी गतिविधियां विकसित की जाएंगी. इनमें आम, मूंगफली, मक्का, सरसों, आलू, दालें, मोटे अनाज, औषधीय पौधे और सब्जियों जैसी फसलों को भी शामिल किया गया है. कुछ केंद्रों पर पशुपालन, मुर्गी पालन, बकरी पालन, मधुमक्खी पालन और मछली पालन से जुड़े कामों को भी बढ़ावा दिया जाएगा.
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के जरिए किसानों को स्थानीय मिट्टी और मौसम के अनुकूल फसलों की जानकारी मिलेगी. वैज्ञानिक तरीकों से खेती करने का प्रशिक्षण मिलने से उन्हें बेहतर उत्पादन हासिल करने में मदद मिल सकती है. इसके साथ ही फसल को कच्चे रूप में बेचने के बजाय उसकी प्रोसेसिंग पर ध्यान दिया जाएगा. इससे किसानों को अपने उत्पादों की बेहतर कीमत पाने के अवसर मिल सकते हैं. सरकार की इस योजना का मुख्य उद्देश्य कृषि विज्ञान केंद्रों को खेती, प्रशिक्षण, अनुसंधान और कृषि उत्पादों की प्रोसेसिंग के प्रमुख केंद्रों के रूप में विकसित करना है, ताकि किसानों को आधुनिक खेती से जोड़कर उनकी आमदनी बढ़ाने में मदद मिल सके.