इंडोनेशिया में सूखे ने बढ़ाई चिंता: भारत में महंगा हो सकता है खाने का तेल, पाम ऑयल सप्लाई पर संकट के संकेत

इंडोनेशिया में सूखे ने बढ़ाई चिंता: भारत में महंगा हो सकता है खाने का तेल, पाम ऑयल सप्लाई पर संकट के संकेत

इंडोनेशिया में अल नीनो से पैदा हुए सूखे के कारण पाम ऑयल उत्पादन और आपूर्ति प्रभावित हो रही है. भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा इंडोनेशिया और मलेशिया से आयात करता है. ऐसे में पाम ऑयल की सप्लाई कमजोर होने पर खाद्य तेलों की कीमतों में तेजी बनी रह सकती है.

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क‍िसान तक
  • नई दिल्ली,
  • Oct 19, 2026,
  • Updated Oct 19, 2026, 5:20 PM IST

भारत में खाने के तेल की कीमतों में जल्द राहत मिलने की उम्मीद कम दिखाई दे रही है. घरेलू मांग में लगातार बढ़ोतरी और वैश्विक सप्लाई से जुड़े जोखिमों के कारण खाद्य तेलों के दाम ऊंचे बने रह सकते हैं. खास तौर पर पाम ऑयल को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं, क्योंकि दुनिया के सबसे बड़े उत्पादक देशों में शामिल इंडोनेशिया में अल नीनो के असर से उत्पादन और आपूर्ति पर दबाव दिखाई देने लगा है.

भारत अपनी खाद्य तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है. पाम ऑयल न सिर्फ सीधे खाने के तेल के रूप में इस्तेमाल होता है, बल्कि कई तरह के वनस्पति तेलों और खाद्य उत्पादों में इसकी ब्लेंडिंग भी की जाती है. ऐसे में पाम ऑयल की उपलब्धता कम होने पर बाकी खाद्य तेलों की कीमतों पर भी दबाव बढ़ सकता है.

इंडोनेशिया ने बढ़ाई भारत की टेंशन

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, इंडोनेशिया में 'सुपर अल नीनो' से पैदा हुए सूखे ने पाम ऑयल उद्योग को प्रभावित करना शुरू कर दिया है. पश्चिम कालीमंतन की जीवनरेखा मानी जाने वाली कपुआस नदी का जलस्तर काफी नीचे चला गया है. यह नदी क्षेत्र के करीब 40 प्रतिशत पाम ऑयल उत्पादन की ढुलाई का प्रमुख माध्यम है. नदी में पानी कम होने से परिवहन व्यवस्था बाधित हुई है और सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ गया है.

स्थिति का असर पाम ऑयल मिलों पर भी दिख रहा है. तैयार उत्पाद की शिपमेंट प्रभावित होने के कारण कई मिलों ने प्रोसेसिंग के लिए ताजे पाम फलों की खरीद कम कर दी है. इंडोनेशियाई पाम ऑयल एसोसिएशन (GAPKI) के मुताबिक सितंबर महीने में पश्चिम कालीमंतन की पाम ऑयल आपूर्ति अगस्त की तुलना में करीब 11 प्रतिशत घट गई. वहीं एक स्थानीय मिल की ताजे पाम फलों की खरीद जुलाई के मुकाबले घटकर लगभग एक-तिहाई रह गई.

उद्योग के जानकारों का मानना है कि यदि सूखे की स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो आने वाले महीनों में इंडोनेशिया के पाम ऑयल उत्पादन और निर्यात पर और अधिक असर पड़ सकता है. इसका असर भारत जैसे बड़े आयातक देशों पर भी पड़ने की आशंका है.

भारत में खाद्य तेलों का आयात बढ़ा

हालांकि फिलहाल भारत का खाद्य तेल आयात बढ़ा है. सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) के आंकड़ों के अनुसार, ऑयल ईयर 2025-26 (नवंबर से सितंबर) के पहले 11 महीनों में देश ने 151.64 लाख टन खाद्य तेल का आयात किया, जबकि पिछले ऑयल ईयर की समान अवधि में यह 146.83 लाख टन था. इस तरह कुल आयात में 3.27 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई.

इसी अवधि में कुल पाम ऑयल आयात, जिसमें कच्चा पाम तेल (CPO) और आरबीडी पामोलीन शामिल है, 69.80 लाख टन से बढ़कर 73.52 लाख टन पहुंच गया. यह 5.32 प्रतिशत की बढ़ोतरी को दर्शाता है.

भारत को खाद्य तेलों की आपूर्ति करने वाले प्रमुख देशों में अर्जेंटीना सबसे आगे रहा. अर्जेंटीना ने 34.43 लाख टन खाद्य तेल का निर्यात किया, जिसमें 27.14 लाख टन कच्चा सोयाबीन तेल और 7.29 लाख टन सूरजमुखी तेल शामिल था. रूस ने 12.89 लाख टन खाद्य तेल भारत भेजा, जिसमें अधिकांश हिस्सा कच्चे सूरजमुखी तेल का था.

खाद्य तेल निर्यात में मलेशिया टॉप

पाम ऑयल की बात करें तो मलेशिया ने भारत को 29.76 लाख टन पाम तेल की आपूर्ति की. वहीं इंडोनेशिया से 29.05 लाख टन पाम तेल का आयात किया गया. इस आंकड़े से साफ है कि भारत की खाद्य तेल सुरक्षा काफी हद तक दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों की सप्लाई पर निर्भर है.

ऐसे में इंडोनेशिया में सूखे और उत्पादन संबंधी चुनौतियों पर भारतीय बाजार की नजर बनी हुई है. यदि आने वाले महीनों में पाम ऑयल की वैश्विक आपूर्ति प्रभावित होती है तो भारत में खाद्य तेलों की कीमतों में नरमी आने के बजाय और तेजी देखने को मिल सकती है.

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