
भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौता (FTA) 20 अक्टूबर 2026 से लागू हो रहा है. FTA के तहत न्यूजीलैंड से आयात होने वाले सेब, कीवी फल, एल्ब्यूमिन और मनुका शहद के आयात पर शुल्क दरें, सालाना कोटा और जरूरी शर्तें लागू होंगी, ताकि घरेलू उत्पादकों पर इसका असर सीमित किया जा सके. भारत सरकार के विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने शनिवार को नोटिस जारी कर इसकी प्रक्रिया साफ की है. समझौते के पहले साल में सेब और कीवी का रियायती कोटा शून्य रहेगा, जबकि एल्ब्यूमिन और मनुका शहद के लिए आयात कोटा उपलब्ध होगा.
समझौते के तहत पहले साल की अवधि 20 अक्टूबर से 31 दिसंबर 2026 तक होगी. इस दौरान सेब और कीवी फल के लिए आयात कोटा शून्य रखा गया है. इन दोनों उत्पादों के लिए रियायती कोटा 1 जनवरी 2027 से शुरू होगा. इसके बाद हर साल निर्धारित मात्रा के भीतर आयात पर संबंधित शुल्क दरें लागू होंगी.
DGFT के मुताबिक, न्यूजीलैंड से आने वाले सेब पर निर्धारित कोटे के भीतर 25% आयात शुल्क लगेगा. इसके लिए CIF कीमत कम से कम 1.25 अमेरिकी डॉलर प्रति किलो होनी चाहिए. CIF कीमत में माल की कीमत, बीमा और ढुलाई का खर्च शामिल होता है.
सेब का कोटा 2027 में 35,000 मीट्रिक टन होगा. 2028 में यह बढ़कर 37,500 मीट्रिक टन, 2029 में 40,000 मीट्रिक टन और 2030 में 42,500 मीट्रिक टन हो जाएगा. 2031 से सालाना कोटा 45,000 मीट्रिक टन रहेगा. सेब का आयात हर साल 1 अप्रैल से 31 अगस्त के बीच ही इस कोटे के तहत किया जा सकेगा.
न्यूजीलैंड से आयात होने वाले कीवी फल पर निर्धारित कोटे के भीतर शून्य आयात शुल्क लगेगा. इसके लिए CIF कीमत कम से कम 1.80 अमेरिकी डॉलर प्रति किलो होनी चाहिए.
कीवी का कोटा 2027 में 8,000 मीट्रिक टन रहेगा. 2028 में यह 9,750 मीट्रिक टन, 2029 में 11,500 मीट्रिक टन और 2030 में 13,250 मीट्रिक टन होगा. 2031 से सालाना कोटा 15,000 मीट्रिक टन हो जाएगा. इस कोटे के तहत हर साल 1 अप्रैल से 15 अक्टूबर तक आयात किया जा सकेगा.
न्यूजीलैंड के प्रमाणित मनुका शहद के आयात के लिए 2026 में 40 मीट्रिक टन का कोटा तय किया गया है. 2027 से यह बढ़कर 200 मीट्रिक टन सालाना हो जाएगा. इसके आयात पर न्यूनतम कीमत की शर्त भी लागू होगी. निर्धारित कोटे के तहत CIF कीमत 20 अमेरिकी डॉलर प्रति किलो या उससे अधिक, लेकिन 30 अमेरिकी डॉलर प्रति किलो से कम होनी चाहिए. इस उत्पाद का आयात सालभर किया जा सकेगा.
तय कोटे के तहत आयात करने के लिए भारतीय आयातकों को DGFT से मंजूरी लेनी होगी. न्यूजीलैंड का सक्षम प्राधिकरण निर्यातकों या उत्पादकों को प्रमाणपत्र जारी करेगा, जिसमें उत्पाद, उसकी निर्धारित मात्रा और भारत में आयातक की जानकारी दर्ज होगी. भारतीय आयातक को इसी प्रमाणपत्र के आधार पर DGFT के पोर्टल पर आवेदन करना होगा.
वहीं, DGFT जारी किए गए प्राधिकरणों और इस्तेमाल किए गए कोटे का हिसाब रखेगा. किसी उत्पाद का निर्धारित कोटा पूरा होने के बाद उस साल और मंजूरी जारी नहीं की जाएंगी. मंजूरी उसी कोटा वर्ष के लिए मान्य होगी और संबंधित उत्पाद के लिए तय आयात अवधि का पालन करना जरूरी होगा. इस्तेमाल नहीं की गई मात्रा अगले साल के कोटे में नहीं जुड़ेगी.
बता दें कि भारत और न्यूजीलैंड ने 27 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली में मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए थे. इस पर भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के व्यापार एवं निवेश मंत्री टॉड मैक्ले ने हस्ताक्षर किए थे. इस डील से दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा मिलेगा.