केंद्र सरकार की ओर से इस महीने घोषित कच्चे कपास के आयात पर सीमा शुल्क और कृषि अवसंरचना और विकास उपकर (AIDC) को पूरी तरह माफ करने के फैसले से सबसे बड़ा फायदा अमेरिका को मिलने वाला है. यह आकलन ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) ने अपनी ताजा विश्लेषण रिपोर्ट में किया है. GTRI के अनुसार, भारत-ऑस्ट्रेलिया आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौते (ECTA) के तहत पहले से ही 51,000 मीट्रिक टन कपास बिना शुल्क के आता है. लेकिन, अब सबसे बड़ा लाभार्थी अमेरिका होगा, जो भारत का दूसरा सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है. कपास पर सामान्यत: 11 प्रतिशत आयात शुल्क (5 प्रतिशत सीमा शुल्क और 5 प्रतिशत AIDC) लगता है, जो फरवरी 2021 से लागू है.
सरकार ने अधिसूचना में कहा है कि यह छूट अल्पकालिक कदम है और केवल दिसंबर 2025 तक लागू रहेगी. इसका उद्देश्य भारत के वस्त्र और परिधान निर्यातकों को समर्थन देना और उनकी वैश्विक प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ाना है. GTRI का कहना है कि प्रत्यक्ष शुल्क-मुक्त आयात से भारतीय कंपनियों को उच्च गुणवत्ता वाले रेशे तक तुरंत पहुंच मिलेगी, जिसका उपयोग हाई-एंड गारमेंट बनाने में होता है.
थिंक-टैंक ने यह भी कहा कि त्योहारी सीजन से पहले धागा और कपड़ा निर्यातकों को कच्चे माल की कमी से राहत मिलेगी. वित्त मंत्रालय ने 19 अगस्त को अधिसूचना जारी कर कहा था कि यह छूट कस्टम्स टैरिफ एक्ट, 1975 की धारा 5201 के अंतर्गत आने वाले कपास पर लागू होगी. यह छूट 19 अगस्त 2025 से प्रभावी होकर 30 सितंबर तक थी, लेकिन बाद में इसे 31 दिसंबर 2025 तक बढ़ा दिया गया.
मंत्रालय ने कहा कि यह फैसला सार्वजनिक हित में लिया गया है, ताकि घरेलू निर्माताओं और निर्यातकों के लिए कच्चे माल की लागत कम हो सके. खासकर उस समय जब वस्त्र क्षेत्र कीमतों में अस्थिरता और आपूर्ति दबाव झेल रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, भारत का कपास आयात वित्त वर्ष 2025 में दोगुने से अधिक बढ़कर 1.20 अरब डॉलर हो गया, जो 2024 में 579.2 मिलियन डॉलर था.
प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में ऑस्ट्रेलिया (258.2 मिलियन डॉलर), अमेरिका (234.1 मिलियन डॉलर), ब्राजील (180.8 मिलियन डॉलर) और मिस्र (116.3 मिलियन डॉलर) शामिल रहे. करीब 99 प्रतिशत आयात लॉन्ग स्टेपल कपास (28 मिमी और उससे ऊपर) का होता है, जिसकी भारत में पर्याप्त खेती नहीं होती. इसका मतलब है कि यह छूट स्थानीय किसानों को प्रभावित नहीं करेगी, क्योंकि वे मुख्य रूप से मध्यम और छोटे किस्म के कपास की खेती करते हैं.
हालांकि, इस फैसले को लेकर राजनीतिक विवाद भी सामने आया है. आम आदमी पार्टी के संयोजक और पूर्व दिल्ली मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर अमेरिकी दबाव में भारतीय कपास किसानों से विश्वासघात करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि 11 प्रतिशत शुल्क की वजह से अमेरिकी कपास महंगा पड़ता था और भारतीय किसानों की कपास आसानी से बिक जाती थी. अब शुल्क हटने से अमेरिकी कपास का दबदबा बढ़ेगा और घरेलू किसानों पर असर पड़ेगा. (एएनआई)