
रासायनिक उर्वरकों के बढ़ते और अंधाधुंध उपयोग से खेती और पर्यावरण पर पड़ रहे असर को लेकर भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अंतर्गत केंद्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान (CMFRI) ने व्यापक जागरूकता अभियान चलाया. देशव्यापी ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत किसानों को संतुलित उर्वरक इस्तेमाल और प्राकृतिक खेती को अपनाने का संदेश दिया गया. अभियान का उद्देश्य मिट्टी की सेहत को सुरक्षित रखते हुए टिकाऊ कृषि व्यवस्था को बढ़ावा देना बताया गया.
जागरूकता कार्यक्रम में 200 से ज्यादा किसानों ने भाग लिया. इस दौरान वैज्ञानिकों ने बताया कि रासायनिक उर्वरकों पर अत्यधिक निर्भरता मिट्टी में पोषक तत्वों का संतुलन बिगाड़ रही है और उसकी गुणवत्ता को नुकसान पहुंचा रही है. CMFRI की वरिष्ठ वैज्ञानिक और मृदा विशेषज्ञ कार्तिका के एस ने कहा कि जरूरत से ज्यादा खाद का इस्तेमाल जल और वायु प्रदूषण को बढ़ाता है. उन्होंने कहा कि इससे ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन और पर्यावरणीय क्षरण जैसी चुनौतियां भी बढ़ रही हैं.
अभियान के दौरान CMFRI ने खेती और मत्स्य क्षेत्र से जुड़ी कई स्वदेशी तकनीकों का प्रदर्शन किया. इनमें समुद्री शैवाल आधारित जैव उर्वरक और बायो-स्टिमुलेंट, मछली अपशिष्ट से तैयार जैविक खाद और ब्लैक सोल्जर फ्लाई (BSF) आधारित जैव संसाधन पुनर्चक्रण मॉडल शामिल रहे. संस्थान के निदेशक ग्रिन्सन जॉर्ज ने कहा कि ये तकनीकें मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने, सर्कुलर बायो-इकोनॉमी को बढ़ावा देने और पर्यावरण के अनुकूल प्राकृतिक खेती को मजबूत बनाने में मददगार हो सकती हैं.
विशेषज्ञों ने किसानों को बताया कि मिट्टी की सेहत खराब होने का असर केवल फसलों तक सीमित नहीं रहता. पोषक तत्वों के बहाव और पर्यावरणीय क्षरण से जलीय पारिस्थितिकी तंत्र और मत्स्य संसाधन भी प्रभावित होते हैं. कार्यक्रम के दौरान BSF लार्वा को टिकाऊ मछली आहार और जैविक कचरा प्रबंधन के प्रभावी समाधान के रूप में प्रदर्शित किया गया. किसानों को BSF आधारित उर्वरक और लार्वा भी वितरित किए गए.
CMFRI की वैज्ञानिक टीमों ने केरल के करीब 30 कृषि गांवों का दौरा किया. इस दौरान किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग और मिट्टी तथा जल संसाधनों के संरक्षण के बारे में जागरूक किया गया. पिछले दो महीनों में संस्थान ने केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और गुजरात के 12 जिलों में 1500 से अधिक किसानों तक पहुंच बनाकर टिकाऊ और जिम्मेदार खेती का संदेश पहुंचाया.