
बॉम्बे हाई कोर्ट ने बुधवार को महाराष्ट्र में जारी सूखे के संबंध में दायर एक जनहित याचिका (PIL) पर जल्द सुनवाई करने पर सहमति जताई है. यह याचिका खेतिहर मजदूरों के समर्थन में दायर की गई है. याचिका में मजदूरों को 15 दिन के भीतर काम उपलब्ध कराने की मांग की गई है.
जब वकील देवयानी कुलकर्णी ने 'स्वाभिमानी मजदूर संगठन' द्वारा दायर इस जनहित याचिका पर जल्द सुनवाई की मांग रखी, तो चीफ जस्टिस एमसी त्रिपाठी और अद्वैत सेठना की बेंच ने कहा, "सरकार पहले ही कदम उठा रही है. शायद आपने उन राहत उपायों को नहीं देखा है जो पहले ही दिए जा चुके हैं."
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे इस सप्ताह 1.5 करोड़ किसानों के बैंक खातों में 'अग्रिम सूखा राहत' के तौर पर 5,000-5,000 रुपये जमा करें. इसके लिए कुल 7,500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है.
राज्य के 305 तालुकों में सूखा घोषित होने के बाद से कई अन्य राहत उपाय भी लागू किए गए हैं. इनमें भूमि राजस्व (लगान) से छूट, फसल लोन का कागज दोबारा तैयार करना, कृषि संबंधी कर्ज की वसूली पर रोक, कृषि पंपों के लिए बिजली बिलों में छूट, स्कूली और कॉलेज छात्रों की परीक्षा फीस माफ करना शामिल है.
हालांकि, वकील देवयानी कुलकर्णी ने जोर देकर कहा, "हां, हमने देखा है कि 5,000 रुपये का तत्काल राहत पैकेज दिया गया है, लेकिन इसमें खेतिहर मजदूरों और सीमांत किसानों को शामिल नहीं किया गया है."
उन्होंने यह भी बताया कि गन्ने की कटाई करने वाले मजदूरों से जुड़ा एक मामला पहले से ही 4 नवंबर के लिए सूचीबद्ध (लिस्टेड) है, इसलिए उन्होंने अनुरोध किया कि सूखे से जुड़ी इस जनहित याचिका को भी उसी के साथ सूचीबद्ध किया जाए. बेंच ने इस पर सहमति जता दी.
इस जनहित याचिका में सरकार को निर्देश देने की मांग की गई है कि रोजगार गारंटी योजनाओं के तहत काम के लिए आवेदन करने वाले किसी भी व्यक्ति को 15 दिनों के भीतर काम उपलब्ध कराया जाए. साथ ही, अगर किसी आवेदक को उन 15 दिनों के भीतर काम नहीं मिलता है, तो उसे बेरोजगारी भत्ता दिया जाए.
इस जनहित याचिका (PIL) में मांग की गई है कि सरकार गरीब, भूमिहीन और प्रवासी कृषि मजदूरों के लिए ऐसी सहायता योजनाएं बनाए और लागू करे, जो जमीन के मालिकों को दी जाने वाली योजनाओं के बराबर ही अच्छी हों. इसमें सरकार को निर्देश देने की मांग की गई है कि वह आधिकारिक तौर पर सूखाग्रस्त घोषित इलाकों में रहने वाले भूमिहीन मजदूरों और छोटे किसानों के लिए वित्तीय मुआवजे की गणना करे और एक तय समय-सीमा के भीतर इसका भुगतान करे.
याचिका में सरकार को यह निर्देश देने की भी मांग की गई है कि वह प्रभावित लोगों में से आवेदन करने वालों को जीवन-यापन के लिए जरूरी चीजें मुफ्त में उपलब्ध कराए. इसमें तीन महीने तक नकद सहायता (जो एक अकुशल मजदूर के लिए तय न्यूनतम मजदूरी के बराबर हो), साफ पीने का पानी, भोजन और राशन का खर्च, और पशुओं के लिए चारा जैसी अन्य सुविधाएं शामिल हैं.(विद्या की रिपोर्ट)