चीनी संकट से निपटने के लिए सरकार अलर्ट! बिना चुंगी आयात की समय-सीमा बढ़ाई, जानिए क्या है पूरा प्लान

चीनी संकट से निपटने के लिए सरकार अलर्ट! बिना चुंगी आयात की समय-सीमा बढ़ाई, जानिए क्या है पूरा प्लान

भारत सरकार ने देश में चीनी की कीमतों को काबू में रखने और पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए 10 लाख मीट्रिक टन कच्चे चीनी के कर-मुक्त (Duty-Free) आयात की समय-सीमा को 31 अक्टूबर से बढ़ाकर 31 दिसंबर कर दिया है. इसके साथ ही, चीनी की कमी से निपटने के लिए आगामी इथेनॉल आपूर्ति वर्ष 2026-27 (सप्लाई ईयर) के दौरान गन्ने के रस और बी-हेवी मोलासेस (शीरे) से इथेनॉल बनाने पर पूरी तरह से रोक लगा दी है. 'रॉयटर्स' ने रिपोर्ट दी है.

क‍िसान तक
  • नई दिल्ली,
  • Oct 23, 2026,
  • Updated Oct 23, 2026, 4:55 PM IST

दुनिया के सबसे बड़े चीनी उपभोक्ता देश भारत में चीनी की घरेलू उपलब्धता बढ़ाने और कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए केंद्र सरकार ने कई बड़े कदम उठाए हैं. सरकार ने 10 लाख मीट्रिक टन कच्चे चीनी (Raw Sugar) के कर-मुक्त आयात की समय-सीमा को 31 अक्टूबर से बढ़ाकर 31 दिसंबर करने का आधिकारिक आदेश जारी कर दिया है. इससे आयातकों को अंतरराष्ट्रीय बाजार से चीनी मंगाने के लिए और अधिक समय मिल सकेगा.

आयात की समय-सीमा क्यों बढ़ाई गई?

उद्योग से जुड़े सूत्रों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊंची कीमतों और भारतीय बाजार के साथ भाव का तालमेल न बैठने (Price Parity) के कारण अब तक आयात में ज्यादा तेजी नहीं आई थी. सीमा बढ़ाने का मुख्य उद्देश्य यह है कि जैसे ही अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कीमतें घटें, भारतीय व्यापारी आसानी से और किफायती दरों पर चीनी का आयात कर सकें. भारत ने इससे पहले आखिरी बार 2016-2017 के सीजन में कच्चे चीनी के आयात की अनुमति दी थी.

चीनी उत्पादन में गिरावट और मांग का गणित

देश में चीनी की किल्लत और सप्लाई टाइट होने का मुख्य कारण उत्पादन में आई गिरावट है. मार्केटिंग वर्ष 2025-26 (अक्टूबर-सितंबर) के लिए देश में चीनी उत्पादन का अनुमान घटाकर 306 लाख टन कर दिया गया है, जो पहले 343 लाख टन अनुमानित था. भारत में हर साल लगभग 280 से 285 लाख टन चीनी की खपत होती है.

इथेनॉल में डायवर्जन (2.4 मिलियन टन) के बाद 2025-26 सीजन में वास्तविक शुद्ध चीनी उत्पादन लगभग 27.9 मिलियन टन रहा, जबकि 4.7 मिलियन टन के शुरुआती स्टॉक को मिलाकर कुल उपलब्धता करीब 32.6 मिलियन टन थी.

विशेषज्ञों का मानना है कि उत्पादन के गलत शुरुआती अनुमानों के आधार पर नवंबर 2025 में 15 से 20 लाख टन चीनी के निर्यात की इजाजत देना भी इस स्थिति के लिए जिम्मेदार है. निर्यात पर पूरी तरह रोक लगाने से पहले देश से करीब 8 लाख टन चीनी बाहर भेजी जा चुकी थी—और अब लगभग उतनी ही मात्रा में कच्ची चीनी के आयात की तैयारी की जा रही है.

गन्ने के रस और शीरे से इथेनॉल बनाने पर रोक

चीनी की बचत करने के लिए खाद्य मंत्रालय ने एक और बड़ा सख्त कदम उठाया है. मंत्रालय ने सभी चीनी मिलों और डिस्टिलरी को पत्र जारी कर सूचित किया है कि आगामी इथेनॉल सप्लाई ईयर 2026-27 (नवंबर 2026 से अक्टूबर 2027) के दौरान गन्ने के रस (Sugarcane Juice/Syrup) और बी-हेवी मोलासिस (BHM) से इथेनॉल बनाने की अनुमति नहीं होगी.

सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) द्वारा चीनी-आधारित इन दो कच्चे मालों से इथेनॉल न खरीदने की घोषणा के तुरंत बाद खाद्य मंत्रालय ने यह फैसला लिया. इस कदम का सीधा मकसद यह सुनिश्चित करना है कि गन्ने की पूरी मिठास का इस्तेमाल चीनी बनाने में हो, ताकि देश में खाद्य चीनी की कोई किल्लत न हो.

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