बिहार की सिंचाई व्यवस्था होगी मजबूत, विश्व बैंक से मिलेगी 4415 करोड़ की मदद

बिहार की सिंचाई व्यवस्था होगी मजबूत, विश्व बैंक से मिलेगी 4415 करोड़ की मदद

बिहार में सिंचाई व्यवस्था को बेहतर बनाने और बाढ़-कटाव की समस्या से निपटने के लिए बड़ा कदम उठाया गया है. बिहार सरकार और विश्व बैंक की साझेदारी से 4,415 करोड़ रुपये की जल सुरक्षा और सिंचाई आधुनिकीकरण परियोजना शुरू की जाएगी.

सिंचाई व्यवस्था होगी मजबूत (सांकेतिक तस्वीर)सिंचाई व्यवस्था होगी मजबूत (सांकेतिक तस्वीर)
अंक‍ित कुमार स‍िंह
  • Patna,
  • Sep 09, 2026,
  • Updated Sep 09, 2026, 10:41 AM IST

बिहार में बाढ़, कटाव और सिंचाई की समस्या से निपटने और जल संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने के लिए बड़ा कदम उठाया गया है. बिहार सरकार और विश्व बैंक मिलकर बिहार जल सुरक्षा और सिंचाई आधुनिकीकरण परियोजना पर काम करेंगे. इस परियोजना के लिए कुल 4,415 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया गया है. इसका उद्देश्य राज्य में जल प्रबंधन को बेहतर बनाना, बाढ़ और कटाव से होने वाले नुकसान को कम करना और किसानों के लिए सिंचाई की सुविधाओं को मजबूत करना है.

राज्य के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने बताया कि इस परियोजना के कुल खर्च में 70 प्रतिशत राशि विश्व बैंक देगा, जबकि 30 प्रतिशत राशि बिहार सरकार की ओर से दी जाएगी. सरकार का कहना है कि बदलते मौसम और जलवायु परिवर्तन का असर खेती पर भी पड़ रहा है. ऐसे में खेती को मजबूत, टिकाऊ और बाढ़-सूखे जैसी समस्याओं से निपटने लायक बनाना जरूरी है.

तीन विभाग मिलकर कर रहे हैं काम

कृषि मंत्री ने बताया कि बिहार जल सुरक्षा और सिंचाई आधुनिकीकरण परियोजना को जल संसाधन विभाग, कृषि विभाग और ग्रामीण विकास विभाग मिलकर लागू कर रहे हैं. इस परियोजना के तहत जलवायु के अनुकूल खेती (CRA) को बढ़ावा देने के लिए कमांड क्षेत्र के आधार पर 11 प्रखंडों का चयन किया गया है. इनमें रोहतास, बक्सर, कैमूर, मधुबनी, गोपालगंज और सीवान जिले के प्रखंड शामिल हैं. इन क्षेत्रों में किसानों को बदलते मौसम और जलवायु के हिसाब से खेती करने में मदद दी जाएगी, ताकि खेती को ज्यादा सुरक्षित और टिकाऊ बनाया जा सके.

इन चार पहलुओं पर सरकार करेगी काम

कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने बताया कि यह परियोजना चार मुख्य हिस्सों में काम करेगी. पहले हिस्से में सिंचाई व्यवस्था को बेहतर और आधुनिक बनाया जाएगा. सिंचाई सेवाओं की देखरेख और रखरखाव के साथ-साथ मौसम के अनुकूल खेती को बढ़ावा दिया जाएगा. किसानों और संबंधित कर्मचारियों को प्रशिक्षण भी दिया जाएगा. दूसरे हिस्से में तटबंधों और नदियों के किनारों को मजबूत किया जाएगा. साथ ही बाढ़ और कटाव से बचाव के लिए हरित और प्राकृतिक उपायों को बढ़ावा दिया जाएगा.

तीसरे हिस्से में जल प्रबंधन से जुड़े विभागों और कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाई जाएगी. जल और कृषि से जुड़ी जानकारी के लिए एक सहायता केंद्र बनाया जाएगा. इसके अलावा बिहार के लिए नई जल नीति तैयार करने और जल नियामक प्राधिकरण बनाने की दिशा में भी काम होगा. चौथे हिस्से में परियोजना को सही तरीके से लागू करने, उसकी निगरानी और समीक्षा करने के साथ-साथ पैसों के सही इस्तेमाल और वित्तीय प्रबंधन पर ध्यान दिया जाएगा.

परियोजना को बेहतर करने की इन्हें मिली जिम्मेदारी

विजय कुमार सिन्हा ने बताया कि जलवायु के अनुकूल खेती को बढ़ावा देने के लिए परियोजना में जिम्मेदारियां तय कर दी गई हैं. इसके तहत कृषि विभाग के प्रधान सचिव को अध्यक्ष, कृषि निदेशक को मुख्य अधिकारी (नोडल पदाधिकारी) और भूमि संरक्षण निदेशक को सहायक अधिकारी (सह-नोडल पदाधिकारी) की जिम्मेदारी दी गई है. 

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