Monsoon Alert: सितंबर में कम बारिश का अलर्ट, फसलों, महंगाई और आयात पर पड़ सकता है बड़ा असर

Monsoon Alert: सितंबर में कम बारिश का अलर्ट, फसलों, महंगाई और आयात पर पड़ सकता है बड़ा असर

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने सितंबर में सामान्य से कम बारिश और औसत से अधिक तापमान का अनुमान जताया है. अगस्त में कम बारिश के बाद यह स्थिति खरीफ और रबी दोनों सीजन की फसलों के लिए चिंता बढ़ा सकती है. विशेषज्ञों का मानना है कि कमजोर मॉनसून का असर कृषि उत्पादन, खाद्य महंगाई, आयात और RBI की नीतियों तक दिखाई दे सकता है.

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  • New Delhi,
  • Sep 08, 2026,
  • Updated Sep 08, 2026, 10:10 AM IST

भारत में इस साल मॉनसून का पैटर्न लगातार चिंता का विषय बना हुआ है. 'रॉयटर्स' की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने सितंबर महीने में सामान्य से कम बारिश और सामान्य से अधिक तापमान रहने का अनुमान जताया है. अगस्त में भी कई इलाकों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई थी, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है.

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि 'अल नीनो' की स्थिति मजबूत होने के कारण सितंबर में भी बारिश कमजोर रह सकती है. यदि ऐसा होता है तो देश का कुल मॉनसून की बारिश पिछले करीब दो दशकों के सबसे कमजोर मॉनसून में शामिल हो सकती है.

खरीफ फसलों के लिए क्यों अहम है सितंबर?

इस साल जून में मॉनसून की शुरुआत कमजोर रही और बारिश सामान्य से काफी कम रही. इसके कारण मिट्टी में पर्याप्त नमी नहीं बन सकी और कपास, सोयाबीन, मक्का और धान जैसी खरीफ फसलों की बुआई कई जगह प्रभावित हुई.

अगस्त में भी अपेक्षित बारिश नहीं हुई, जिससे फसलें नमी की कमी से जूझ रही हैं. फिलहाल सोयाबीन, कपास और धान जैसी फसलें दाना भरने और फलियां बनने के महत्वपूर्ण चरण में हैं. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार इस समय पर्याप्त नमी नहीं मिलने पर उत्पादन में सीधा नुकसान हो सकता है.

यदि सितंबर में भी बारिश कम रहती है तो कई राज्यों में खरीफ फसलों की पैदावार घटने की आशंका है.

रबी सीजन की खेती पर भी पड़ सकता है असर

सितंबर का महीना सिर्फ खरीफ फसलों के लिए ही नहीं बल्कि आगामी रबी सीजन के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है.

आमतौर पर किसान इसी समय गेहूं, चना, रेपसीड और मक्का जैसी रबी फसलों की तैयारी शुरू करते हैं. सितंबर की बारिश मिट्टी में नमी जमा करने का काम करती है. यदि नमी का स्तर कम रहा तो बीजों के अंकुरण और शुरुआती बढ़वार पर असर पड़ सकता है.

इसका नतीजा रबी फसलों के रकबे और उत्पादन दोनों में कमी के रूप में सामने आ सकता है.

चीनी, तिलहन और दालों के उत्पादन पर खतरा

कम बारिश का असर सबसे ज्यादा पानी मांगने वाली फसलों पर दिखाई दे सकता है. गन्ने की फसल पहले से ही नमी की कमी का सामना कर रही है. अगले महीने चीनी मिलों में पेराई सीजन शुरू होना है, लेकिन कम बारिश से भविष्य की गन्ना खेती प्रभावित होने का खतरा है.

सोयाबीन और मूंगफली जैसी तिलहन फसलों का उत्पादन भी घट सकता है. वहीं रबी सीजन में रेपसीड की बुआई कम होने की आशंका है. इससे भारत को खाद्य तेलों का आयात बढ़ाना पड़ सकता है.

चना, अरहर और मूंग जैसी दालें भी बड़े पैमाने पर वर्षा आधारित क्षेत्रों में उगाई जाती हैं. कमजोर उत्पादन की स्थिति में भारत को दालों का आयात बढ़ाना पड़ सकता है.

कपास उत्पादन पर असर पड़ने की स्थिति में सरकार को घरेलू मांग पूरी करने के लिए सीमित मात्रा में शुल्क मुक्त आयात की अनुमति देने पर विचार करना पड़ सकता है.

कृषि व्यापार नीति में हो सकते हैं बदलाव

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गेहूं, कपास और चीनी उत्पादक है, जबकि चावल उत्पादन और निर्यात में शीर्ष देशों में शामिल है.

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मॉनसून की कमी से उत्पादन प्रभावित होता है तो सरकार को आयात और निर्यात नीति में बदलाव करने पड़ सकते हैं. हालांकि चावल का पर्याप्त सरकारी स्टॉक मौजूद होने के कारण फिलहाल चावल निर्यात पर किसी बड़े असर की संभावना नहीं बताई जा रही है.

महंगाई और RBI के लिए भी बढ़ सकती है चुनौती

कमजोर मॉनसून का असर सिर्फ खेती तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह सीधे खाद्य महंगाई को भी प्रभावित करता है.

भारत के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) में खाद्य पदार्थों की हिस्सेदारी काफी अधिक है. ऐसे में यदि उत्पादन घटता है तो खाद्यान्न और अन्य कृषि उत्पादों की कीमतों में वृद्धि हो सकती है.

पिछले दो वर्षों में अच्छी बारिश ने खाद्य आपूर्ति बढ़ाकर महंगाई को नियंत्रित रखने में मदद की थी. लेकिन इस बार फसलों को नुकसान होने पर खाद्य महंगाई बढ़ सकती है.

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई में खुदरा महंगाई बढ़कर 4.45 प्रतिशत और खाद्य महंगाई 5.52 प्रतिशत पर पहुंच गई थी. ऐसे में यदि मॉनसून और कमजोर रहता है तो भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के सामने विकास दर और महंगाई के बीच संतुलन बनाना और मुश्किल हो सकता है.

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

जानकारों का कहना है कि सितंबर की बारिश इस बार सिर्फ खरीफ फसलों के लिए नहीं, बल्कि रबी सीजन, खाद्य कीमतों, आयात-निर्यात और देश की आर्थिक स्थिति के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है. किसानों से लेकर बाजार और नीति निर्माताओं तक, सभी की नजर अब आने वाले कुछ हफ्तों के मौसम पर टिकी हुई है.

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