आलू-शकरकंद रिसर्च में बड़ी भूमिका निभाएगा भारत, कृषि मंत्री चौहान ने CIP प्रमुख के साथ की बैठक

आलू-शकरकंद रिसर्च में बड़ी भूमिका निभाएगा भारत, कृषि मंत्री चौहान ने CIP प्रमुख के साथ की बैठक

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने CIP के महानिदेशक डॉ. सिमोन हेक के साथ बैठक में आगरा स्थित CSARC केंद्र की प्रगति, नई ब्रीडिंग तकनीक और उन्नत जर्मप्लाज्म पर चर्चा की.

shivraj meets cip chiefshivraj meets cip chief
क‍िसान तक
  • New Delhi,
  • Sep 07, 2026,
  • Updated Sep 07, 2026, 8:21 PM IST

भारत आलू और शकरकंद की रिसर्च, नई किस्मों के विकास और जलवायु अनुकूल खेती के क्षेत्र में अपनी वैश्विक भूमिका मजबूत करने की तैयारी कर रहा है. इसी सिलसिले में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को कृषि भवन, नई दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र (CIP) के महानिदेशक डॉ. सिमोन हेक के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल के साथ उच्चस्तरीय बैठक की. बैठक में उत्तर प्रदेश के आगरा में स्थापित हो रहे सीसार्क (CSARC) केंद्र की प्रगति, आधुनिक ब्रीडिंग तकनीक, उन्नत जर्मप्लाज्म और किसानों की आय बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा हुई.

ICAR और CIP के काम में दोहराव नहीं हो: चौहान

कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने साफ किया कि भारत में ICAR और CIP के अनुसंधान कार्यों के बीच अनावश्यक दोहराव नहीं होना चाहिए. उन्होंने दोनों संस्थानों के बीच काम का स्पष्ट बंटवारा करने पर जोर दिया, ताकि उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल हो और अनुसंधान से कोई नया और उपयोगी समाधान सामने आए. चौहान ने कहा कि आगरा केंद्र के जरिए दुनिया के बेहतर जर्मप्लाज्म को भारत लाया जाना चाहिए, जिससे देश की कृषि परिस्थितियों के अनुरूप नई किस्में विकसित हों और उनका सीधा फायदा आलू किसानों तक पहुंचे.

'भारत का एग्री विजन दक्षिण एशिया तक सीमित नहीं'

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत का कृषि विजन केवल दक्षिण एशिया तक सीमित नहीं है. भारत ऐसी साझेदारियों के जरिए वैश्विक खाद्य सुरक्षा, पोषण और कृषि विकास में योगदान देना चाहता है. उन्होंने कहा कि CIP जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ सहयोग से वैज्ञानिक उपलब्धियों को किसानों की जरूरतों से जोड़ने और दुनिया की कृषि चुनौतियों के लिए समाधान विकसित करने में मदद मिलेगी.

हाइब्रिड आलू और जलवायु अनुकूल किस्मों पर फोकस

CIP के महानिदेशक डॉ. सिमोन हेक ने बताया कि आगरा में स्थापित किया जा रहा CSARC केंद्र भारत के साथ नेपाल, बांग्लादेश और भूटान समेत दक्षिण एशियाई देशों के लिए महत्वपूर्ण वैज्ञानिक मंच के रूप में काम करेगा. केंद्र में हाइब्रिड आलू तकनीक, बायोफोर्टिफाइड फसलों और जलवायु-सहिष्णु किस्मों पर काम को आगे बढ़ाया जाएगा. इससे आलू के बीज उत्पादन को अधिक तेज और वैज्ञानिक बनाने के साथ निजी क्षेत्र की भागीदारी और निवेश के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है.

शकरकंद को सुपरफूड के तौर पर बढ़ावा

बैठक में शकरकंद के पोषण और बाजार की संभावनाओं पर भी खास चर्चा हुई. आयरन, जिंक और विटामिन-ए से समृद्ध ऑरेंज-फ्लेश्ड बायोफोर्टिफाइड शकरकंद की उन्नत किस्मों को भारतीय किसानों तक पहुंचाने की योजना पर विचार हुआ. कृषि मंत्री ने शकरकंद को पारंपरिक फसल की छवि से बाहर निकालकर आधुनिक सुपरफूड के तौर पर स्थापित करने और इसकी ब्रांडिंग बढ़ाने की जरूरत बताई. इससे शहरी और ग्रामीण बाजारों में मांग बढ़ाने के साथ छोटे किसानों को बेहतर बाजार और आमदनी मिल सकती है.

फायदा सीधे किसानों तक पहुंचाने पर जोर

बैठक का मुख्य फोकस वैज्ञानिक अनुसंधान को खेत और बाजार से जोड़ने पर रहा. मंत्री ने जोर दिया कि आगरा केंद्र से होने वाला काम केवल शोध तक सीमित न रहे, बल्कि नई तकनीक, बेहतर जर्मप्लाज्म और उन्नत किस्मों का लाभ किसानों तक पहुंचे. भारत सरकार, ICAR और CIP के बीच समन्वय के जरिए आलू और शकरकंद की उत्पादकता, पोषण गुणवत्ता और बदलती जलवायु के अनुरूप खेती को मजबूत करने की दिशा में काम किया जाएगा.

बैठक में ये अधिकारी रहे मौजूद

बैठक में कृषि सचिव अतीश चंद्रा, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट और CSARC, आगरा के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. सुधांशु सिंह मौजूद रहे. केंद्रीय बागवानी आयुक्त डॉ. प्रभात कुमार और राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के प्रबंध निदेशक कपिल मीणा ने भी बैठक में हिस्सा लिया. CIP की ओर से यानमिन शी, निदेशक, CIP-चाइना सेंटर फॉर एशिया एंड द पैसिफिक, जॉयस मारू, क्षेत्रीय निदेशक, अफ्रीका, वियन पोलर, क्षेत्रीय निदेशक, लेटिन अमेरिका और नीरज शर्मा, कंट्री मैनेजर, भारत भी उपस्थित रहे. 

MORE NEWS

Read more!